Physics

जानिए नाभिकीय विखंडन का पूरा विज्ञान – Full Science Of Nuclear Fission In Hindi.

क्या आप घातक न्यूक्लियर फिशन से जुड़े इन दिलचस्प तथ्यों को जानते हैं?

आज के इस समय में हर तरफ विज्ञान का ही वर्चस्व हैं | मेँ जहां भी देखता हूँ वहाँ सिर्फ और सिर्फ विज्ञान का ही महानता नजर आता हैं | स्वास्थ्य के क्षेत्र से लेकर अंतरिक्ष तक हर तरफ विज्ञान अपना प्रभुत्व दिखा रहा है | खैर विज्ञान के अपने ही बहुत सारे विभागों मौजूद हैं , परंतु उन विभागों के अंदर एक ऐसा विभाग भी मौजूद हैं जो की प्रकृति में होने वाले ज़्यादातर घटनाओं को समझने में इनसानों की काफी मदद करता हैं | मेँ यहाँ बात कर रहा हूँ भौतिक विज्ञान की , क्योंकि आज हम भौतिक विज्ञान (Physics)  से जुड़ी एक घटना न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) के ऊपर आलोचना करेंगे |

न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) के नाम से आपको कुछ याद आ रहा हैं ! सोचिए , सोचिए | अगर आप थोडा सा प्रयास करें तो , आपको याद आयेगा की मैंने इस से पहले न्यूक्लियर फ्यूशन (nuclear fusion) के ऊपर एक लेख लिखा था जिस मेँ मैंने इस से जुड़ी कई सारे ज्ञानवर्धक बातों को आपके सामने रखा था | खैर आज हम न्यूक्लिअर फिशन (nuclear fission in hindi) के संज्ञा से ले कर इस से जुड़ी बहुत सारे रोचक तथ्यों को इस लेख के जरिए जानेंगे |

इस से जुड़ी कुछ मूलभूत तथ्य :-

आगे बढ्ने से पहले मेँ आपको बता दूँ की न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) एक ऐसा प्रक्रिया है जो की प्रकृति में बहुत ही जरूरी हैं | बिना इस प्रक्रिया के आणविक स्तर पर कई सारे जैविक और रासायनिक प्रतिक्रिया होना बिलकुल भी संभव नहीं हैं | खैर यह प्रक्रिया आज के युग में बहुत महत्व रखता हैं , क्योंकि यह एक मूलभूत प्रक्रिया हैं | इसी प्रक्रिया के जरिए ही न्यूक्लिअर ऊर्जा का उत्पाद किया जाता हैं| आने वाले समय में न्यूक्लिअर ऊर्जा पृथ्वी को काफी ज्यादा बदल देगा |

खैर चलिए आगे लेख में बढ़ते है और इसके बारे में कई सारे बातों को जानते हैं |

परमाणु विखंडन क्या हैं – What is Nuclear Fission In Hindi ? :-

किसी भी प्रक्रिया को आप अच्छे से उसके संज्ञा या परिभाषा से ही समझ सकते हैं | इसलिए चलिए सबसे पहले न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) क्या है उसके बारे में जानते हैं | मित्रों ! न्यूक्लियर फिशन एक प्रकार पारमाणविक प्रक्रिया है जिसमें किसी भी मौलिक पदार्थ का नाभिक (nuclei) बहुत सारे छोटे-छोटे नाभिकों में परिवर्तित होता हैं | दोस्तों इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए विखंडित होने वाले नाभिक (nuclei) का आकार बड़ा होना चाहिए जिस से वह आसानी से बहुत सारे छोटे-छोटे नाभिकों में बंट सके |

इसके अलावा अगर इस प्रक्रिया में काफी ज्यादा ऊर्जा निकलता हैं | इतनी भारी मात्र में ऊर्जा शायद ही कोई अन्य प्रक्रिया में निकलता हो | इसलिए इसे न्यूक्लियर पावर प्लांट के अंदर भी इस्तेमाल में लिया जाता हैं | मित्रों ! इस प्रक्रिया के जरिए पैदा होने वाले ऊर्जा की मात्रा में बदलाव मूल नाभिक के वजन पर निर्भर करता हैं | अगर नाभिक (nuclei) वजनदार होगा तो ऊर्जा की मात्रा भी उसी हिसाब से ज्यादा होगा |

आपको मेँ और भी बता दूँ की 1 किलो यूरानियम के विखंडन से निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा 4 अरब किलो कोयले के जलने से निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा के समान हैं | तो , आप इस से आसानि से अंदाजा लगा सकते हैं की यह प्रक्रिया कितना ज्यादा शक्तिशाली हैं |

यह प्रक्रिया आखिर कैसे होता हैं ? – How does this Process Happen ? :-

अकसर ज़्यादातर लोगों के मन में यह सवाल उठता है की , आखिर कैसे न्यूक्लियर फ्यूशन (nuclear fission in hindi) का यह प्रक्रिया घटित होता हैं | मित्रों ! आप मानो या न मानो परंतु यह बात सत्य है की इस प्रक्रिया की मूलभूत बातों को ज़्यादातर लोग आलोचना ही नहीं करते हैं | इस प्रक्रिया का मूल आधार क्या है ! इसके बारे में आपको कोई नहीं बताता | इसलिए आगे मैंने आपको सरल भाषा में इस प्रक्रिया के मूलभूत बातों को समझाया हैं| तो , लेख के इस भाग को जरा धैर्य के साथ पढ़िएगा |

आपने आइन्सटाइन जी के द्वारा दिया गया ऊर्जा के समीकरण को तो अवश्य की जानते होंगे | मेँ E=mc^2 इस समीकरण की ही बात कर रहा हूँ | खैर इस समीकरण के जरिए ही आप न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) को समझ सकते हैं | अगर आप इस समीकरण को अच्छे से देखेंगे तो आपको पता चलेगा की किसी भी प्रक्रिया में ऊर्जा का उत्पाद या ऊर्जा का खपत पदार्थ की वजन में होने वाले बदलाव के कारण ही होता हैं |

जानिए नाभिकीय विखंडन का पूरा विज्ञान - Full Science Of Nuclear Fission in Hindi.
ऐसे होता है न्यूक्लिअर फिशन | Credit : Youtube.

यह समीकरण और भी कहता हैं की ऊर्जा और पदार्थ का वजन आपस में समान हैं | जब भी वजन में कमी या अधिकता पायी जाती है तब उसी हिसाब से ऊर्जा में भी बदलाव नजर आता हैं | यहाँ आपको मेँ और भी बता दूँ की वजन में होने वाला छोटा से छोटा बदलाव ऊर्जा में काफी ज्यादा बदलाव लाता हैं |

ऐसे होता है न्यूक्लिअर फीशन! :-

आपको अगर याद हो तो शायद आपने अपने स्कूल में बाइंडिंग एनर्जि (Binding Energy) के बारे मेँ अवश्य ही कुछ न कुछ पढ़ा ही होगा | संक्षिप्त में कहूँ तो बाइंडिंग एनर्जि एक ऐसी ऊर्जा है जो की किसी भी एक नाभिक को छोटे-छोटे हिस्सों (nucleons) में बाँट के लिए जरूरत पड़ती हैं | जिस किसी भी न्यूक्लेयी का बाइंडिंग एनर्जि ज्यादा होता है , उसको आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता हैं |

इसलिए न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) को अंजाम देने में बाइडिंग एनर्जि का बहुत बड़ा हाथ होता हैं | इसके अलावा बहुत बड़े-बड़े नाभिकों (nuclei) में बाइंडिंग एनर्जि काफी ज्यादा होता हैं | ज्यादा बाइंडिंग एनर्जि होने के कारण बड़े-बड़े नाभिक ज़्यादा देर तक अपना संतुलन नहीं बना पाते हैं और फल स्वरूप वह नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं |

बाद में इसी के कारण वह बड़ा नाभिक (nuclei) कई सारे छोटे-छोटे नाभिकों ने बंट जाता हैं | छोटे-छोटे हिस्सों में बंट जाने से नाभिकों के अंदर काफी ज्यादा स्थिरता आती है और वह आसानी से प्रकृति के अंदर ज्यादा देर तक मौजूद रह पाते हैं | मित्रों ! मेँ आपको और भी बता दूँ की न्यूक्लिअर फिशन के कारण बहुत ज्यादा ऊर्जा का उत्पाद होता है  , जो की नाभिकों के विखंडन से पैदा होता हैं |

यहाँ आपको जानकर हैरानी होगा की फिशन से निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा फ्यूशन से निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा से कम होता हैं | जी हाँ ! अपने सही सुना फ्यूशन प्रक्रिया फिशन प्रक्रिया से भी काफी ज्यादा शक्तिशाली हैं |

न्यूक्लिअर फिशन प्रक्रिया के उदाहरण : Nuclear Fission Examples In Hindi

जैसा की मैंने आपको ऊपर ही कहा है , न्यूक्लिअर फिशन (nuclear fission in hindi) प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए प्रारंभिक अवस्था में ऊर्जा की जरूरत पड़ती हैं | इसलिए यह प्रक्रिया आसानी से कहीं पर भी अपने-आप होना थोड़ा सा मुश्किल हैं | खैर आपको न्यूक्लिअर प्लांट के अंदर न्यूक्लिअर फिशन प्रक्रिया को बड़ी ही आसानी से देख सकते हैं| ज़्यादातर फिशन के प्रक्रियाओं का उदाहरण न्यूक्लियर प्लांट के अंदर ही देखने को मिल जाता हैं|

यहाँ यूरानीयम-235 को बाहरी ऊर्जा के जरिए विखंडित किया जाता हैं | इस प्रक्रिया के लिए प्लांट के अंदर स्वतंत्र रूप से ऊर्जा के स्रोतों का बंदोबस्त रहता हैं , जिस से यूरानीयम के नाभिक (nuclei) के ऊपर काफी ज्यादा दबाव पड़ता हैं | इसी दबाव के चलते इसका नाभिक एक समय के बाद विखंडित हो कर बेरियम-141 और क्रिप्टन-92 के रूप में दो छोटे-छोटे नाभिकों में बंट जाते हैं |

Uranium-235 ————————> Barium-141 + Krypton-92.

ऊपर दिये गए समीकरण से अभी तो आपको न्यूक्लिअर फिशन की सबसे साधारण और आसान उदाहरण मिल गया | परंतु मित्रों यहाँ आपको और कुछ जानना भी बहुत ही जरूरी हैं | दरअसल फिशन के इस प्रक्रिया के दौरान 2 न्यूट्रान का भी उत्पाद होता हैं | यह दो न्यूट्रान ऊर्जा के ही रूप होते हैं | बाद में चलकर यह दो न्यूट्रान दूसरे किसी यूरानियम नाभिक को विखंडित करने में मदद करते हैं |

चेन रिएक्शन और न्यूक्लियर फिशन : Chain Reaction and Nuclear Fission In Hindi

आपने कभी अगर डिस्कोवेरी या नेट जियो चैनल देखा होगा तो , आप शायद चेन रिएक्शन के बारे में कुछ न कुछ जरूर ही देखा होगा | चेन रिएक्शन एक प्रकार का स्वतः और देर तक चलने वाला प्रक्रिया हैं | प्रकृति में आपको कई प्रकार के चेन रिएक्शन देखने को मिलेगा जो की काफी ज्यादा सरल और आवश्यक हैं |

खैर यहाँ मेँ आपको न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) और चेन रिएक्शन (Chain Reaction) के बारे में जुड़ी कुछ बातों को बताने जा रहा हूँ | दोस्तों ! फिशन प्रक्रिया एक प्रकार चेन रिएक्शन ही हैं क्योंकि यह स्वतः कई देर तक चल सकता हैं | कहने का मतलब यह है की जब भी कहीं फिशन प्रक्रिया घटता है तब उस से दो न्यूट्रान निकलते हैं |
यह दो न्यूट्रान बाद में दूसरे फिशन प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और यह प्रक्रिया ऐसे ही स्वतः चलता ही रहता हैं | इसमें अगर आप बाहरी बल का प्रयोग करें तो इस प्रक्रिया को आसानी से नियंत्रण भी किया जा सकता हैं |

Misuse of Nuclear Fission.
न्यूक्लिअर फिशन का गलत इस्तेमाल | Credit : Youtube.

फ्यूशन प्रक्रिया के विपरीत इस प्रक्रिया में आसानी से किसी भी प्रकार का फेर बदल भी किया जा सकता हैं | न्यूट्रॉन और यूरानियम परमाणु के अंदर दूरी ही आमतौर पर चेन रिएक्शन के होने का दारोमदार उठाता हैं | बाहरी बल के प्रयोग से अगर यूरानियम परमाणु के अंदर वजन का फेर बदल किया जाए तो , बड़ी ही आसानी से किसी भी फिशन प्रक्रिया के उत्पाद को परिवर्तित किया जा सकता हैं |

इसके अलावा ऊर्जा में भी फेर बदल करने से भी फिशन प्रक्रिया काफी ज्यादा प्रभावित हो जाता हैं क्योंकि इस से न्यूट्रान कणिकाओं पर भी प्रभाव पड़ता है जो की फिशन प्रक्रिया का मूल आधार हैं |

मित्रों आपको इस के बारे में क्या लगता हैं ? जरूर बताएं |

क्या फिशन प्रक्रिया काफी ज्यादा घातक हैं ? :-

वाकई ऊपर शीर्षक में जो प्रश्न पूछा गया है , यह काफी ज्यादा महत्वपूर्ण और हैरान कर देने वाली हैं | कुछ लोग पता नहीं न्यूक्लिअर के शब्द से ही घबड़ा जाते हैं| लोगों के अंदर न्यूक्लिअर शब्द से हमेशा ही न्यूक्लिअर हथियारों का ही दर लगा रहता हैं | यही वजह है की आज लोग बिना जाने फ्यूशन और फिशन प्रक्रियाओं से काफी ज्यादा दर जाते हैं | खैर मैंने आगे इस प्रक्रिया से जुड़ी कुछ बातों को आपके लिए आलोचना किया है जो की न्यूक्लिअर फिशन से जुड़ी आपकी चिंता धारा को काफी ज्यादा प्रभावित करेगा , तो आगे पढ़ते रहिए |

सिक्के की दो पहलू की ही तरह फिशन प्रक्रिया के भी मुख्य रूप से दो पहलू हैं | आपने न्यूक्लिअर प्लांट के अंदर एक पहलू को आसानी से ढूंढ सकते हैं | दरअसल प्लांट के अंदर न्यूक्लिअर ऊर्जा बनाने के लिए काफी सारे सुरक्षा के नियमों को पालन किया जाता हैं | यहाँ पर न्यूक्लिअर मटिरियल को एक सुरक्षित सघनता तक संगृहीत कर के रखा जाता है | इसी कारण से प्लांटों के अंदर होने वाले न्यूक्लिअर फिशन (nuclear fission in hindi) की प्रक्रिया काफी ज्यादा सुरक्षित रहता हैं | यहाँ पर इसे अच्छे कामों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा हैं | इस से मानव जाती की ही भलाई होती हैं |

खैर ऊपर मैंने फिशन प्रक्रिया के एक ही पहलू के ऊपर जिक्र किया हैं | इसलिए अब चलिये एक नजर इसके दूसरे पहलू के ऊपर भी डाल लेते हैं |

कई हद तक न्यूक्लिअर फिशन हो सकता है घातक :-

मित्रों! दुनिया में मौजूद किसी भी चीज़ को अगर गलत रूप से इस्तेमाल किया जाए तो उसका प्रभाव हमेशा ही बुरा ही होगा | इसके अलावा अनियंत्रित ढंग से अगर इस प्रक्रिया को अंजाम दिया जाए तो भी इसका बहुत घातक परिणाम हो सकता हैं | इतिहास साक्षी है की जब-जब परमाणु ऊर्जा को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया है तब-तब मानव सभ्यता को बहुत ही नुकसान झेलना पड़ा हैं |

अगर सुरक्षित मात्रा से अधिक रैडिओ एक्टिव मटिरियल को फिशन प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाए तो , यह प्रक्रिया आसानी से नियंत्रण के बाहर चला जाएगा | एक बार नियंत्रण के बाहर जाने से इसे कोई भी दुबारा नियंत्रण में नहीं ले सकता | इसके बाद प्रक्रिया के कारण बहुत ही ज्यादा ऊर्जा एक झटके में पैदा होगा |

Renewable source of Energy.
सबसे किफ़ायती ऊर्जा का स्रोत- न्यूक्लिअर फिशन | Credit : Grid Point.
सही से करना होगा इसका इस्तेमाल ! :-

भारी मात्रा में ऊर्जा का बनना एक परमाणु बम की तरह काम करेगा जो की काफी ज्यादा तबाही और मुसीबत पैदा करेगा | एक बार अगर यह ऊर्जा असुरक्षित ढंग से वायुमंडल में मिल गया तो , इस से विकिरण का भी खतरा बनेगा | बाद में यह विकिरण दूर-दूर का फैल कर बाकी कसर पूरा कर देगा।

वाकई में अगर इस प्रक्रिया को बिना किसी सुरक्षा के नियमों से किया जाए तो , पृथ्वी पर एक बहुत बड़ी विनाश का लीला जरूर देखने को मिलेगा | खैर उस महाप्रलय को देखें के लिए शायद ही कोई इंसान जिंदा होगा क्योंकि यह पूरे विश्व को एक साथ तबाह कर देगा | हर तरफ आपको हा-हा कार ही दिखाई पड़ेगी और धरती से जीवन की संज्ञा ही मीट चुकी होगी।

न्यूक्लियर फिशन के कुछ फायदे :  Advantages Of Nuclear Fission In Hindi :-

कुछ मात्रा में घातक होने के बाद भी फिशन (nuclear fission in hindi) प्रक्रिया बहुत ज्यादा फायदेमंद हैं | इसी कारण से मैंने नीचे आपको इसके कुछ बहुत ही लाभकारी गुणों के बारे में बताया है | तो , आगे पढ़ते रहिए |

1. दुनिया की सबसे सस्ती ऊर्जा का स्रोत :-

दुनिया में इस्तेमाल किया जाने वाले कुल ऊर्जा के मात्रा की 10% हिस्सा न्यूक्लियर फिशन प्रक्रिया से ही उत्पन्न होता हैं | आज पूरे विश्व में 30 देश ही ऐसे हैं जिन्होंने इस ऊर्जा के स्रोत के सही तरीके से इस्तेमाल करने में सक्षम रहें हैं | आपको जानकार हैरानी होगी की फिशन प्रक्रिया से बनाने वाला ऊर्जा काफी ज्यादा सस्ता होती है | इस प्रक्रिया से दुनिया की सबसे सस्ती ऊर्जा को बनाया जा सकता है।

2. प्रदूषण रहित ऊर्जा का स्रोत :-

आज कल ग्लोबल वार्मिंग के चलते ग्रीन हाउस (green house) गैसों का बहुत ही ज्यादा खतरा हैं | शक्ति उत्पन्न करने के वक़्त बहुत ही ज्यादा प्रदूषण वायुमंडल में मिलता हैं | इसी वजह से दिन व दिन वायुमंडल में कार्बन की मात्रा बढ़ रहा हैं | मित्रों ! आपको जानकार बहुत ही ज्यादा खुशी होगी की फिशन प्रक्रिया से निकलने वाला ऊर्जा प्रदूषण रहित होता हैं।

जी हाँ ! इस से निकलने वाली ऊर्जा विशुद्ध और हितकारी वायुमंडल को बनाने में मदद करता है। अगर दुनिया के सभी देश इस से ऊर्जा निकाले तो , बड़ी आसानी से ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को टाल सकते हैं।

3. पुनः इस्तेमाल किया जा सकता हैं इसको :-

आपने अगर कहीं पढ़ा होगा तो आपको पता होगा की कुछ ऊर्जा के स्रोत ऐसे होते हैं , जिन्हें हम कई बार इस्तेमाल कर सकते हैं | यह ऊर्जा के स्रोत अन्य किसी ऊर्जा के स्रोत के विपरीत बड़ी आसानी से खत्म नहीं होते हैं और इसे हम आसानी से रीसाइकल भी कर सकते है।

मित्रों ! फिशन प्रक्रिया भी एक रीसाइकल होने वाला ऊर्जा का स्रोत हैं। यहाँ पर में आपको बता दूँ की इस प्रक्रिया से निकलने वाला वेस्ट प्रॉडक्ट भी रीसाइकल कर के बाद में इस से भी ऊर्जा निकाला जा सकता हैं।

4. आने वाले समय में ऊर्जा के स्रोत का दूसरा मुख्य विकल्प :-

आज हम जो पेट्रोलियम पदार्थो का ऊर्जा के तौर पर इस्तेमाल कर रहें हैं , यह बहुत ही सीमित मात्रा में पृथ्वी के अंदर मौजूद हैं । इसे आप सिर्फ एक हद तक ही इस्तेमाल कर सकते है।  यह सब ऊर्जा के स्रोतें आपको ज्यादा दिन तक ऊर्जा प्रदान नहीं कर सकती हैं।

एक अध्ययन से यह पता चला है की आने वाले 50 सालों के अंदर यह सब ऊर्जा के स्रोत खत्म हो जाएंगे | इन स्रोतों के खत्म होने के बाद इंसानों को ऊर्जा के दूसरे विकल्पों की जरूरत पड़ेगी।  ठीक इसी सामय ऊर्जा के दूसरे सबसे बड़ी विकल्पों के अंदर न्यूक्लियर फिशन (nuclear fission in hindi) का नाम भी आयेगा।

तो , मित्रों अब इस लेख को अंत करने का वक़्त आ गया है। आपको अगर किसी भी प्रकार अन्य कोई जानकारी चाहिए तो आप कॉमेंट करना न भूलें और हाँ इस लेख के ऊपर आपका क्या राय है कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताएं।

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Bineet Patel

I am a learner and passionate writer who loves to spread the interesting concepts of science through my writing.

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