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वैज्ञानिकों को मिल्की वे में मिली 3,000 प्रकाश वर्ष लंबी एक अज्ञात स्प्लिंटर आर्म! – Milky Way Has A 3000 Light Year Long Break

हमारी आकाशगंगा में खोजी गई ये नई "सूजन/उभार" इतनी खास क्यों हैं?

दुनिया में आमतौर पर भरी हुई जगह हमें कई बातों को दर्शाती है। क्योंकि भरी हुई जगहों में हमें कई सी चीजों को देखने का मौका मिलता है जो की किसी भी इंसान को इतना तो बता सकते हैं कि, वहाँ पर कुछ तो मौजूद है। इसलिए ज़्यादातर देखा गया है कि, लोगों को भरी हुए जगहों पर खाली जगहों से कम डर लगता है। परंतु क्या आपने कभी सोचा है, खाली जगहे भी हमें काफी कुछ बता सकती हैं! बहरहाल खाली जगह भरी जगहों से भी ज्यादा बताती हैं। वैसे मिल्की वे (3000 light year long break) के अंदर भी एक ऐसी ही खाली जगह मौजूद थी जिसके बारे में इससे पहले किसी को कुछ मालूम नहीं था।

आकाशगंगा में मिला एक बहुत ही बड़ा स्प्लिंटर आर्म - 3000 Light Year Long Break.
मिल्की वे का फोटो | Credit:Scientificaamerican.

इससे पहले हमने ब्रह्मांड तथा इसके मौलिक उपादानों के बारे में बहुत से लेखों में पढ़ा होगा, परंतु इस खाली जगह के बारे में आप सच में पहली कुछ नया पढ़ने जा रहें हैं। सुनकर भी कितना अजीब लगता है कि, हम जिस आकाशगंगा के अंदर खुद रह रहें हैं वहाँ पर एक इतनी विशाल खाली जगह भी मौजूद हो सकती है, जिसे आजतक किसी ने नोटिस नहीं किया था। ब्रह्मांड के चारों तरफ अनुसंधान का बिगुल फूँकते-फूँकते हमने खुद अपने घर में ही नहीं झाँका।

खैर बातें बहुत हुई चलिये अब असल मुद्दे पर आते हैं और इस विशालकाय खाली जगह से जुड़े तथ्यों को उजागर करते हुए उसमें मौजूद चीजों को जानने कि कोशिश करते हैं।

आखिर ये 3,000 प्रकाश वर्ष वाली खाली जगह की बात क्या है? – Milky Way Has A 3000 Light Year Long Break! :-

अगर आपने मिल्की वे (3000 light year long break) की संरचना को गौर से देखा होगा, तो आपको पता होगा कि ये एक स्पाइरल गैलैक्सी” (Spiral Galaxy) है। इसलिए कई बार हमें ये गैलेक्सी अपनी पहली झलक में ही एक टोर्नाडो की तरह दिखाई देती है। मानो जैसे इसके केंद्र से लेकर इसके बाहरी हिस्सों तक कोई चक्रबाती तूफान सा उमड़ उठा हो। यही कारण है कि, हमारी आकाशगंगा से कई सारे छोटे-बड़े आर्म्स” (Arms) बाहर की और निकले होते हैं। वैसे इनको आप आकाशगंगा के हाथ भी कह सकते हैं।

आकाशगंगा में मिला एक बहुत ही बड़ा स्प्लिंटर आर्म - 3000 Light Year Long Break.
आकाशगंगाओं का फोटो | Credit: INF News.

बता दूँ की, बाहर की और निकलने वाली आकाशगंगा के इन हाथों में कई सारे तारा मंडलों, सौर-मंडलों और कई खगोलीय पिंडों के समूह का घर है। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं की, इन जगहों पर भौतिक चीजों का जमावड़ा कितना अधिक है। ब्रह्मांड की ये उन जगहों में से एक हैं जहां पर सबसे अधिक मैटर की उपस्थिती देखने को मिलती है। परंतु क्या आपको पता है, तारों की नदी कही जाने वाली आकाशगंगा के इन हाथों में से एक हाथ के पास बाहर की और निकला हुआ 3,000 प्रकाश वर्ष लंबा एक ऐसा अवयव (अंग) मिला है जो  काफी चौंका देने वाला है।

दूर आसमान से देखने में ये 3,000 प्रकाश वर्ष लंबा स्प्लिंटर आर्म, इंसानी हड्डी में से निकलने वाले किसी अनचाह उभार/ सूजन की तरह ही दिखाई देता है। मानों जैसे किसीने मिल्की वे के इन हाथों को तोड़-मरोड़ दिया है और इसी तोड़-मरोड़ के कारण ही इस स्प्लिंटर आर्म का जन्म हुआ हो। दोस्तों! अगर हम आकाशगंगा की बाकी संरचनाओं के साथ इस स्प्लिंटर आर्म की संरचना की तुलना करें तो, ये बहुत ही ज्यादा बेमेल और अलग लगती है।

नेब्यूला में भी पाया जाता है “स्प्लिंटर आर्म” :-

अगर हम आकाशगंगाओं की बातों को कुछ समय के लिए साइड में रखें, तो आपको पता चलेगा कि, इस तरह के स्प्लिंटर आर्म नेब्यूला के अंदर भी पाये जाते हैं। उदाहरण के लिए आप “Eagle Nebula” को ही देख सकते हैं। इस नेब्यूला के अंदर आपको कई स्प्लिंटर आर्म देखने को मिल जाएंगे। वैसे बता दूँ कि, ये नेब्यूला कई भव्य स्तंभ आकृति वाले खगोलीय चीजों का घर हैं। इसलिए इसकी पहली झलक ही कई सारे लोगों के मन को भा जाती है। हम हमारे ब्रह्मांड को 60 सालों से काफी अच्छी तरह से जानने लगें है या जानने का प्रयास कर रहें हैं।

Photo of Eagle Nebula.
इगल नेब्यूला का फोटो | Credit: NASA.

परंतु कभी भी हमें इससे पहले इन स्प्लिंटर आर्म (3000 light year long break) के बारे में कुछ नहीं पता था। वैज्ञानिकों के अनुसार ये आर्म्स आकाशगंगाओं की बारीक और असाधारण बनावट के द्वारा ही अस्तित्व में आते हैं। इससे पहले हम इन जगहों को बड़े-बड़े खाली स्पेस का ही दर्जा देते थे। मित्रों! विडंबना कि बात ये हैं कि, आज भी हम इन भव्य संरचनाओं के बारे में सीमित जानते हैं। क्योंकि, मिल्की वे में मौजूद कॉस्मिक डस्ट क्लाउड हमें आज भी आकाशगंगा के कई जगहों को देखने से रोकते हैं।

हमारी आकाशगंगा में कई स्पाइरल आर्म्स मौजूद होंगे, परंतु हमें उनकी सटीक लोकेशन के बारे में कुछ नहीं पता है। आकाशगंगा के अंदर मौजूद ज़्यादातर खगोलीय चीज़ें हमें सटीक रूप से उनके लोकेशन को मापने नहीं देते या यू कहें कि, हमारी आकाशगंगा के प्रतिकूल/सुदूर जगहों पर ही सबसे अधिक खगोलीय चीज़ें मौजूद हैं। इन चीजों की सटीक लोकेशन के बारे में पता लगा पाना और वो भी पृथ्वी से, लगभग नामुमकिन ही है।

क्या अन्य आकाशगंगाओं में भी “स्प्लिंटर आर्म्स” पाये जाते हैं? :-

अब एक सवाल यहाँ और खड़ा होता है कि, क्या अन्य आकाशगंगाओं में भी स्प्लिंटर आर्म्स (3000 light year long break) पाये जाते हैं? तो मित्रों आप लोगों को बता दूँ कि, स्प्लिंटर आर्म जैसे ही संरचना अन्य आकाशगंगाओं में भी पाई जाती है। परंतु, सटीक तौर पर ये कहा नहीं जा सकता हैं कि, वो सबके-सब स्प्लिंटर आर्म्स ही हैं। वैसे इन संरचनाओं को; “Spurs, Feathers और Branches” का नाम दिया गया है। हालांकि! हमारी आकाशगंगा में ये सभी संरचनाएं मौजूद हैं या नहीं इसके बारे में कोई भी खास जानकारी अभी हमारे पास नहीं हैं।

आकाशगंगा में मिला एक बहुत ही बड़ा स्प्लिंटर आर्म - 3000 Light Year Long Break.
स्पीट्जर टेलिस्कोप का फोटो | Credit: Phys Org.

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि, मिल्की वे में खोजा गया ये स्प्लिंटर आर्म एक “Spur” हो सकता हैं। परंतु, इसके ऊपर भी अभी पुष्टीकरण आना बाकी है। हालांकि! जो खास बात है वो ये है कि, ये आर्म (भूजा) सूर्य और हमारे आकाशगंगा के केंद्र के मध्य से हो कर गुजरता है। तो, आप सोच सकते हैं कि, हम इस अज्ञात संरचना से कितने करीब हैं। इससे पहले हमने इसी जगह को कई बार विश्लेषित किया है परंतु हर बार ये संरचना हमारे आँखों से ओझल हो जाती थी।

वैसे स्पाइरल आर्म्स के खास गुणों में एक गुण ये भी है कि, ये किसी भी आकाशगंगा के चारों तरफ काफी मजबूत से बंध कर एक साथ रहते हैं। वैसे ये आकाशगंगा से लगभग 0 डिग्री से 12 डिग्री कोण बना कर मौजूद रहते हैं। मित्रों! वर्तमान जिस स्पर (स्प्लिंटर आर्म) को खोजा गया है, वो आकाशगंगा से लगभग 60 डिग्री का कोण बना कर मौजूद हैं जो कि एक और रोचक बात है।

निष्कर्ष – Conclusion :-

मित्रों! इस स्प्लिंटर आर्म (3000 light year long break) की खोज “Spitzer Space Telescope” ने की है। बता दूँ कि, इसी इलाके में ही इस दूरबीन ने लगभग 100,000 तक नए सितारों को खोज लिया है। इसके अलावा इसी दूरबीन ने कॉस्मिक डस्ट क्लाउड के पार मौजूद कई खगोलीय चीजों को अपने इंफ्रारैड़ उपकरणों के जरिये ढूंढा था, जो कि अंतरिक्ष विज्ञान में काफी बड़ी खोज मानी जाती हैं। हालांकि! बाद में अगले पीढ़ी के दूरबीनों (Gaia) के जरिये पहले से खोजे गए इन सितारों कि सटीक लोकेशन के बारे में पता लगाया गया था।

Photo of Gaia Telescope.
गइया टेलिस्कोप का फोटो |

Gaia और Spitzer दोनों ही दूरबीनों से ली गई जानकारियों को एक साथ मिलाकर हम स्प्लिंटर आर्म जैसे छुपी हुई संरचनाओं को भी ढूंढ सकते हैं। वैसे इन दोनों ही दूरबीनों को हम अंतरिक्ष के 3D मैपिंग काम में इस्तेमाल करते हैं। दोस्तों, वैसे अभी भी हमें मिले इस नए संरचना के वास्तविक आकार के बारे में जानने के लिए इस इलाके में मौजूद नेब्यूला और नए सितारों के बारे में भी जानना पड़ेगा।

Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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