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Venus Facts and Details Hindi, शुक्र ग्रह के बारे में दिलचस्प जानकारी

Planet Venus Hindi Facts and Details – शुक्र (Venus)  ग्रह हमारे सौर-मंडल का एक ग्रह है जो सूर्य से निकटतम दूरी के क्रम में दूसरे स्थान पर है, पहले पर बुध ग्रह है। शुक्र लगभग आकार में हमारे ग्रह पृथ्वी जैसा ही है।

रात में आकाश में आप देखें जो चंद्रमा के बाद जो सबसे ज्यादा चमकने वाला कोई आकाशिये पिंड है तो वह शुक्र ग्रह ही है। शुक्र और हमारी धरती का द्रव्यमान भी एकदम समान ही है और इसी कारण शुक्र को कई बार पृथ्वी की बहन भी कहा जाता है।

सबसे गर्म ग्रह – The Hottest Planet Of Solar System

Venus हमारे Solar-System का सबसे गर्म ग्रह है, वैसे तो सूर्य से दूरी के हिसाब से तो  बुध ग्रह को सबसे गर्म होना चाहिए पर शुक्र ग्रह का Atmosphere ही ऐसा है जो वहां की सतह को नर्क बना देता है। यह इतना गर्म ग्रह है कि इस पर हम किसी भी मानव मिशन को नहीं भेज सकते हैं, अभी हमारे पास ऐसी कोई खास तकनीक भी नहीं है जिससे हम इस ग्रह की सतह पर कोई प्रोब (Probe)  भी उतार सके…प्यार की देवी के नाम से नामकरण हासिल करने वाले इस ग्रह के बारे में आप और अधिक इस लेख में जानेंगे.

अाइये जानते हैं शुक्र ग्रह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी –

कक्षा (Orbit) :0.72 AU या 108,200,000 किमी ( सूर्य से)
व्यास (Diameter) : 12,103.6 किमी
द्रव्यमान (Mass)  : 4.869e24 किग्रा , 486732 अरब अरब किलोग्राम
उपग्रह (Satellites)  : कोई नहीं
सतह का तापमान (Surface Temperature)  : 462 °C

शुक्र ग्रह(Planet Venus)  सुंदरता और प्यार की देवी के नाम से जाना जाता है। (इसे यूनानी मे Aphrodite तथा बेबीलोन निवासी मे Ishtar कहते थे।) इसे यह नाम इस कारण दिया गया क्योंकि यह सबसे ज्यादा चमकिला ग्रह है। चांद के बाद कोई सबसे चमकीला है तो वो यही ग्रह है।

शुक्र का घुर्णन (Rotation) विचित्र है, यह काफी धीमा है। इसका एक दिन 243 पृथ्वी के दिन के बराबर है जो कि शुक्र के एक वर्ष से कुछ ज्यादा है। शुक्र का घुर्णन और उसकी कक्षा कुछ इस तरह है कि शुक्र की केवल एक ही सतह पृथ्वी से दिखायी देती है।

शुक्र को पृथ्वी का जुंड़वा ग्रह कहा जाता है क्योंकि

  1. शुक्र पृथ्वी से थोड़ा ही छोटा है। यह ग्रह व्यास मे पृथ्वी के व्यास का 95% तथा द्रव्यमान(Mass)  मे पृथ्वी का 80% है।
  2. दोनो की सतह मे क्रेटर कम है और सतह अपेक्षाकृत नयी है।
  3. घनत्व(Density)  तथा रासायनिक संरचना समान है।

Venus  के पास अपना खुद का कोई चन्द्रमा (Moon)  नहीं है! जिस तरह हमारे ग्रह पृथ्वी का एक चंद्रमा है तो मंगल (Mars) के दो हैं और बृहस्पति और शनि के कई चंद्रमा हैं। चंद्रमा रहित ग्रह पर जीवन होना भी काफी कठिन होता है।

शुक्र ग्रह पर दबाव पृथ्वी के वायुमंडल दबाव का 90 गुना है जोकि पृथ्वी पर सागर सतह से 1 किमी गहराई के तुल्य है। वातावरण मुख्यतः कार्बन डाय आक्साईड से बना है। यहां Sulphuric Acid के बादलो की  कई किलोमीटर मोटी कई परते है। यह बादल शुक्र ग्रह की सतह ढक लेते है जिससे हम उसे देख नही पाते है।

सूर्य और चंद्रमा के बाद, वीनस हमारे रात आसमान में सबसे प्रतिभाशाली वस्तु है! Venus हमारे सौर मंडल में दक्षिणावर्त घूर्णन करता है इसकी बहुत धीमी जाती के रोटेशन के कारण, विशेषज्ञों का मानना है कि अतीत में यह ग्रह किसी से  टकराया होगा जिससे इसकी रोटेशन गति बदल गई है!

शुक्र ग्रह, हमारे सौर मंडल के सबसे भयानक माहौल वाले ग्रहों में से एक है। ये पूरी तरह से गंधक (Sulphuric Acid) के एसिड के बादलों से ढका है। यहां के सतह का तापमान ही 462 डिग्री तक पहुँच जाता है जो इतना ज्यादा है कि  सीसा, ज़िंक और टिन जैसी धातुएं भी यहां पिघली हुई पाई जाती हैं। ये हमारे सौर-मंडल का सबसे गर्म ग्रह है।

रूस ही वो पहला देश था जिसने सत्तर और अस्सी के दशक में शुक्र ग्रह पर वेनेरा और वेगा जैसे बेहद कामयाब अभियान भेजे थे।ये शुक्र का चक्कर लगाने के लिए भेजे गए थे। लेकिन शुक्र के भयानक गर्म वातावरण में यह यान मात्र 3 घंटे में ही जलकर राख हो गये थे।

2006 में युरोपियन स्पेस एजेंसी द्वारा भेजे गए Venus Express space shuttle ने शुक्र पर 1000 से ज्यादा ज्वालामुखीयों की खोज की। आंकड़ों के मुताबिक शुक्र पर अभी भी ज्वालामुखी सक्रिय हैं पर कुछ ही क्षेत्रों में, ज्यादातर हिस्सा लाखों सालों से शांत है।

Source – Universetoday

शुक्र पर वैसे जीवन की संभावना काफी कम है पर यदि इसे खोजा जाये तो हमें सौर-मंडल और शुक्र ग्रह के कई राज जानने को मिल सकेंगे जो आगे हमारे लिए काफी मददगार होंगे, पर शुक्र का भयानक वातावरण ही वैज्ञानिकों को राकते रहता है।

Venusपर मिशन भेजने की दिक्कतें

Venus ग्रह (Planet)  हमारे का दूसरा ग्रह है जो सूर्य के नजदीक आता है, अगर हम भविष्य में इस ग्रह पर कोई मिशन भेजते हैं तो हमें कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे यह ग्रह सूर्य के नजदीक है तो सूर्य से निकलने वाली सौर हवा और उसके तूफान जिनमें लाखों – अरबों कण होते हैं वह हमारे यान को तुरंत खराब कर सकते हैं। ऐसे में यात्रा के बीच में ही प्रोब के खराब होने का खतरा बुहत ज्यादा बढ़ जायेगा। सूर्य हर 11 साल में ऐसा भयानक तूफान धरती की ओर भेजता है तो हमें मिशन को इन्हीं सालों के बीच कैसे भी करके भेजना पड़ेगा।

– बहुत घातक होते हैं सौर तूफान, पर क्या ये धरती को तबाह कर सकते हैं?

दूसरा शुक्र ग्रह का वायुमंडल ही इतना भयानक है कि इतनी भीषण गर्मी में शायद ही कोई प्रोब ज्यादा देर तक टिक सके, मिशन के लिए हमें ऐसे प्रोब चाहिए जो कमसे कम कुछ दिनों तक शुक्र की सतह का अध्ययन कर सकें। हालांकि नासा ने फिलहाल पार्कर प्रोब सूर्य की तरफ भेजा है जिससे हमें आस है कि आगे आने वाले दिनों में हम शुक्र पर भी नासा का कोई मिशन देख सकते हैं।

– सूर्य की तरफ जायेगा इंसानों का बनाया ये पहला प्रोब वो भी 11 लाख नामों के साथ

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Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान, सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।

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