Health

एक अध्ययन के मुताबिक, आपके रसोई का तौलिया भोजन को जहरीला बना रहा है

Kitchen Towels In Hindi –  University of Mauritius में हुए एक नये अध्ययन के मुताबिक रसोईघरों में मिलने वाले तौलियों को लेकर एक बुरी खबर सामने आई है। बार-बार रसोई का तौलिया इस्तेमाल करने के कारण उस पर कई तरह के सूक्ष्म जीव पनपने लगते हैं जिनमें से  Escherichia coli नाम का बैक्टीरिया प्रमुख है जिसके कारण भोजन विषाक्त बन जाता है।

ई-कोलाई (Escherichia coli)  की मौजूदगी

शोधकर्ताओं ने रसोईघर में एक महीने तक इस्तेमाल किए गए लगभग 100 तौलियों का परीक्षण करने पर पाया कि ये भोजन को विषाक्त बना सकते हैं। उन्होंने कहा, इन तौलियों में ई-कोलाई जैसे हानिकारक बैक्टीरिया की मौजूदगी की संभावना ज्यादा रहती है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन रसोईघरों में मांसाहार पकाए जाते हैं, उनमें रखे तौलियों में ई-कोलाई की मौजूदगी की संभावना ज्यादा होती है।

ई-कोलाई आमतौर पर मनुष्यों और पशुओं की आंत में पाया जाता है। अधिकतर ये हानिरहित होते हैं, पर इनमें से कुछ घातक खाद्य विषाक्तता और संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

बैक्टीरिया के संक्रमण का डर

शोधकर्ताओं ने कहा, रसोईघर के तौलियों का, बरतन पोछने से लेकर हाथ पोछने तक कई कामों में इस्तेमाल होता है। इससे उनके कई तरह के बैक्टीरिया या रोगाणु से दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है।

कई तरह के रोगाणुओं से दूषित तौलिया उनके प्रसार का जरिया बन सकता है। उससे हानिकारण रोगाणु भोजन तक फैल सकते हैं जिससे वह विषाक्त हो सकता है।

वैसे तो ई कोलाई  भोजन की विषाक्तता के लक्षणों को पैदा करने के लिए सबसे कुख्यात है, लेकिन यह ध्यान देने योग्य बात है कि की उसके और मित्र जो इस बैक्टीरिया की तरह ही हैं वे हमारे लिए हानिरहित हैं। 

आधे में बैक्टीरिया की बढ़त

शोधकर्ताओें ने रसोईघर के तौलियों में पाए गए बैक्टीरिया को एक कृत्रिम माध्यम में पैदा किया और उनका जीवाणु भार (बैक्टीरियल लोड) निर्धारित किया। किसी बैक्टीरिया का जीवाणु भार किसी चीज या जीव में पाई जाने वाली उनकी उस तादाद को कहते हैं जिसकी गिनती की जा सकती है।

एकत्र किए गए तौलियों में से 49 फीसदी में शोधकर्ताओं ने बैक्टीरिया की बढ़त पाई। बैक्टीरिया की तादाद परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार में बच्चों की मौजूदगी और परिवार के आकार के हिसाब से बढ़ी। तौलियों के जिन नमूनों में बैक्टीरिया पाए गए थे, उनमें से 36.7 फीसदी में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया विकसित हुए। कोलिफॉर्म वह बैक्टीरिया-समूह है जिसमें ई-कोलाई बैक्टीरिया शामिल है। बाकी 36.7 फीसदी में एंटरोकोकस एसपीपी और 14.3 फीसदी में स्टेफिलोकोकस ऑरियस बैक्टीरिया विकसित हुए।

शोधकर्ताओं ने अपने शोध के आधार पर कहा कि ई-कोलाई और स्टेफिलोकोकस बैक्टीरिया  उन तौलियों में अधिक पाए गए, जो उन रसोईघरों से आए थे जिनमें मांस  ज्यादा पकाया जाता था। इस शोध-अध्ययन के नतीजे अटलांटा स्थित अमेरिकन सोसायटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी  की सालाना बैठक में प्रस्तुत किए जाने हैं।

यह भी जानें – दांतो में होते हैं लगभग 300 प्रकार के बैक्टीरिया , जानें दातों से जुड़े मजेदार तथ्य

Tags

Team Vigyanam

Vigyanam Team - विज्ञानम् टीम

Related Articles

Close