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स्पेस नेटवर्क के बारे में पूरी जानकारी! – Space Network In Hindi

अंतरिक्ष में 100% क्षमता के साथ आखिर कैसे संचार प्रणाली काम करती है? एकबार पढ़ कर जरूर जानें।

21 वीं शताब्दी में इंटरनेट का अपना कुछ अलग ही जलवा है। कहने का मतलब है की, जिस तरह से इंसानों को आज इंटरनेट की आदत लग चुकी है शायद ही ऐसी कोई दूसरी चीज़ होगी जिसने इंसानों को अपनी ओर इतना आकर्षित किया हो। इसलिए आज इंटरनेट के बारे में इंसान इतना ज्यादा उन्मादी हो गया है। खैर! इंटरनेट के बहुत ही ज्यादा फायदे भी हैं; जिसने अंतरिक्ष विज्ञान में हमारी काफी मदद भी की है। स्पेस नेटवर्क (space network in hindi) के बारे में आपने कितना सुना हैं? लोगों को ये तो पता होता हैं की, अंतरिक्ष में अत्याधुनिक उपकरणों के जरिये संचार का काम किया जाता हैं; परंतु वो आखिर किस आधार पर संभव हो पाता हैं ये उनको नहीं पता।

स्पेस नेटवर्क के बारे में पूरी जानकारी! _ Space Network In Hindi.
स्पेस नेटवर्क के बारे में कितना जानते हैं आप? | Credit: Network World.

स्पेस नेटवर्क (space network in hindi) को कई बार अंतरिक्ष विज्ञान का केंद्र भी माना जाता हैं, क्योंकि इसके बिना हम कभी भी अंतरिक्ष को इतना ज्यादा नहीं जान पाते। इसके अलावा पृथ्वी पर कभी भी दूर संचार का काम इतनी आसानी से हो नहीं पाता। लोगों को ब्लैक होल्स, एक्सो-प्लैनेट्स, धूम केतू, आकाशगंगाओं के बारे में इतनी अच्छी जानकारी नहीं मिल पाती। तो इसलिए हम स्पेस नेटवर्क की अहमियत को ध्यान में रखते हुए आज इसी के ऊपर कई सारे बातों को जानने की कोशिश करेंगे।

तो, चलिये अब लेख में आगे बढ़ते हुए इस गुरुत्वपूर्ण स्पेस नेटवर्क के बारे में पता लगाते हैं।

आखिर क्या है “स्पेस नेटवर्क”? – What Is Space Network In Hindi? :-

किसी भी विषय को अगर उसके जड़ से समझा जाए तो, उस विषय से जुड़ी बातें काफी देरी तक आपके दिमाग में मौजूद रहता है। इसलिए हम स्पेस नेटवर्क (space network in hindi) के सभी मूलभूत और जड़ से जुड़ी बातों को जानेंगे। मित्रों! 1980 के दशक में जब नासा अपने जमीनी संचार प्रणाली को उन्नत बनाने की सोच रहा था, तब उसने स्पेस्स नेटवर्क संचार प्रणाली को बनाया। ये संचार प्रणाली पिछले संचार प्रणाली से काफी ज्यादा उन्नत था और इसके माध्यम से काफी तेजी से अंतरिक्ष में संचार के कामों को अंजाम दिया जा सका।

स्पेस नेटवर्क के बारे में पूरी जानकारी! _ Space Network In Hindi.
स्पेस नेटवर्क क्या हैं? | Credit: NASA.

इसने नासा के “Worldwide Network Of Ground Tracking Stations” को रीप्लेस किया था। स्पेस नेटवर्क के माध्यम से वैज्ञानिक अंतरिक्ष में काफी आसानी से कृत्रिम उप-ग्रहों और अंतरिक्ष यानों के साथ संचार कर पाते हैं। इसके अलावा एक खास बात ये हैं की, स्पेस नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले सारे उपकरण दोनों ही अंतरिक्ष और पृथ्वी पर लगे हुए हैं। जिससे पृथ्वी के किसी भी जगह से अंतरिक्ष में कम्युनिकेशन किया जा सकता है। खैर इस नेटवर्क को Goddard Space Flight Center (GSFC)” के द्वारा संचालित किया जाता है।

मित्रों! GSFC कई सारे माध्यमों से स्पेस नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों को नियंत्रित करता हैं, जिसके बारे में हम आगे बातें करेंगे। इसके अलावा हम आगे स्पेस नेटवर्क के कवरेज क्षेत्र के बारे में भी जानेंगे, जिसके बारे में सुनकर शायद आप चकरा जायें। क्योंकि ये बात ही कुछ ऐसी हैं। हम पृथ्वी पर संचार के लिए जिस किसी भी नेटवर्क को इस्तेमाल कर रहें हैं, उससे कई गुना ज्यादा उन्नत और अत्याधुनिक होता हैं ये स्पेस नेटवर्क।

स्पेस नेटवर्क के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से! :-

मित्रों! लेख के इस भाग में हम देखने जा रहें हैं स्पेस नेटवर्क (space network in hindi) के कुछ बहुत ही जरूरी हिस्से। जिसके बारे में हम लोगों को जानना बहुत ही जरूरी है। तो, मुख्य रूप से स्पेस नेटवर्क 5 हिस्सों में बंटा हुआ हैं।

पहला हैं “The Geosynchronous Tracking And Data Relay Satellites” (TDRS), दूसरा हैं “Supporting Ground Terminal Systems”, तीसरा हैं “The Bilateration Ranging And Transponder System”(BRTS), चौथा हैं “Merritt Islnad Annex” (MILA) relay और पाँचवां हैं “Network Control Center Data System” (NCCDS)। मित्रों! इन सभी मुख्य हिस्सों को ले कर ही स्पेस नेटवर्क का वजूद हैं। इन्हीं हिस्सों के आधार पर स्पेस नेटवर्क काम करता हैं और इन्हीं के कारण ही ये कई तरह के काम करने के लिए सक्षम भी हैं। खैर इस के बारे में भी हम अभी बातें करेंगे, तो लेख को आगे पढ़ते रहिएगा।

 

Photo of Goddard Space Flight Center.
गोडडार्ड सेंटर का फोटो | Credit: Advantus Engineer.

वर्तमान के समय में TDRS में प्रथम पीढ़ी के F1 से F7 सैटेलाइट्स और द्वितीय पीढ़ी के F8 से F10 सैटेलाइट्स लगे हुए हैं। इन सैटेलाइट्स के जरिये वैज्ञानिकों काफी सहज ढंग से अपने संदेशों को अंतरिक्ष यानों और उप-ग्रहों तक पहुंचा पा रहें हैं। अभी स्पेस रिले सिस्टम के अधीन 6 अलग-अलग तरह के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट्स मौजूद हैं जो की पृथ्वी के बाहरी वातावरण में रह कर अपना काम कर रहें हैं।

स्पेस नेटवर्क में आखिर क्यों Satellites हैं बहुत ही जरूरी! :-

आपको जानकर हैरानी होगी की, स्पेस नेटवर्क (space network in hindi) को आज अंतरिक्ष के क्षेत्र के अलावा भी कई सारे अन्यों क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाने लगा हैं। ये नेटवर्क सिर्फ स्पेस साइंस तक सीमित न हो कर पृथ्वी पर किए जाने वाले कम्युनिकेशन तक पहुँच चुका हैं। कहने का मतलब ये हैं की, आज स्पेस नेटवर्क के अधीन जीतने भी सैटेलाइट्स हैं वो अंतरिक्ष में सिग्नल को ट्रांसमीट करने के साथ ही साथ पृथ्वी पर भी सिग्नल ट्रांसमीट करने लग रहें है और वो भी किसी स्पेस संस्थान या रिसर्च के लिए नहीं।

Importance of Satellites.
सैटेलाइट्स की भूमिका क्या हैं? | Credit: Geospatila World.

इसलिए आप एक तरह से कह सकते हैं की, आने वाले समय में शायद हम और आप भी इस नेटवर्क को इस्तेमाल करने के लिए सक्षम हो जाएँ। आग अपने एलन मस्क के द्वारा लाये गए “स्टार-लिंक” के बारे में सुना होगा तो, आपको पता होगा की भविष्य में हमें इंटरनेट अंतरिक्ष से ही ला कर दिया जाएगा जिसकी तेजी आज के इंटरनेट से काफी ज्यादा होगा। परंतु मित्रों! अंतरिक्ष से दिये जाने वाले इस इंटरनेट के सुविधा के पीछे सैटेलाइट्स का एक बहुत ही बड़ा किरदार रहने वाला है।

स्पेस नेटवर्क में अभी मुख्य रूप से प्रथम और दूसरे पीढ़ी के सैटेलाइट्स को इस्तेमाल किया जा रहा हैं, परंतु वैज्ञानिकों ने साल 2017 में तीसरे पीढ़ी के सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में छोड़ दिये हैं जिससे आने वाले समय में ये पीढ़ी भी हमें  मदद करने वाला है। स्पेस नेटवर्क के बारे में और एक खास बात ये भी हैं की, इसकी जो कवरेज एरिया हैं वो काफी ज्यादा अच्छा हैं। हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले नेटवर्क से विपरीत ये नेटवर्क काफी ज्यादा अच्छा कवरेज देता है।

स्पेस नेटवर्क का कवरेज क्षेत्र कैसा हैं? :-

अगर कोई अंतरिक्ष यान पृथ्वी के लो अर्थ ओर्बिट पर सफर कर रहा हैं, तब स्पेस नेटवर्क (space network in hindi) के जरिये उस यान तक 100% एक्यूरसी के साथ संदेश भेजा जा सकता है। वैसे बता दूँ की, स्पेस नेटवर्क का क्षेत्र (पृथ्वी के सतह से) 73 km ऊंचाई से लेकर 3000 km ऊंचाई तक हैं। इस ऊंचाई के अंदर मौजूद कोई भी अंतरिक्ष यान के साथ आप बहुत ही सहज तरीके से स्पेस नेटवर्क के जरिये कम्युनिकेशन कर सकते है। मित्रों! ये हमारे लिए एक बहुत ही बात हैं, क्योंकि पूर्ण तरीके से सटी कता के साथ इस तरीके से कम्युनिकेशन कर पाना और वो भी अंतरिक्ष में एक बहुत ही बड़ी बात है।

Satellites in lower earth orbit.
लोवर अर्थ ओर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स के फोटो | Credit: Universe Today.

हालांकि! और एक बात ध्यान देने वाली ये भी हैं की, जो अंतरिक्ष यान या उपकरण स्पेस नेटवर्क के कवरेज क्षेत्र से बाहर यानी अंतरिक्ष में बहुत ही दूर तक जाते हैं। उनके लिए अंतरिक्ष संस्थानों ने एक अलग ही इंतजाम कर के रखा हैं। मित्रों! इन सभी अंतरिक्ष यानों के लिए Deep Space Network” (DSN) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा कई बार वैज्ञानिक उस अंतरिक्ष यान के लिए एक स्वतंत्र नेटवर्क का भी इस्तेमाल करने लगते हैं, जिससे कम्युनिकेशन बिना किसी रुकाव के साथ होता रहता है।

साल के हर दिन चौबीस घंटे लगभग 100% एक्यूरसी काम करते रहना कोई मज़ाक करने वाली नहीं है। स्पेस कम्युनिकेशन के साथ स्पेस नेटवर्क ने जिन-जिन क्षेत्रों में अपना अतुलनीय योगदान दिया हैं, उसके लिए मानव जाती को इसका आभार मानना चाहिए।


Sources :- www.nasa.gov, www.web.archive.org

Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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