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हाल ही में मंगल की सतह पर हुआ हिमस्खलन ! जानिए इसका कारण और प्रभाव – Avalanche On Mars.

मंगल के पर्वतों पर हो रहा हैं हिमस्खलन ! क्या आपने इसके बारे में इन बातों को जाना हैं ?

नमस्कार मित्रों ! कैसे हैं आप सब ? दोस्तों , इस दुनिया में कब क्या कैसे हो जाए इसके बारे में कोई भी पहले से कुछ भी नहीं सकता | सारा का सारा चीज़ अनिश्चितता से भरा हुआ हैं | खैर इस से याद आया की हमारा जीवन भी एक अनिश्चितता से भरी हुई यात्रा ही हैं | तो , अगर आप अपने जिंदगी के बारे में जुड़ी कुछ रोचक बातों को जानना चाहते है तो, मेरै द्वारा लिखा गया पिछले लेख को भी एक बार देखना न भूलें | खैर आज में मंगल में होने वाले हिम स्खलन (avalanche on mars) के विषय में बात करने जा रहा हूँ , क्योंकि मित्रों यह एक ऐसी अनिश्चितता से भरी घटना है , जो की मंगल में बहुत ही कम देखने को मिलता हैं |

हाल ही में मंगल के सतह पर हुआ हिमस्खलन ! जानिए इसका कारण और प्रभाव - Avalanche On Mars.
मंगल की तस्वीर | Credit : Science How Stuff.

आज के इस समय में पृथ्वी बाढ़ , सूखे और अन्य कई सारे प्राकृतिक आपदा से जूझ रही हैं और इन सब का सिर्फ एक ही कारण है ग्लोबल वार्मिंग | परंतु मित्रों क्या आप जानते हैं ! मंगल में भी कई प्रकार के प्राकृतिक आपदा आती हैं | हाल ही में NASA के सेटेलाइट ने मंगल में होने वाले भयानक हिम स्खलन (avalanche on mars) की तस्वीर वैज्ञानिकों को प्रदान किया हैं | मेँ आपको बता दूँ की यह हिम स्खलन (avalanche on mars) इतना ज्यादा शक्तिशाली था की यह अगर पृथ्वी पर होता तो काफी ज्यादा तबाही मचा सकता था|

तो , आखिर यह हिम स्खलन किसे कहते हैं और कैसे मंगल पर यह होता हैं ? ऐसे ही कई सारे सवालों का जवाब आपको दोस्तों यहाँ पढ़ने को मिलेगा | इसलिए मेरे साथ इस लेख में बने रहिए और लेख को अंत तक जरूर पढ़ते रहिए |

हिम स्खलन किसे कहते हैं ? – What Is an Avalanche ? :-

अधिक कुछ जानने से पहले आपको यह जानना होगा की हिम स्खलन (avalanche on mars) आखिर है क्या ? तो , चलिए इसकी जानते है |

मित्रों ! आपने कभी हिमालय जैसी विशाल पर्वतों को देखा हैं | अगर हाँ तो आपको पता होगा की यह सब पर्वत काफी ज्यादा बर्फ से ढंकी हुई होती हैं | इन के ऊँचे-ऊँचे चोटियाँ कई मीटर बर्फ के चादर को औढ कर दुनिया से छुपी हुई होती हैं | दूर से देखने पर यह बर्फ के चादरों से ढके हुए पर्वत की चोटी काफी ज्यादा सुंदर दिखाई पड़ती है , परंतु जितना यह देखने में सुंदर है उतना ही इसके पास रहना खतरनाक हैं | मेरे कहने का मतलब यह है की किसी कारण के वजह से अगर इन बर्फ के चादरों में छोटी सी भी दरार पड़ जाती है तो , कई हजारों टन के यह बर्फ के चादर पर्वत के चोटी से नीचे खिसकने लगती हैं | बर्फ के चादर के इसी खिसकने को ही हिम स्खलन (avalanche on mars) कहते हैं |

बर्फ से ढके हुए ऊँचे-ऊँचे पर्वतों के ऊपर यह घटना बिलकुल ही आम बात हैं और हाँ ! यह घटना पृथ्वी के अलावा भी सौर-मंडल में मौजूद अन्य ग्रहों में भी देखा जा सकता हैं | पृथ्वी के अलावा सबसे ज्यादा मंगल पर ही हिम स्खलन (avalanche on mars) देखा जाता हैं | मंगल पर मौजूद ओलमपस मंस (Olympus Mons) मंगल की सबसे ऊँची पर्वत है , जो की करीब-करीब 24 किलोमीटर ऊँचा हैं | तो , आप अब खुद सोच सकते हैं की यहाँ पर होने वाले हिम स्खलन कितने ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं |

हिमस्खलन होने के कारण – What Causes An Avalanches  ? :-

दोस्तों ! किसी भी घटना घटने के पीछे अवश्य कोई न कोई कारण होता ही है और ठीक उसी तरह हिम स्खलन (avalanche on mars) होने के पीछे भी कई सारे कारण होते हैं | आमतौर पर पृथ्वी पर होने वाले ज़्यादातर हिम स्खलन मनुष्य के कार्यकलापों के द्वारा ही उत्पन्न होता हैं , परंतु मंगल में होने वाले हिम स्खलन कुछ भिन्न कारणों के लिए घटते हैं | अकसर यहाँ पर होने वाले हिम स्खलन मंगल के गुरुत्वाकर्षण बल में होने वाले बदलाव के ही नतीजे हैं | इसके अलावा मेँ आपको बता दूँ की मंगल का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के मुक़ाबले लगभग एक तिहाई ही है , इसलिए इसकी कमजोर गुरुत्वाकर्षण बल हिम स्खलन (avalanche on mars) होने का मुख्य कारण हैं |

हाल ही में मंगल के सतह पर हुआ हिमस्खलन ! जानिए इसका कारण और प्रभाव - Avalanche On Mars.
ओलंपस मंस की फोटो | Credit : Annaes Astronomy.

इसके अलावा तापमान में बहुत तेजी से होने वाला बदलाव भी हिम स्खलन होने का मुख्य कारण होता हैं | अगर बर्फ के चादर का बाहरी हिस्सा अंदर के हिस्से से तापमान में अलग-अलग होता है तो बर्फ के कणों के अंदर मौजूद बॉन्ड काफी ज्यादा कमजोर हो जाता हैं | बाद में यह कमजोर बॉन्ड बर्फ के कणिकाओं को एक साथ बांध कर रखने में सक्षम नहीं रहते हैं | इसी वजह से बर्फ के चादर का ऊपरी हिस्सा इस के निचले हिस्से से अपना संपर्क को देता है और जिस के वजह से यह खिसक कर नीचे गिर जाता हैं | मित्रों ! यहाँ पर बर्फ की चादर की मोटाई भी एक मुख्य कारक हैं हिम स्खलन होने का |

हिमस्खलन होने के अन्य कारण :-

मैंने ऊपर आपको हिम स्खलन होने के कई कारण बताएं परंतु इसके अलावा भी कुछ ऐसे कारण होते है , जो की मंगल में हिम स्खलन (avalanche on mars) करने में काफी ज्यादा गुरुत्व पूर्ण किरदार निभाते हैं |

मित्रों पर्वत में बसा बर्फ के चादर का पर्वत के सतह से कितना कोण बना कर है , वह भी हिम स्खलन होने के मुख्य कारणों में से एक हैं | अगर यह कोण काफी ज्यादा बाढ़ जाता हैं तो , बर्फ के चादर को खिसकने में ज्यादा कोई दिक्कत नहीं होगी और बड़ी आसानी से यह खिसक कर हिम स्खलन के रूप में परिवर्तित हो जाएगा | ज़्यादातर हिम स्खलन 25 से 50 डिग्री के कोण पर होते हैं , क्योंकि यह कोण बर्फ के चादरों को आपस से बड़ी ही आसानी से अलग-अलग कर देता हैं |

इसके अलावा बर्फ के चादर पर पड़ने वाला बाहरी बल भी हिम स्खलन करवाने का मूल कारण हैं | वैसे तो मंगल के पर्वतों पर इंसान द्वारा बनाया गया बल तो हिम स्खलन को नहीं उत्पन्न करता , परंतु हाँ कभी कभार चोटी के ऊपर से गिरते हुए बड़े-बड़े पत्थर हिम स्खलन के प्रमुख वजह बनते हैं | जब भी कोई बड़ा पत्थर गिरता है तो , इसके गिरने के बल से बर्फ के सतह पर काफी ज्यादा ज़ोर पड़ता है और जिससे हिम स्खलन हो जाता हैं |

मित्रों ! आप सभी लोगों से यहाँ पर एक सवाल पूछने का बड़ा ही मन कर रहा हैं ! अगर आप लोगों को कभी मंगल जाने का मौका मिले तो क्या आप लोग जाने के लिए हाँ कहेंगे ? अगर हाँ तो आप मंगल पर क्यूँ जाना चाहते हैं ? आप सभी लोग कॉमेंट कर के इस सवाल का जवाब देंगे तो हमें बहुत ही खुशी होगी |

मंगल के किस जगह पर हुआ यह हिमस्खलन ? :- Where Avalanche on Mars Occurred?

अंतरिक्ष में मंगल पर चाँद के बाद सबसे ज्यादा मिसनों को अंजाम दिया गया हैं | NASA से ले कर ISRO तक सब के ओर्बिटर आज मंगल की परिक्रमा कर रहें हैं | ज़्यादातर मंगल में होने वाले सभी मिसन इस के उत्तरी ध्रुव के पास ही होते हैं | इसलिए वैज्ञानिकों ने उत्तरी ध्रुव के पास हाल ही में हुए इस हिम स्खलन को ढूंढ कर निकाला हैं |

NASA के द्वारा अंतरिक्ष में छोड़ा गया MRO (Mars Reconnaissance Orbiter) ने इस हिम स्खलन (avalanche on mars) की तस्वीर खींची हैं | यह हिम स्खलन इतना ज्यादा विशाल था की इसकी तस्वीर बड़ी आसानी से मंगल के सतह से कई सौ किलोमीटर से भी खींची जा सकी हैं |

Nasa's Mars Rover - Curiosity.
क्यूरोसिटी रोवर की फोटो | Credit : Forbes.

मित्रों ! इस हिम स्खलन होने का मुख्य कारण कई वैज्ञानिकों ने बहुत अलग-अलग दिया हैं | परंतु नासा के कुछ मुख्य वैज्ञानिक कहते है हैं की उत्तरी ध्रुव में होने वाला यह हिम स्खलन सूर्य के वजह से ही हुआ हैं | दरअसल बात यह है की जब भी सूर्य का किरण मंगल के उत्तरी ध्रुव पर पड़ता है , तभी उस हिस्से में जमा बर्फ बड़ी ही तेजी से कमजोर हो कर खिसकने की अवस्था में आ जाता हैं | इसलिए यहाँ पर हिम स्खलन अन्य हिस्सों से ज्यादा होते हैं | इसके अलावा यह हिस्सा बहुत ज्यादा पर्वतों से भरा हुआ हैं , जो की पृथ्वी की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट से भी काफी ज्यादा ऊँची हैं |

हिमस्खलन को ले कर क्या कहते हैं नासा के वैज्ञानिक ? :-

मंगल पर नासा के ओर्बिटर काफी समय से इसका चक्कर लगा रहें हैं | इसलिए नासा के वैज्ञानिक मंगल के सतह से काफी ज्यादा वाकिफ हो चुके हैं | मंगल का उत्तरी ध्रुव साल के कुछ समय के लिए ही सूर्य के किरणों से संपर्क में आता हैं | इसलिए जब इसके ऊपर किसी भी प्रकार का प्रकाश या किरण नहीं पड़ता तो यहाँ पर स्थित पर्वतों के ऊपर 500 मीटर से भी ज्यादा मोटी चादर की बर्फ जम जाती हैं | इतना विशाल और वजनी बर्फ की चादर काफी ज्यादा असंतुलित रहता हैं | इसलिए नासा के वैज्ञानिक इसका मूल कारण सूर्य को ही मानते हैं जो की इस मोटी-मोटी बर्फ के चादरों को आसानी से खिसका देती हैं |

इसके अलावा नासा के टेलिस्कोप ने सितंबर 11 को धूल और गैस से बनी एक बहुत बड़े आँधी का भी फोटो अपने कैमेरे में कैद कर लिया हैं | मेँ आपको बता दूँ की नासा के द्वारा मंगल पर छोड़ा गया इस टेलिस्कोप में काफी शक्तिशाली कैमेरे लगे हैं , जो की बड़ी ही आसानी से छोटी से छोटी चीजों का भी बड़ी ही आसानी से तस्वीर उठा सकती हैं |

मंगल के सतह को ले कर MRO की कुछ उपलब्धियाँ :-

MRO को NASA ने साल 2006 में अंतरिक्ष में छोड़ा था और तभी से ही यह मंगल के सतह का चक्कर काट चुका हैं | 5100 करोड़ के लागत से बना NASA का यह मंगल मिसन इंसानों के लिए काफी ज्यादा लाभकारी रहा हैं | विज्ञान की क्षेत्र में यह काफी सारे खोजें कर चुका हैं | मंगल के सतह पर पानी का संधान करना , मंगल के सतह को नजदीक से परखना , मंगल के भूगोल को और भी ज्यादा विश्लेषण करना , इसके वायुमंडल को जाँचना , भविष्य में होने वाले मंगल मिसनों के लिए सही लेंडिंग स्पॉट आदि ढूँढने के लिए इस को काफी ज्यादा इस्तेमाल क्या जा रहा हैं |

नासा ने 2030 के पहले ही मानव युक्त अंतरिक्ष यान मंगल पर उतारने का निर्णय लिया हैं |

उल्कापिंड के टकराने से भी एक बार हुआ था मंगल पर हिमस्खलन ! :-

अकसर सौर-मंडल में मौजूद ग्रहों के पास से कई छोटे-बड़े उल्का पिंड गुजरते ही रहते हैं | आपने भी कई बार इन सभी चीजों के बारे में न्यूज़ में काफी कुछ सुना ही होगा | कई दफा आकार में छोटे होने के कारण यह उल्का पिंड किसी भी प्रकार का कोई तबाही नहीं मचाते हैं | परंतु कई दफा आकार में यह इतने बड़े होते हैं की , इन के टक्कर से काफी ज्यादा तबाही मच सकता हैं |

खैर मैंने ऊपर आपको मंगल पर हिम स्खलन (avalanche on mars) होने के कई सारे कारण बताएं हैं | परंतु आपको अभी तक मैंने एक ऐसे कारण के बारे में नहीं बताया है जो की मंगल पर साल 2018 में काफी हिम स्खलन लाया था | हालाँकि ! यहाँ उल्का पिंड का आकार उतना ज्यादा बड़ा नहीं था , परंतु उस टकराव का प्रभाव काफी जादा विशाल था |

Effect of Meteoroid.
उल्का पिंड के कारण होने वाला टकराव का प्रभाव | Credit : Phy.org.

साल 2018 के जून के महीने में MRO ने 5 मीटर वाली इस उल्का पिंड की मंगल से टकराने का तस्वीर खींचा था | इस उल्का पिंड का मंगल से टकराने के वजह से 1km से भी ज्यादा लंबी क्रेटर बना था | मेँ आपको यहाँ बता दूँ की मंगल की सतह काफी ज्यादा रेत और धूल के बादलों से ढका हुआ हैं |  यहाँ पर अकसर आँधी और तूफान आते ही रहते हैं और हाँ ! वायुमंडल काफी ज्यादा पतला होने के कारण मंगल पर काफी ज्यादा उल्का पिंड टकराते ही रहते हैं |

मंगल का हिमस्खलन दर्शाता है यह चीज़ :-

चाँद की ही तरह मंगल के सतह पर भी वैज्ञानिकों को काफी ज्यादा अजीब व अनोखी लकीरों व गड्ढों के बारे में पता चला हैं | कई वैज्ञानिक इन लकीरों और गड्ढों का कारण इस के सतह के नीचे शायद बहने बाली पानी के स्रोतों का ही प्रभाव मानते हैं | परंतु कुछ वैज्ञानिकों का यह कहना है की इन लकीरों का नीशान मंगल पर हो रहें हिम स्खलन का ही नतीजा हैं | वैज्ञानिकों के बीच होने वाले इन तर्कों का अभी तक कोई भी पुष्टीकरण नहीं मिला हैं | हालाँकि ! शायद हमें कभी मंगल पर पानी मिल जाएँ |

नासा के क्यूरोसिटी रोवर और इनसाइट लेंडर मंगल के सतह पर अभी भी मौजूद हैं | यह दो प्रोब भविष्य में मंगल से जुड़ी कई सारे खोज करने में सक्षम रहेंगे | मंगल पर इसके अलावा 6 ओर्बिटर भी मौजूद हैं | यह 6 ओर्बिटर मंगल को बहुत ही बारीकी से परख रहें हैं | मेँ आपको बता दूँ की मार्टिन स्पॉट पर भविष्य में नासा ने इंसानों की कॉलोनी स्थापना करने का भी लक्ष्य रखा हैं | खैर यह तो समय ही बताएगा की आगे होने वाले मंगल पर हिम स्खलन या कोई भी खोज इंसानों के लिए कितना गुरुत्व वहन करेगा |

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Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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