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मिसाइल की रफ्तार से भी 10000 गुना ज्यादा तेज है यह सितारा – Hypervelocity Star In Hindi

हमारी आकाश गंगा में ही मौजूद है ब्रह्मांड का सबसे तेज तारा US-708! जाने इससे जुड़ी आश्चर्यचकित कर देने वाली बातें

विश्व न्यूज में आपको कई बार मिसाइलों की मारक क्षमता और तेजी को लेकर कई बातें सुनने को मिलती होगीं, इसके अलावा परमाणु बम से युक्त कई मिसाइलों के बारे में भी आपने कई खतरनाक बातें भी सुनी होगी और इसी वजह से इन मिसाइलों को ज़्यादातर लोग दुनिया की सबसे तेज गति करने वाली वस्तु भी मानते हैं।  परंतु क्या सच में यह मिसाइल इतने तेज होते हैं ! जी नहीं दोस्तों मिसाइल उतने भी तेज नहीं होते। पर ब्रह्मांड में सबकुछ संभव है, आज हम इसी कड़ी में मिसाइल से भी 10000 गुना तेज चलने वाले एक ऐसे स्टार यानि तारे (Hypervelocity star In Hindi) की बात करेंगे जिसे ब्रह्मांड का सबसे तेज सितारा भी कहा जाता है।

वैसे पृथ्वी पर शायद ही ऐसी कोई दूसरा वस्तु होगी (प्रकाश के अतिरिक्त) जो की मिसाइलों की रफ्तार से टक्कर ले सके परंतु ब्रह्मांड में ऐसे भी कई खगोलीय चीजें है जो हमारे द्वारा निर्मित मिसाइलों की रफ्तार से भी 10000 गुना ज्यादा तेज हैं जिन में हाइपर वेलोसिटी सितारे मुख्य हैं।

वैसे तो हाइपर वेलोसिटी स्टार (Hypervelocity star In Hindi) देखने में सिर्फ एक साधारण सितारे के ही तरह प्रतीत होते हैं, परंतु इनकी रफ्तार इन सितारों को बहुत ही ज्यादा खास बनाती हैं,  तो, चलिए मित्रों मेरे साथ आज इस  लेख के अंदर इन्हीं गज़ब की सितारों के बारे में बहुत सारी हैरतअंगेज बातों को जानते हैं और आपसे अनुरोध है की आज के विषय को सही से समझने के लिए लेख में आरंभ से लेकर अंत तक मेरे साथ बने रहिएगा।

Fastest Star of The Universe.
अंतरिक्ष का सबसे तेज सितारा | Credit: Universe Today.

आखिर हाइपर वेलोसिटी स्टार क्या हैं ? – What is Hypervelocity Star In Hindi ? :-

NASA के वैज्ञानिकों के द्वारा किए गए एक शोध से पता चला है की, हमारी आकाशगंगा यानी मिल्की वे के केंद्र में स्थित ब्लैक होल से 6 बहुत ही तेजी से गति करने वाले सितारे निकले हैं, इन्हें वैज्ञानिक हाइपर वेलोसिटी स्टार (Hypervelocity star In Hindi) के नाम से पुकारते हैं।  इनकी रफ्तार करीब-करीब 20 लाख किलोमीटर प्रति घंटा है और समय के साथ धीरे-धीरे इनकी रफ्तार भी बढ़ रही हैं।

वैसे तो मिल्की वे का केंद्र खगोलीय धूल के बादलों और कई प्रकार के तरह-तरह के सितारों से भरा हुआ हैं, परंतु वैज्ञानिक हाइपर वेलोसिटी स्टार को उसकी रफ्तार और चमकदार गुणों के कारण आसानी से ढूंढ सकते हैं।  इसके अलावा इन्हीं हाइपर वेलोसिटी स्टार (Hypervelocity star In Hindi) के कारण वैज्ञानिक सितारों की बनने के प्रक्रिया को भी और बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

हाइपर वेलोसिटि स्टार और ब्लैक होल के बीच का अजीब रिश्ता ! :-

वैसे हाइपर वेलोसिटी स्टार के पास इतनी तेज गति आने के पीछे की वजह को अभी तक वैज्ञानिकों ने सटीक रूप से नहीं ढूंढा हैं, परंतु कुछ वैज्ञानिक कहते हैं की जब ब्लैक होल किसी बाईनेरी स्टार सिस्टम (दो तारों का समुह जिसमें तारे एक दूसरे की केंद्र की परिक्रमा करते हैं)  को अपने अंदर निगल जाता हैं तब उन्हीं दो सितारों में से एक सितारे को खुद ब्लैक होल बाहर फिर से उगल कर छोड़ देता हैं। जब ब्लैक होल के द्वारा उगला हुआ सितारा बाहर आता है तब वह अपने साथ-साथ बहुत तेज गति भी लाता है।

इसके अलावा मैं आपको ये भी बता दूँ की, हाइपर वेलोसिटि स्टार (Hypervelocity star In Hindi) किसी भी प्रकार से गुरुत्वाकर्षण शक्ति के वश में नहीं रहते हैं और तेजी से घूमने के कारण इसके चारों तरफ किसी भी प्रकार से धूल या बादल भी नजर नहीं आते हैं। इन सितारों का आकार लगभग हमारे सूर्य से 4 गुना ज्यादा हैं और अब तक वैज्ञानिकों ने ऐसे 130 हाइपर वेलोसिटि स्टार ढूँढ निकाले हैं।

आखिर कितना तेज हैं यह सितारा ? – How Fast Is a Hypervelocity Star ? :-

अब लोगों के मन में यह सवाल जरूर ही उठा होगा की, आखिर कितना तेज यह सितारा गति कर सकता हैं ? तो, सुनिए हाइपर वेलोसिटी सितारों (Hypervelocity star In Hindi) का औसतन वेग 20 लाख किलोमीटर प्रति घंटा है।  इतनी तेजी से गति करने के कारण कई बार यह अपनी ही आकाशगंगा से ही बाहर चला जाता है।  मैं आपको यहाँ ये भी बता दूँ की, हाइपर वेलोसिटी स्टार प्रकाश के बाद अंतरिक्ष में दूसरा सबसे तेज गति करने वाला खगोलीय पिंड हैं।

मित्रों ! यहाँ आपको और एक बात को भी याद रखना चाहिए। मैंने ऊपर ही कहा हैं की, ज़्यादातर हाइपर वेलोसिटी स्टार (Hypervelocity star In Hindi) ब्लैक होल के अंदर से ही निकलते हैं परंतु दोस्तों कुछ हाइपर वेलोसिटि सितारे ऐसे भी हैं जो की ब्लैक होल से नहीं निकलते हैं। जी हाँ ! आपने सही सुना कुछ हाइपर वेलोसिटी सितारे ऐसी भी हैं जो की ब्लैक होल से न निकलकर मिल्की वे के पास मौजूद उसकी उप आकाशगंगा लार्ज मैग्लेनिक क्लाउड (Large Magellanic Cloud) से निकलते हैं।

आपको बता दूँ की, लार्ज मेग्लेनिक क्लाउड मिल्की वे के पास मौजूद एक Dwarf गैलेक्सी हैं जो की मिल्की वे के चारों तरफ घूम कर चक्कर काट रही है। वैसे और बात यह है की, वैज्ञानिक अभी भी हाइपर वेलोसिटी सितारों को लेकर शोध कर रहें हैं तो आगे इसके बारे में और भी कई  जानकारियां हमें पढ़ने को मिलेगीं।

Path of Hyper Velocity Star.
हाइपर वेलोसिटी स्टार का पथ | Credit: New Atlas.

यह सितारा है अंतरिक्ष का सबसे तेज हाइपर वेलोसिटी स्टार ! :-

मैंने ऊपर आपको हाइपर वेलोसिटी स्टार (hypervelocity star in hindi) को लेकर कई सारे बातें बताई हैं, परंतु अब चलिए अंतरिक्ष की सबसे तेज हाइपर वेलोसिटी स्टार के बारे में जान लेते हैं।  तो, ब्रह्मांड का सबसे तेज हाइपर वेलोसिटी स्टार है यूएस-708 (US-708). यह सितारा “ओ” श्रेणी (O Type Star) के हाइपर वेलोसिटी स्टार है जो हमारी आकाशगंगा के अंदर मौजूद उस्रा मेजर नाम के सितारों की क्लस्टर (सितारों का समुह) में आता हैं।

साल 1982 में खोजे गये इस तारे को अब तक का सबसे तेज सितारे खिताब मिला है।  साल 2005 में इस सितारे के ऊपर काफी गहन चर्चा हुई जिसमें इस सितारे के बारे में भी बहुत सारी मौलिक बाते वैज्ञानिकों को जानने को मिलीं। साल 2015 में किए गए और एक शोध से यह पता चला की इस सितारे का वेग करीब-करीब 1,200 किमी प्रति सेकेंड हैं जो की अंतरिक्ष में मौजूद अन्य सितारों के मुकाबले बहुत ही ज्यादा तेज है।

पहले वैज्ञानिक मानते थे की, इस सितारे का यह वेग मिल्की वे केंद्र में स्थित ब्लैक होल के कारण है,परंतु बाद में पता चला है की 1.4 करोड़ साल पहले ही यह सितारा मिल्की वे की बाहरी डिस्क को पार कर चुका है जो की यह पुष्टि करता है की यह सितारा वास्तविक तौर पर आकाशगंगा के केंद्र से नहीं आया हैं। कुछ वैज्ञानिक कहते हैं की यह सितारा एक समय में एक बाईनारी स्टार सिस्टम का हिस्सा था, जिसके कारण ही इसको इतनी तेज गति मिली है।

क्या ये तारा पृथ्वी से टकरा सकता है?

ज्यादातर ऐसे तारे आकाशगंगा के केंद्र से निकलकर बहुत तेज गति से आकाशगंगा के अंदर या उसके बाहर घूमते हैं, अगर इनकी गति और हमारी आकाशगंगा के केंद्र से दूरी देखी जाये तो इनका पृथ्वी से टकराना बहुत मुश्किल है, पृथ्वी आकाशगंगा के केंद्र से 26 हजार प्रकाश वर्ष दूर है, यानि प्रकाश को भी आकाशगंगा के केंद्र से पृथ्वी तक आने में 26 हजार साल लगते हैं, तो ऐसे में अगर कोई तारा जो 20 लाख किमी प्रति घंटे की गति से सीधा पृथ्वी की ओर आ रहा है तो उसे यहां तक आने में ही कमसेकम 1 करोड़ 30 लाख साल लगेंगे और तबतक पृथ्वी आज की जगह से दूर किसी और जगह होगी और हम इस टक्कर से आसानी से बच जायेंगे।

निष्कर्ष – Conclusion :-

मैं आपको ये भी बता दूँ की, बाइनरी स्टार सिस्टम में स्थित इसका साथी सितारा आपने अंतिम अवस्था यानी व्हाइट ड्वार्फ स्टेज  में पहुँच चुका है, जब कि US-708 अपने रेड-जाईंट(Red-Giant Star) की अवस्था में परिवर्तित हो रहा हैं। वैसे सितारों की इन अवस्थाओं से याद आया की, मैंने इससे पहले ब्रह्मांड में मौजूद अलग-अलग प्रकारों के सितारों तथा उनके अलग-अलग अवस्थाओं के बारे में एक खास लेख लिखा हैं। तो, अगर आप सितारों के जीवन के बारे में जानने को इच्छुक हैं तो उस लेख को अवश्य ही पढ़िएगा।

रसायन विज्ञान के मजेदार
Red Giants Credit: Science ABC

खैर US-708 को लेकर कुछ वैज्ञानिक यह भी कहते हैं की, जल्द ही यह सितारा एक सुपरनोवा में भी परिवर्तित हो सकता हैं।  सुपरनोवा में परिवर्तित होने के बाद यह एक विशाल धमाका करता हुआ छोटे-छोटे अन्य सितारों को भी जन्म दे सकता हैं।  वैसे ये सितारा भी अन्य सितारों के ही तरह मौलिक रूप से हीलियम से बना हुआ हैं और इसके बाहरी आवरण में एक समय हाइड्रोजन गैस भी मौजूद थी। वर्तमान समय में ये तारा एक व्हाइट द्वार्फ सितारे का चक्कर काट रहा हैं जो की सूर्य के वजन के जितना ही है।  यहाँ गौरतलब बात यह है की मात्र 10 मिनट में उस सितारे का एक चक्कर काट लेता है। वाकई में हैं न बहुत ही गज़ब !

Sources :- www.newsweek.com , www.space.com, www.forbes.com.

Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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