Physics

अंतरिक्ष के सबसे मजेदार सिद्धांतों में से एक हे ये सिद्धांत – Quantum Entanglement In Hindi

आइंस्टीन के इस सिद्धांत के जरिये हम 100 GB के डाटा को भी 1 GB के मेमोरी कार्ड में स्टोर कर सकते हैं, जानिए आखिर कैसे?

अंतरिक्ष जो है मित्रों वह सिर्फ एक ही सिद्धांत पर पूरी तरीके से काम नहीं करता है, इसको समझने के लिए हमें कई सारे सिद्धांतों को एक साथ जोड़ कर देखना पड़ता है। Quantum Entanglement (quantum entanglement in hindi)  जैसे कई सारे सिद्धांत ऐसे भी है जिसके बारे में लोग बहुत ही कम जानते हैं, परंतु इसके बारे में जानना बहुत ही जरूरी है। सापेक्षता की सिद्धांत के बारे में तो हर किसी को पता है, परंतु क्या आप आइंस्टीन के द्वारा खोजे गए इस अंजान सिद्धांत के बारे में जानते हैं? शायद आपका जवाब नहीं होगा और ज़्यादातर लोगों का यही जवाब ही होने वाला है।

वैसे आज के इस लेख में हम लोग Quantum Entanglement (quantum entanglement in hindi)  के बारे में जानेंगे। यह क्या है और कैसे काम करता है ये सब हम अपने हिसाब से परखेंगे। इसके साथ ही साथ इसकी सत्यता और महत्व के बारे में भी एक बारीक दृष्टि डालेंगे। तो, क्या आप तैयार हैं इस बहुत ही खास और अलग लेख के लिए। मुझे लगता है की, आप लोग अवश्य ही तैयार होंगे और इसके बारे में जानने के लिए आतुर होंगे। तो, चलिये अब लेख में आगे बढ़ते हुये इससे जुड़ी हर एक तथ्य के ऊपर प्रकाश डालते हैं।

Quantum Entanglement क्या हैं? – What Is Quantum Entanglement In Hindi? :-

Quantum Entanglement (quantum entanglement in hindi) के सिद्धांत का आधार सबसे पहले न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज के दौरान ही रख दिया था। बाद में इसके ऊपर आइंस्टीन जी ने और भी ज्यादा प्रकाश डाला, जिसके कारण हम लोग आज इसके बारे में काफी सारे विषयों को जानने में सक्षम हो पाये हैं।

तो अगर में इसके संज्ञा (Definition)  के बारे में बात करूँ तो, क्वांटम (Quantum) के स्तर पर मौजूद किसी दो या दो से अधिक और एक दूसरे पर निर्भर कणों का बनना, उनका किसी भी प्रक्रिया के लिए एक साथ सहभागिता करने के प्रक्रिया को ही Quantum Entanglement कहते हैं। वैसे बता दूँ की, यह कण स्थानिक (Spatial) गुणों पर भी निर्भर करते हैं और साथ ही साथ एक दूसरे के मध्य मौजूद दूरता के ऊपर निर्भर नहीं रहते हैं। इस के जरिये आप अंतरिक्ष में मौजूद किसी भी कण के क्वांटम के स्तर पर उसकी सटीक जगह, संवेग, स्पिन और पोलराइजेशन के बारे में भी पता लगा सकते हैं।

वैज्ञानिकों के लिए इन सिद्धांतों पर काम करना कुछ-कुछ समय काफी जटिल इसलिए भी हो जाता है क्योंकि इस सिद्धांत के मूल आधारों को ढूँढना बहुत ज्यादा ही मुश्किल होता है। वैसे इसके संबंध में एक बहुत ही हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि, इसको मानने वाला हर एक कण एक दूसरे से काफी ज्यादा मेल खाते हैं (कई बार) इसलिए इन दोनों की कणों को आपस में उलझे हुए यानी “Entangled” भी कहते हैं। हालांकि! क्वांटम के स्तर पर बातें इतनी ज्यादा सरल नहीं होती हैं। क्वांटम मेकानिक्स के जटिलता की वजह से कई बार इस तरह के सिद्धांत वाकई में काफी ज्यादा उलझे हुए नजर आते हैं।

आपका इसको लेकर क्या कहना हैं? जरूर ही कमेंट कर के बताइएगा।

क्या वाकई में Quantum Entanglement का होना संभव हैं! :-

अब तक हमने पढ़ा हैं की, किसी भी चीज़, पदार्थ या वस्तु को सिर्फ भौतिक रूप से देख कर/पकड़ कर उसके आकार या आयतन को मापा जा सकता हैं या उसके बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। परंतु क्या यह बात हकीकत में सही हैं? शायद नहीं! तो क्यों, चलिये इस के बारे में भी जान लेते हैं।

Quantum Entanglement (quantum entanglement in hindi) के बारे में वैज्ञानिकों के मध्य पहले से ही कई सारे विवाद रहे हैं और उसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं आइंस्टीन और निल्स बोर के बीच होने वाला विवाद। नील्स बोर और हाइजेनबर्ग जैसे दो विख्यात वैज्ञानिकों का मानना था कि Quantum Entanglement जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं हैं, क्योंकि हम क्वांटम के इतने सूक्ष्म स्तर पर किसी भी कण की सटीक जगह और स्विंग (Swing) जैसे भौतिक गुणों को बिना देखे माप नहीं सकते हैं।

वैसे इन दोनों की बात सही भी थी, क्योंकि बिना देखे ही हम किसी कण का आयतन तथा उसके आकार के बारे में कुछ कैसे बता सकते हैं। परंतु इसके विरोध में आइंस्टीन खड़े हो गए। उनका कहना था की, अगर किसी चीज़ को देखा नहीं जा सकता तो इसका यह मतलब नहीं हैं की वह वास्तविक तौर पर हे ही नहीं। अगर इसी तरह ही हम सोचेंगे तो, दुनिया में मौजूद बाकी न दिखने वाली चीजों के अस्तित्व को भी हम सीधे तरीके से नकार रहें हैं।

वैसे आइंस्टीन की यह बात बिलकुल तार्किक भी थी। बाद में उन्होंने Boris Podolsky और Nathan Rosen के साथ मिल कर अपने Quantum Entanglement से जुड़ी इस सिद्धांत को सिद्ध भी किया।

Quantum Entanglement - Future of quantum computer.
Quantum Entanglement की जरूरत क्यों ! | Credit: Tech Explorist.
आखिर क्या हैं “Spooky Action At A Distance” और Quantum Entanglement का संबंध ! :-

अकसर जब भी आप Quantum Entanglement (quantum entanglement in hindi) की बात करेंगे तो उस वक़्त “Spooky Action” जैसा एक शब्द आपको कई बार सुनने को मिलेगा। तो, आखिर यह “Spooky Action” क्या है, और इसका Quantum Entanglement के साथ क्या संबंध हैं चलिये इसके बारे में भी जान लेते हैं।

जैसा की मैंने लेख में पहले ही बताया हे की, आइंस्टीन, पोदोल्स्की और रोसेन तीन जनों ने मिल कर Quantum Entanglement के सिद्धांतों को बनाया था। परंतु इसके बारे में निल्स बोर का कुछ अलग ही कहना था। हालांकि आइंस्टीन, पोदोल्स्की और रोसेन ने Quantum Entanglement के सिद्धांत को प्रयोग के जरिये सिद्ध भी कर दिया था, पर बोर मानते थे की पूर्णतः समान भौतिक गुणों के दो अलग-अलग कण इस अंतरिक्ष में मौजूद ही नहीं हो सकते थे, भले ही वह (वह दो कण) प्रयोग के दौरान क्षण भर में अपने गुणों को एक दूसरे के साथ बदलने में सक्षम ही क्यों न हो।

इसको लेकर आइंस्टीन काफी ज्यादा प्रभावित हो गए, बोर की इस बात से वह खासा मायूस भी हुए। बाद में बोर के वक्तव्य का जवाब देते हुए, उन्होंने उनकी इन बातों को “Spooky Action” का नाम दे दिया। वैसे बता दूँ की इस सिद्धांत के तहत दो कणों के बीच बिना किसी सटीक माध्यम के संपर्क बैठना वाकई में थोड़ा “Spooky” तो अवश्य ही हैं। वैसे देखा जाए तो आइंस्टीन जी अपनी जगह सही थे, परंतु निल्स बोर की बातों को भी हम नजरंदाज नहीं कर सकते हैं।

Quantum Entanglement आखिर क्यों जरूरी हैं! :-

Quantum Entanglement की सबसे ज्यादा जरूरत हमें भविष्य में पड़ने वाली है। वैज्ञानिक इस सिद्धांत के आधार पर Quantum Computer को बनाने की सोच रहें हैं। Quantum Entanglement के जरिये क्वांटम कम्प्युटर के एन-कोडिंग करने की मौलिक इकाई क्यूबिट्स (Qubits) को बड़े ही आसान तरीके से प्रोसेस किया जा सकता है।

क्वांटम Entanglement (quantum entanglement in hindi) की और एक विशेषता के बारे में बात करूँ तो, यह हमें आने वाले समय में बड़े-बड़े डाटा को बहुत ही कम जगह (Space) पर स्टोर करने का मौका देगी। इसके जरिये हम एक बहुत ही छोटी सी जगह में ही दुनिया भर के डाटा को स्टोर करने में सक्षम बन पायेंगे। इसके तहत हम 100 GB की एक फ़ाइल को भी 1 GB मेमोरी कार्ड के अंदर कोंप्रेस कर के स्टोर करने में सक्षम हो पाएंगे, हालांकि ऐसा करना अभी तक संभव नहीं हुआ हैं परंतु Quantum Entanglement के जरिए ऐसा भी हो सकता है।

क्वांटम कम्प्युटर को अगर Quantum Entanglement के आधार पर बनाया जाता है, तो हमें एक बहुत ही बेहतरीन भविष्य वादी उपकरण देखने को मिलेगा जो इंसानी सभ्यता को और भी ज्यादा सक्षम तथा उन्नत बनाएगा। वैसे आपको और भी बता दूँ की, Quantum Entanglement के चलते अणुओं और परमाणुओं के संरचना में काफी ज्यादा सघनता (Density) आ जाती है, जो कि साधारण अवस्था में कभी नहीं होता है। इससे किसी भी वस्तु के मौलिक आकार में ज्यादा परिवर्तन न आते हुए कम जगह पर उसके अस्तित्व की पुष्टि होती है।

मित्रों! भले ही यह सिद्धांत आज अपने पूरे वजूद में नहीं आया है, परंतु यकीन मानिए इस विषय पर आने वाले समय में होने वाली खोज हम सब के लिए काफी फायदेमंद होने वाली है।.

Sources :- www.phys.org, www.sciencealert.com, www.harvard.edu.

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Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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