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अंतरिक्ष में मिला बर्फ का तोप! – Enceladus Snow Canon In Space.

सौर-मंडल की सबसे चमकीली और विचित्र चीज़ , एनसेलाडश | इसके बार में जान कर हो जाएंगे हैरान |

बर्फ में खेलना किसको पसंद नहीं! मुझे तो बहुत ही ज्यादा पसंद है और मेरे अंदाजे से आप लोगों को भी काफी ज्यादा पसंद होगा | मित्रों ! आज हमारा विषय इसी बर्फ से ही  जुड़ा हुआ हैं | बचपन से ले कर आज तक बर्फ को हमने पृथ्वी की शोभा बढ़ाते हुए देखा हैं | परंतु दूर अंतरिक्ष में एक ऐसी भी जगह है , जहां पर आपको हमेशा बर्फ की तोपें (enceladus snow canon in space) चलते हुए नजर आएंगे |

जी हाँ ! आप लोगों ने सही सुना एक बर्फ से बनी तोप के बारे में | यहाँ पर आपको बर्फ के गोले अंतरिक्ष में दागते हुए नजर आएंगे |

Snow Canon.
बर्फ की तोप | Credit : Wikimedia.

मित्रों ! हमारे सौर-मंडल में कुल मिलाकर 8 ग्रह अभी मौजूद हैं | हर एक ग्रह का अपना ही एक महत्व हैं | परंतु इन सभी ग्रहों के अंदर एक ग्रह ऐसा भी है जिसके एक चाँद (उप-ग्रह) में बर्फ की तोपें (enceladus hindi) देखने को मिलती हैं |

मेँ आपको यहाँ और भी बता दूँ की वैसे तो इस ग्रह के अब तक 62 चाँद (उप-ग्रह) खोजे जा चुके हैं , परंतु उन 62 चाँद के अंदर एक चाँद (उप-ग्रह) ऐसा भी है जो की बहुत खास हैं |

तो , आगे आपको इस लेख के अंदर उसी चाँद के बारे में बहुत कुछ विचित्र बातें पता लगने वाला हैं | इसलिए अब बिना किसी देरी किए शुरू करते हैं |

आखिर यह एनसेलाडश क्या हैं ? – What Is Enceladus ? :-

जवाब मालूम नहीं होगा , जो की जायज भी हैं | तो , चलिए सबसे पहले इस सवाल का ही जवाब ढूंढ लेते हैं | दोस्तों ! आपको मैंने शीर्षक में ही एनसेलाडश का (enceladus snow canon in space) जिक्र करते हुए देखा हैं | तो , अब यह सवाल आपके मन में जरूर उठा होगा की , आखिर यह एनसेलाडश (enceladus snow canon in space) क्या हैं ? मेरे अंदाजे से कई सारे लोगों को इस सवाल का

मित्रों ! एनसेलाडश शनि ग्रह का छठा सबसे बड़ा चाँद हैं | इसका व्यास 500 km तक है और यह शनि के सबसे बड़े चाँद टाइटनसे आकार में 10 गुना छोटा हैं | आपको जान कर हैरानी होगा की एनसेलाडश का 90% हिस्सा बर्फ से ढका हुआ है और इसी कारण से यह सौर-मंडल का सबसे चमकीला खगोलीय पिंड भी हैं | एनसेलाडश के सतह का तापमान करीब-करीब -198 डिग्री सेल्सियस है और यहाँ हर वक़्त हिमपात होता है रहता हैं | कई परतों से बनी बर्फ के चादरें इस को हमेशा ही सौर-मंडल की सबसे ठंडी जगहों में भी शामिल करवाता हैं | यहाँ पर पृथ्वी की ही तरह आपको टेक्टोनिक प्लेट देखने को मिलते हैं |

इस को साल 1789 में सबसे पहले खोजा गया था परंतु इसके बारे में उस समय ज्यादा खोजा नहीं किया गया था | अमरीकी अंतरिक्ष संस्थान (NASA) के द्वारा 1980 के दशक में छोड़ा गया वोएजर-1 और वोएजर-2 एनसेलाडश (enceladus snow canon in space) के बारे में वैज्ञानिकों को बहुत सारे रोचक तथ्य प्रदान किया | इसी कारण से उस समय से ले कर आज तक वैज्ञानिक इस पर काफी गहन शोध कर रहें हैं |

Photo of Solar System.
सौर-मंडल की तस्वीर | Credit : Encyclopedia Britannica.

कुछ वैज्ञानिकों का यह भी मानना है की एनसेलाडश में पर ग्रही सभ्यता के भी कई सारे सबूत मिलते हैं |

एनसेलाडश में मौजूद है बर्फ की तोपें -Enceladus Snow Canon In Space :-

वैज्ञानिकों ने हाल ही में एनसेलाडश (enceladus snow canon in space) को लेकर एक बहुत ही गज़ब की खोज किया हैं | उन्होने पता लगाया है की एनसेलाडश एक बर्फ की तोप की तरह अंतरिक्ष में बर्फ के गोले दाग रहा हैं | यह बर्फ गोले शनि के कक्षा से ले कर इसके अन्य चाँद तक भी पहुँच जाते हैं | इसी कारण से एनसेलाडश के आस-पास के इलाकों में हमेशा से ही बर्फ की एक मोटी चादर बिछी हुई नजर आती हैं | यह चादर देखने में काफी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक हैं |

मित्रों ! वैज्ञानिकों ने इस तरीके के अजीब सी घटना के बारे में काफी ज्यादा शोध कर के मूल रूप से एक बात को इसका कारण बताया हैं | उनका कहना है की , एनसेलाडश की सतह के नीचे छुपी हुई पानी का उष्ण स्रोत इसका कारण हैं | मित्रों ! अगर आपने कभी गौर से देखा होगा तो , आपको पता होगा की पृथ्वी की सतह के नीचे का तापमान पृथ्वी के सतह से ज्यादा होता हैं | इसी कारण से कई बार आपको मेग्मा या ज्वालामुखी फटते हुए भी नजर आता हैं |

एनसेलाडश की सतह के नीचे बहने वाला उष्ण पानी का स्रोत काफी सतह के नीचे काफी ज्यादा दबाव पैदा करता हैं | इसी दबाव के चलते यह कई बार सतह को चीरते हुए कई सौ मिल ऊपर उठकर अंतरिक्ष में समा जाता हैं | इस प्रक्रिया में काफी ज्यादा शक्ति होती है और यह एनसेलाडश (enceladus snow canon in space) के सतह पर अकसर होता ही रहता हैं |

बर्फ के तोपों का प्रभाव :-

अब चलिए एक नजर इन बर्फीली तोपों का भी जान लेते हैं | आमतौर पर एनसेलाडश के सतह से निकलता हुआ पानी का दबाव इसके सतह पर जमी हुई बर्फ को भी साथ ले कर बहुत ऊपर अंतरिक्ष में उठ जाता हैं | बाद में यह बर्फ एनसेलाडश , मीमास और टेथिस (शनि के अन्य चाँद) के ऊपर भारी मात्रा में किसी बम की तरह गिर कर काफी तबाही मचाते हैं | मेँ आपको यहाँ और भी बता दूँ की एनसेलाडश , मीमास और टेथिस में आपको किसी भी प्रकार से वायुमंडल दिखाई नहीं देता हैं | इसलिए बर्फ के गोले यहाँ काफी विनाशक प्रभाव डालते हैं |

मित्रों ! बाद में यह बर्फ के गोले एक साथ जम कर इन के सतह के ऊपर एक बर्फीली चादर बना लेते हैं और ऐसा ही चक्र बाद में चलता ही रहता हैं | इसके अलावा यह इन सभी को बहुत ही ज्यादा चमकीली भी बना देता हैं | खैर चमकीली सतह से याद आया की मैंने इससे पहले फर्मी बबल के बारे में एक बहुत ही दिलचस्प लेख लिखा हैं | दोस्तों ! संक्षिप्त में कहूँ तो जैसे एनसेलाडश सौर-मंडल की सबसे चमकीली खगोलीय पिंड है , ठीक इसी तरह फरमी बबल भी ब्रह्मांड का सबसे चमकीली खगोलीय चीज़ हैं | इसलिए आप इस लेख को अवश्य ही एक बार जरूर देखें |

नासा के द्वारा पता चला है की एनसेलाडश (enceladus snow canon in hindi) में पहले पानी का भंडार मौजूद था | यह भंडार अब बर्फ में परिवर्तित हो गयी है जो की आज इसके सतह पर दिखाई पड़ती हैं | वाकई में हमारे सौर-मंडल में ही कितने अजूबे छुपे हुए हैं |

यह भी कहते है कुछ वैज्ञानिक :-

ऊपर आपने बर्फ के तोपों का प्रभाव जान लिया , परंतु अभी तक मैंने आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात नहीं बताई हैं | दुनिया भर के वैज्ञानिक एनसेलाडश (enceladus snow canon in space) के विषय में एक बात को ले कर काफी ज्यादा उधेडबुन हैं और वह बात इसके चमकीली सतह को ले कर हैं | जी हाँ ! अभी तक वैज्ञानिक इस बात पर संतुष्ट नहीं है की सिर्फ बर्फीली सतह इसका एक मात्र कारण हैं |

मित्रों ! कुछ वैज्ञानिक कहते हैं की एनसेलाडश की सतह के नीचे एक बहुत ही विचित्र पदार्थ मौजूद हैं | इसे वैज्ञानिक बुमेरांग पदार्थ के नाम से पुकारते हैं | यह अंतरिक्ष में मौजूद इकलौता ऐसा पदार्थ है जो की भारी मात्रा में रैडिओ और प्रकाश के तरंगों को प्रतिफलित करता हैं |

नासा ने इस बात पर गहन शोध किया और पाया की एनसेलाडश की बर्फीली सतह के नीचे रेट्रो-रिफ़्लेक्टर जैसे कई सारे पदार्थ मौजूद हैं | यह पदार्थ बर्फीली सतह से करीब-करीब 10c.m नीचे मौजूद रहता हैं | इसलिए यह एनसेलाडश के आसपास गुजरते हुए किसी भी स्पेस क्राफ्ट को आसानी से सिग्नल भेजने में सक्षम हो पाता हैं |

आपको और भी बता दूँ की आज ताक कोई भी वैज्ञानिक ने बुमेरांग कहे जाने वाले इस पदार्थ को सटीक तरीके से पहचाना नहीं हैं | इसलिए इसके बारे में आपको अधिक कुछ जानने को भी नहीं मिलेगा | परंतु हमें आशा है की आने वाले समय में हम इसके बारे में और भी कई सारे बात जान पाएंगे |

Sources :- www.space.com 

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Bineet Patel

I am a learner and passionate writer who loves to spread the interesting concepts of science through my writing.

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