Universe

क्या होगा अगर हमारे सौर मंडल में दो पृथ्वी आ जायें?

Earth and Earth 2.0 (Kepler 452b) In Our Solar System

हमारी आकाशगंगा में 500 अरब ग्रह हैं, जिनमें से अगर 0.1 प्रतिशत ग्रह भी अगर पृथ्वी की तरह अपने सूर्य के Habitable Zone में आते हैं (तारे से एक खास दूरी) तो कुल मिलाकर करीब  50 करोड़ ग्रह तो ऐसे होंगे जिनमें जीवन हो सकता है  या फिर जीवन के पनपने की अटूट संभावनायें हैं, इसी प्रयास में NASA  ने  23 July 2015 को,  अपने kepler space telescope के जरिए , पृथ्वी से लगभग 1400 light years दूर स्थित, एक exoplanet (KEPLER 452b EXOPLANET In Hindi)  खोजे जाने की घोषणा की | इस planet का नाम था Kepler-452b, जो काफी हद तक पृथ्वी जैसा ही था |

केपलर स्पेस टेलिस्कोप  की आसाधारण खोज ( Kepler space telescope) 

यानी कि इसकी habitable conditions, atmosphere, rotational charcateristics , etc. , सब हमारी पृथ्वी जैसे ही थे | हमारे solar system में मौजूद सूर्य की तरह ही, ये kepler 452b , भी kepler 452 नाम के अपने तारे के habitable zone में ही मौजूद था | 

Kepler Space Telescope and Kepler 452b

वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना था , कि ये ग्रह ( EXOPLANET In Hindi) हमारी पृथ्वी की तरह ही एक rocky planet है , जहां हो सकता है कि शायद  जीवन पनपने की कुछ हद तक संभावना जरूर होगी |  और यही वजह है, कि इस planet को आमतौर पर Earth 2.0 भी कहा जाता है |

बहराल , अभी इसको लेकर कोई पूख्ता जानकारी नहीं दी गई है और हमसे इतनी दूर होने के कारण, इसको explore कर पाना बेहद मुश्किल है | 

Counter Earth Theory

4th century BC के आस पास के टाइम पर , greek philosophers द्वारा counter earth theory दी गई , जहां ये  बात mention की गई कि हमारे earth orbit में ही , हमसे एकदम opposite , यानी सूर्य के एकदम पीछे , एक और ग्रह करता है , जो हूबहू हमारी पृथ्वी जैसा ही है , पर उसकी चाल और सूर्य की वजह से वो हमें नहीं दिखता |

खैर इस theory ने ,आने वाले कई astronomers को हैरान तो किया , पर आज के दौर में , ये theory fail ही है क्योंकि , अगर ऐसा होता भी , तो satellites और इसके प्रभावों के जारी हमें इसका पता अब तक लग चुका होता |

पर थोड़ा रुकिए , अगर ये theory really true यानी वास्तव में सोच होती , यानी कि अगर सच में हमारे solar system में या खुद हमारी earth orbit में ही ,एक और earth exist करती , तो क्या होता ? 

आखिर एक और पृथ्वी की वजह से, हमारी इस पृथ्वी पर क्या असर पड़ता ? और क्या ये आने वाले समय में कोई महाविनाश भी ला सकती है ? चलिए पता लगाते हैं !

दो ग्रहों की हो सकती है टक्कर

सबसे पहले बात करते हैं SAME ORBITS की , यानी जब दोनों EARTH , एक ही ORBIT में TRAVEL कर रहीं हों ! ऐसी SITUATION में वो COMMON ORBIT , बिल्कुल ही UNSTABLE हो जाएगा | दोनों SAME SIZE PLANETS के बीच में GRAVITATIONAL INRTERACTION की वजह से , दो समस्याएं हो सकती हैं | 

पहला तो ये , कि इसकी वजह से एक TIME पर दोनों PLANETS में  COLLISION , यानी टकराव की वजह से कोई एक PLANET या तो सूर्य की तरफ जा सकता है , या अपने ORBIT को छोड़कर , SOLAR SYSTEM से भी बाहर जा सकता है | यानी इस CASE में , हमारे पास ULTIMATELY एक ही पृथ्वी बचेगी | 

पर ऐसा जरूरी नहीं कि कोई एक PLANET बाख ही जाए ! क्योंकि , ऐसा भी POSSIBLE है कि MUTUAL GRAVITATIONAL INRTERACTION की वजह से दोनों ही PLANETS , आपस में MERGE यानी विलीन हो जाएं , जिसका परिणाम ये होगा कि दोनों ही ग्रह, भीषण टकराव की वजह से नष्ट हो जाएं !

Exoplanets Collisions

हालंकि ऐसा बिलकुल संभव है, कि कोई दो PLANETS एक SAME ORBIT में TRAVEL करें , पर एक समय पर विनाश होना लगभग तय है |

ASTRONOMERS की मानें , तो SOLAR SYSTEM में कुछ ऐसे ARRANGEMENTS POSSIBLE हैं , जहां दो PLANETS कुछ समय के लिए एक दूसरे के ORBIT में TRAVEL कर सकते हैं , यानी कि आप में ORBITS बदल सकते हैं , उदाहरण के तौर पर HORSHOE ORBIT | SATURN यानी शनि ग्रह के दोनों चंद्रमा , Epimetheus and Janus , इसी HORSHOE ORBIT को FOLLOW करते हैं | 

पर ध्यान देने वाली बात ये है कि , PLANETS के साथ ऐसा होना लगभग असंभव ही है क्योंकि SOLAR SYSTEM में मौजूद अन्य ग्रह , GRAVITATIONAL PULL की वजह से , इस ARRANGEMENT को आसानी से UNSTABLE कर सकते हैं | 

यानी कुल मिलाकर देखें , तो विनाश होना संभव है !

अब अगर कोई दूसरी पृथ्वी (Kepler 452b exoplanet) हमारे SOLAR SYSTEM में EXIST कर सकती है , तो उसकी सही POSITION होगी हमारी इस पृथ्वी और मंगल ग्रह के बीच मौजूद HABITABLE ZONE में | अगर हम बात करें कि हमारी इस पृथ्वी की तरह ही, नई पृथ्वी में जीवन होगा , तो यही जगह उस पृथ्वी के लिए सही रहेगी |

पर , अब आगे क्या होगा ? अगर नए ग्रह में भी हम इंसानों की तरह ही वहाँ लोग मौजूद होंगे , तो हमारे बीच किस तरह का INTERACTION यानी पारस्परिक व्यवहार होगा ? किस तरह से हम उस ग्रह के जीवों से सम्बन्ध बना पाएंगे ? 

हमारे लिए ये तक बताना असंभव होगा , कि वहाँ जीव हमारी तरह होंगे , या हमसे भी ज्यादा ADVANCE ? क्योंकि जरूरी नहीं कि नयी पृथ्वी पर आपको इंसान ही मिलें !

अगर कुछ हद SIMILARITIES मिलें , तो आपस में COMMUNICATE कर पाना POSSIBLE होगा , और हो सकता है कि SPACE TRAVEL के THROUGH आना जाना भी लगा रहे | 

भविष्य की संभावनाएं

ख़तरा हमारे लिए तब होगा , जब दूसरी पृथ्वी की LIFEFORMS , किसी अलग तरह से ही EVOLVE यानी विकसित होने लगें ! 

हमने अभी तक किसी भी तरह के परग्रहियों से सम्बन्ध नहीं बनाया है , और न ही हमें उनके बारे में ज्यादा जानकारी है | ऐसे  में ये कहना बिलकुल गलत होगा , कि दूसरी पृथ्वी में मौजूद जीवन हमारे लिए अच्छी खबर होगी | 

POSSIBILITY तो ये भी है , कि दूसरी पृथ्वी पर , कोई अन्य परग्रही ही अपना ठिकाना बनालें | SURFACE CONDITIONS सही होने और HABITABLE होने की वजह से ऐसा भी संभव है कि , RESOURCES को लेकर आपस में किसी प्रकार का युद्ध हो जाए ! 

क्योंकि आने वाले समय में तो हम सभी जानते हैं कि RESOURCES के लिए , हमारी नजरें , इस पृथ्वी से बाहर जरूर रहने वाली हैं | 

सो दोस्तों ! आपका क्या कहना है इस बात को लेकर ? कमेंट करके जरूर बताएँ | 

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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