नॉवेल कोरोना की वजह से इंसानों की जो हालत हुई है, उसके बारे में बखान करने के लिए मेरे पास शब्द भी कम पड़ रहे हैं। हर तरफ आज कोरोना के मरीज बढ़ते ही जा रहें है और अभी तक ठोस तौर-तरीके से COVID-19 वैक्सीन भी नहीं बन सकी है। इसी वजह से हम सब आज लॉक डाउन के चलते घर में हैं और घर से ही हम अपने जीवन की ज़्यादातर काम कर रहें हैं। वैसे कुछ समय के लिए अगर हम कोरोना को दरकिनार भी कर देते है तो एक समस्या तब भी हमारे लिए खतरनाक है। ये समस्या है लोगों के शरीर में वसा यानी फैट्स (Fat definition in hindi) का बढ़ना।
जी हाँ! मित्रों फैट्स (fats definition in hindi) की समस्या इस लॉक डाउन में काफी ज्यादा बढ़ गया है। लोगों ने जैसे ही बाहर जा कर शारीरिक गतिविधि करना बंद कर दिया है, ठीक उस समय से ही लोगों में कोलेस्ट्रॉल की असुविधा दिखाई पड़ रही है। इसी वजह से इस लॉक डाउन के दौरान आप लोगों के लिए ये बहुत ही जरूरी हो जाता है की, आप कम से कम संक्षिप्त रूप से ही सही परंतु वसा यानी इन फैट्स के बारे में जानें।
तो, आज का हमारा लेख इन्हीं फेट्स के बारे में होगा जिसमें आप लोगों को इनके प्रकार तथा इससे जुड़ी बहुत ही विशेष बातों के बारे में पता चलेगा।
वसा की परिभाषा – Fat Definition In Hindi :-
मित्रों! चलिये सबसे पहले हम फैट्स (fat definition in hindi) किसे कहते है, उसके बारे में जान लेते है।
दोस्तों, हमारे शरीर में कई सारे पोषक तत्व मौजूद है जो की हमारे शरीर को सही तरीके से कार्य करने के लिए जरूरी है। उन पोषक तत्वों में से वसा यानी फैट्स भी एक पोषक तत्व है। तो, कुल मिलाकर कर कहा जा सकता है की; “वसा शरीर में मौजूद एक बहुल पोषक तत्व (macro nutrient) है जो की शरीर के उपपचाय प्रतिक्रियाओं के लिए जरूरी है”। इसके साथ ही साथ श्वेत सार (Carbohydrates) और प्रोटीन (पुष्टि सार) भी दो अन्य बहुल पोषक तत्व है। मित्रों! वैसे आपके जानकारी के लिए बता दूँ की, इससे पहले मैंने प्रोटीन के ऊपर भी स्वतंत्र लेख लिखा हुआ है। जो की आप हमारे इसी वेबसाइट से यहाँ पढ़ सकते है।
वैसे फैट्स के बारे में मेँ कहूँ तो, ये पोषक तत्व हमारे शरीर में उपपचाय के अलावा भी अन्य बहुत सारे काम करता है। खैर इसके बारे में हम लोग आगे विस्तार से चर्चा करेंगे। मित्रों! फेट्स को आप बहू कोशिय जीवों के अतिरिक्त एक-कोशिय जीवों के अंदर भी देख सकते है। इसलिए प्रकृति में इसकी महत्व बहुत ही ज्यादा है। एक-कोशिय जीवों के अंदर फैट्स मुख्य रूप से ऊर्जा के संरक्षण के काम में आता है।
किसी भी जीवित चीज़ को जीने के लिए खाने के रूप में ऊर्जा की जरूरत पड़ती है, जो की एक-कोशिय जीवों के ऊपर भी लागू होता है। हालांकि और भी बता दूँ की, हमें जीवित रहने के लिए बहुल पोषक तत्वों के साथ-साथ कई सूक्ष्म पोषक (micro nutrients) तत्वों की भी जरूरत पड़ती है जिसके बारे में हम अन्य लेखों में बात करेंगे।
वसा के प्रकार – Types Of Fats In Hindi :-
चलिये हम लोग अब वसा के प्रकारों (types of fats in hindi) के ऊपर भी एक नजर डाल लेते हैं।
वसा को मुख्य तौर से दो भागों में बांटा गया है। पहला है संतृप्त वसा (Saturated Fats) और दूसरा है असंतृप्त वसा (Unsaturated Fats)। इसके बाद अगर और जानना चाहें तो ध्यान रखेंगे की, Unsaturated Fats को और तीन भागों में यानी Monounsaturated Fats, polyunsaturated fats और Trans Fats में बांटा गया है।
(i) संतृप्त वसा (Saturated Fats) :-
संतृप्त वसा (fats definition in hindi) को “Animal Fats” भी कहते है, क्योंकि वसा का ये प्रकार जीवों के अंदर ही पाया जाता है। वैसे संतृप्त वसा में 3 मौलिक फेटी एसिड (Fatty Acid) के कण होते है। मित्रों! ध्यान रखेंगे की फेटी एसिड जो है, ये वसा का सबसे छोटी इकाई है, जिससे वसा का निर्माण होता है।
वैसे थोड़ी गहराई से बात करूँ तो, संतृप्त वसा में जो फेटी एसिड होते है वो sp3 Hybridization में होते है। वैसे ये संरचना कार्बन के कण बनाते है, क्योंकि फेटी एसिड में कार्बन के कण भी मौजूद रहते है। इसके साथ ही साथ प्रत्येक कार्बन के साथ दो-दो हाइड्रोजन के कण भी आपस में बॉन्ड बना कर रहते है।
मित्रों! वसा का ये प्रकार हमारे शरीर में आसानी से पचता नहीं है, जिससे ये शरीर के अंदर ही इक्कठा हो कर रह जाता है। आम तौर पर इस तरह का वसा हमारे त्वचा के नीचे ही मौजूद रहता है। कुछ क्षेत्रों में इस वसा के मात्रा में अधिकता के चलते नसों में खून की आवाजाही में काफी तकलीफ़ होता है। जिससे हृदघात (Heart Attack) भी आ सकता है।
इसके अलावा मोटापा या कोलेस्ट्रॉल भी वसा के इस प्रकार को कहते है। घी, दूध, चिकन और मटन में मौजूद फैट्स इसी श्रेणी में आते है। घर में इस्तेमाल होने वाला डालडा भी इसी में आता है, इसलिए हमें अपने खान पान में विशेष रूप से इस लॉक डाउन के समय इनसे दूरी बना कर रखना चाहिए।
(ii) असंतृप्त वसा (Unsaturated Fats) :-
चलिये अब वसा (fat definition in hindi) के दूसरे प्रकार यानी असंतृप्त के वसा के ऊपर भी एक नजर डाल ही लेते है। मित्रों! असंतृप्त वसा को “Vegetable Fats” भी कहते है। वसा का ये प्रकार पेड़-पौधों में पाया जाता है। दोस्तों ठीक संतृप्त वसा के चलते इस असंतृप्त वसा में भी तीन फेटी एसिड के कण होते है। वैसे ध्यान रखेंगे की असंतृप्त वसा में, फेटी एसिड sp2 Hybridization में रहते है। इसलिए इनमें ज़्यादातर डबल बॉन्ड पाया जाता है, जो की संतृप्त वसा में पाये जाने वाले सिंगल बॉन्ड से कमजोर होता है।
इसलिए हमारा शरीर इस वसा को बहुत ही आसानी से पचा सकता है। खैर असंतृप्त वसा में Monounsaturated Fats भी होते हैं, जिसके अंदर आप लोगों को एक डबल बॉन्ड देखने तो मिलता है। वैसे Polyunsaturated Fats के अंदर हमें एक से अधिक डबल बॉन्ड देखने को मिलता है।
मित्रों! फैट्स का ये प्रकार हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है। इसलिए हमें हमारे आहार में इन फैट्स को ज्यादा मात्रा में खाना चाहिए। वैसे यहाँ पर ज्यादा माने प्रति दिन एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को 80 ग्राम फैट्स खाना चाहिए, अगर ये असंतृप्त फैट्स हुआ तो बहुत अच्छी बात है। हम जब असंतृप्त वसा का सेवन करते है तब हमारे शरीर में से संतृप्त वसा भी इसके साथ-साथ पच जाता है। इन फैट्स को आप ऑलिव ऑइल, सोरोसों का तेल तथा अन्य पेड़-पौधों से मिलने वाली तेल से मिल सकता है।
वसा का शरीर में क्या काम है? – Function Of Fats In Hindi :-
चलिये लेख के इस भाग में हम फैट्स (function of fats in hindi) के काम के बारे में जान लेते है।
- हमारे शरीर में वसा (fats definition in hindi) ऊर्जा का एक विकल्प स्रोत है। यूं तो प्राथमिक तौर पर श्वेत सार से हमें ऊर्जा मिलता है, परंतु जब शरीर में श्वेत सार नहीं होता है तब हमें फैट्स से ही ऊर्जा मिलता है।
- विटामिन A, D, E और K ये सब वसा घुलनशील विटामिन हैं, जिसको शरीर के अंदर घुलने के लिए फैट्स चाहिए ही चाहिए। इसलिए विटामिन को सोखने में भी फैट्स हमारी मदद करता है।
- शरीर में ताप नियंत्रण के लिए वसा का होना बहुत ही जरूरी है। त्वचा के नीचे वसा के मौजूदगी के कारण ही शरीर में ताप का संतुलन बना रहता है, क्योंकि ताप को ये शरीर के बाहर जाने नहीं देता है। इसके साथ ही साथ शरीर में मौजूद अंदरूनी अंगों को भी फैट्स बाहरी बालों से होने वाले धक्कों से बचाता (Shock Absorb) है।
Sources :- www.sfgate.com, www.biologydictionary.net.