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वैज्ञानिक कैसे Stars (तारों) को खोजते हैं और उनके बारे में बताते हैं, जानें इसका विज्ञान

Stars – Telescope एक ऐसा डिवाइस है जिसका इस्तेमाल दूर की चीज़ों को देखने के लिए किया जाता है, यह केवल लाइट जैसे कि विजिवल लाइट, इंफ्रारेड, रेडियो और एक्सरे इन्हीं तरह की लाइट की किरणों पर काम करता है।

टेलिस्कोप (Telescope) कैसे काम करता है 

उदाहरण के लिए अगर आप एक साधारण टेलिस्कोप से चांद को विजिवल लाइट में देखना चाहतें है तभी देख सकता है जब चांद से लाइट टकराकर इस पर पड़ रही हो, विजिवल लाइट में देखने का मतलब है जैसा हम इंसान देखते हैं वैसा ही अगर इंप्रारेड और एक्स रे का प्रयोग किया जाये तो आप चांद की बनाबट उसके तापमान और उसकी केमिकल कंपोजिशन को जान सकते हो।

इसी तरह दूसरे तरह के टिलेस्कोप जैसे कि रेडियो टेलिस्कोप दूर से ब्रह्मांड से आ रही रेडियो तरंगो को पकड़कर उस चीज़ के बारे में और उसकी दूरी को बता सकते हैं। वास्तव में टेलिस्कोप ने हम इंसानो को वो आँखे दे दी हैं जिनसे हम करोड़ो लाइट ईयर दूर की आकाशगंगा और तारों को भी आसानी से देख सकते हैं।

तारों और ग्रहों को कैसे खोजते हैं

अब बात करते हैं आखिर वैज्ञानिक टेलिस्कोप की मदद से तारों और ग्रहों को कैसे खोजते हैं,और उनके तापमान और केमिकल कंपोजिशन जैसे की उनकी एटम और ऐलिमेंट्स के बारे में कैसे बताते हैं।।

अगर आप शहर से दूर किसी गांव में रात में आसमान  को देखें तो आपको लाखों तारे एक साथ दिखाई देंगें, जिनमेंसे कुछ आपको बहुत चमकीले तो कुछ एकमद धीमी चमक के भी दिखेंगे। आसमान में अगर आप अपने अंगुठे जितनी जगह को भी देखेंगे तो उसमें भी आपको हजारों गैलेक्सी और स्टार मिलेंगे पर आप उन्हें आँखो से देख नहीं सकते हैं, इसके लिए वैज्ञानिकों को टेलिस्कोप की मदद लेनी पड़ती है।

ऐस्ट्रोनोमी – Astronomy

जितने भी साइंस की ब्रांचइस हैं उनमें ऐस्ट्रोनोमी ही एकमात्र ऐसी ब्रांच है जिसमें सारा अध्ययन सिर्फ औवशर्वेशन पर टिका हुआ है। हम अपनी वेस्ट तकनीक से सूरज पर प्रोब भेज सकते हैं और तो और सौर मंडल से बाहर भी जा सकते हैं पर इस अनंत कल्पना से परे ब्रह्मांड के सामने यह सब कुछ नहीं है। तो ऐसे में हम कैसे दूसरी गैलेक्सीस के बारे में जान सकते हैं और कैसे हम यह पता कर सकते हैं कि ये कितनी पुरानी हैं और इनमें कमसेकम कितने तारे या स्टार्स हो सकते हैं और कितनी गैलेक्सी इस युनिवर्ष में हो सकती हैं।

तो इसके लिए हम आसामान में सबसे पहले दिखने वाली चीज़ स्टार्स की मदद ले सकते हैं, हम उनकी प्रोप्रटीज जैसे की वह कैसे बनें है, वे कितने गर्म हैं और कितने भारी हैं और वे कितने पुरानें है और साथ में वे पृथवी से कितने दूर हैं यह सब जानकार हम Galaxies का पता कर सकते हैं। आप शायद यकीन ना करें पर स्टार्स की ये सभी प्रोपर्टीज हम केवल उसमें से निकलने वाली लाइट से ही पता कर सकते हैं।

इंद्रधनुष (Rainbow)

इसके लिए स्टार से आने वाली लाइट का इंद्रधनुष (Rainbow) बनाना होगा जैसा हम सूर्य की लाइट का पृथ्वी पर देखते हैं, पर सूर्य पृथ्वी के पास है तो उसकी लाइट का रेनवो हमें पृथ्वी मैं मौजूद वाटर ड्रोपलेट्स यानि पानी की बुंदो से लाइट के स्कैटर होने से मिल जाता है, जिसमें हम सूर्य की एक सफेद लाइट में सात अलग अलग रंगो की लाइट भी देख पाते हैं जो स्पैक्ट्रम में अलग अलग वैवलेंथ की होती हैं।

ये तो थी सूर्य का बात पर वैज्ञानिक तो इसके जरिए हजारों प्रकाश वर्ष दूर चीज़ का पता लगाते हैं तो वह कैसे उस तारे की लाइट का रेनवौ देख पाते हैं, तो इसके लिए वैज्ञानिक पानी की बुंदो की जगह किसी खास तरह का इंस्ट्रुमैंट इस्तेमाल करते हैं जिससे उस तारे की लाइट स्कैटर हो जाती है जिससे वैज्ञानिकों को उस लाइट में छिपी दूसरे रंगो की लाइट का पता चल पाता है। अगर आप सूर्य के रैनवो को देखेंगे तो उसमें आपको इन सात अलग अलग रंगो की लाइटों की बीच में काली लाइंन्स भी दिखाई देंगी, दरअसल यही काले लाइंस के पैटर्न उस तारे के एटोमिक स्ट्रकचर यानि की उस तारे में कौन से ऐलीमेंट है वह बताते हैं।

इंद्रधनुष और काली लाइंस – Dark Lines In Rainbow

हर एटम एक अलग खास वैवलेंथ की लाइट को ऐवसोर्व यानि की सोख लेता है और जितनी ज्यादा ये लाइट को सोखता है उससे ही वैज्ञानिक उस ऐटम के बारे में जान पाते हैं। तो रैनवो में सात अलग अलग वैवलेंथ में जितने ज्यादा काली लाइंस होगीं तो उसी हिसाब से वैज्ञानिक तारे में मौजूद एटम और उनकी मात्रा का भी पता लगा पाते हैं।

The Rainbow Of Sun, Source – phys.org

The Radio and Infrared Telescopes – रेडियो और इंफ्रारेड दुरबीन 

पर सिर्फ रैनवो और लाइट की स्कैटरिंग ही एकमात्र तकनीक नहीं है बल्कि रेडियो तरंगो से भी वैज्ञानिक बहुत कुछ जान सकते हैं, रेडियो टेलिस्कोप इन तरंगौ को पकड़कर हमें युनिवर्ष का वह इतिहास बता सकते हैं जो हमने आज तक नहीं जाना है, इसी तरह दुसरी सभी लाइट्स जैसे इफ्रारेड और ऐक्स रे इन सब से भी टेलिस्कोप तारों का पता लगाते हैं और उनका अध्यन करते हैं। इंफ्रारेड से हम गैसे के बड़े बादलों यानि  की नेवुला में छिपे तारे का भी अध्ययन कर सकते हैं और उल्ट्रावायेलेट किरणों से हम किसी भी गर्म औवजेक्ट और तारे के बारे में जान सकते हैं। यानि की अगर हम अलग –अलग वैवलेंथ में टेलिस्कोर से तारों को देखें तो हम उनके बारे में अपनी लैव में बैठ कर ही बहुत कुछ जान सकते हैं।

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Team Vigyanam

Vigyanam Team - विज्ञानम् टीम

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