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क्या हम अंतरिक्ष में बम के जरिये उल्कापिंडों को उड़ा कर पृथ्वी को बचा सकते हैं? – Rocket Powered Asteroid Bombs

उल्कापिंड और परग्रहियों के हमलों से हमें बचाएगा ये डिफेंस सिस्टम, आप जानकर रह जाएंगे दंग!

इस आधुनिक युग में कहा जाता है कि, इंसानों को इंसानों से ही सबसे ज्यादा खतरा है। सुनने में ये बात बहुत ही अजीब लगती है, परंतु आज के वैज्ञानिक युग में कुछ भी हो सकता है। खास कर तब जब इंसानों के अंदर हिंसा और द्वेष कि भावना अपनी चरम सीमा पर हो। हमने इतिहास में दो-दो विश्व युद्ध देख लिए हैं और हर एक देश अपनी सुरक्षा के लिए काफी ज्यादा तत्पर ह। परंतु, अगर यहाँ पर हम पृथ्वी (rocket powered asteroid bombs) की सुरक्षा की बात करें तो, हमारे पास शायद ही इसके लिए कोई उत्तर होगा।

जी हाँ! मैंने यहाँ पर पृथ्वी कि सुरक्षा के विषय में कहा है, क्योंकि, अभी हर एक देश के पास अपनी-अपनी सेना और सुरक्षा उपकरण भारी मात्रा में मौजूद हैं। परंतु, अगर पृथ्वी के ऊपर कोई आपदा आन पड़ी तो शायद ही हम इंसान इससे जूझने में सक्षम होंगे। वैसे प्रकृति को छोड़ कर अंतरिक्ष से भी हमारे पृथ्वी को काफी ज्यादा खतरा रहता है और ये खतरा तब और भी बढ़ जाता है जब इसके बारे में कोई बात ही नहीं होती है। हमारे अंतरिक्ष में बहुत से उल्कापिंड (rocket powered asteroid bombs) मौजूद हैं, जो कि पृथ्वी की सुरक्षा के लिए एक काफी बड़ी चुनौती हैं।

तो, चलिये एक आलेख पृथ्वी कि सुरक्षा के विषय में भी लिख लिया जाए।

अंतरिक्ष में बम के धमाकों से हम रचेंगे इतिहास! – Rocket Powered Asteroid Bombs! :-

डायनासोर की विलुप्ति का राज आज भी एक विवादों से घिरा हुआ विषय रहा है। इसे लेकर कई वैज्ञानिकों के बीच अलग-अलग राय हैं। वैसे कुछ वैज्ञानिकों को आज पृथ्वी की सुरक्षा को लेकर एक बहुत ही बड़ी मुसीबत के बारे में पता चला है, जो कि इतिहास में भी शायद डायनासोर की पूरी सभ्यता के लिए घातक साबित हुआ था। वैज्ञानिकों को उल्कापिंडों (rocket powered asteroid bombs) को लेकर काफी ज्यादा डर है और उन्हें लगता है कि इन्हीं उल्कापिंडों के जरिये पृथ्वी का सर्वनाश हो सकता है।

अंतरिक्ष में मौजूद सुरक्षा घेरा - Rocket Powered Asteroid Bombs.
पृथ्वी के सतह से टकराता हुआ उल्कापिंड | Credit: Forbes.

वैसे इस खतरे से बचने के लिए वैज्ञानिकों ने एक बहुत ही खास समाधान निकाला है। वैज्ञानिकों के हिसाब से उन्होंने एक नए डिफेंस सिस्टम को बनाया है जो कि सिर्फ और सिर्फ पृथ्वी कि ही सुरक्षा के लिए जिम्मेदार रहेगा। उन्होंने इस नए डिफेंस सिस्टम का नाम “PI” माने “Pulverize It” का नाम दिया है। मित्रों! पल्वीराइज़ का मतलब होता है पीस कर चुना कर देना या पूरी तरीके से समूल विनाश” कर देना। ऐसे में आप सोच सकते हैं कि, ये तकनीक आखिर कितना प्रचंड होगी, जो कि कई बड़े-बड़े उल्कापिंडों को भी पल भर में नष्ट कर देगी।

इस डिफेंस सिस्टम की खास बात ये है कि, वैज्ञानिक सिर्फ उन्हीं गिने-चुने उल्कापिंडों को इस डिफेंस सिस्टम के जरिये नष्ट करेंगे जो कि पृथ्वी और उस पर बस रहे जीवन के लिए काफी ज्यादा खतरनाक होगा। मित्रों! इस सिस्टम में वैज्ञानिक संदिग्ध उल्कापिंड की ओर बहुत से पेनीट्राटर रोड्स” (Penetrator Rods) को लाँच करेंगे। बता दूँ कि, पेनीट्राटर रोड्स छोटे-छोटे व काफी घातक बम होते हैं जो कि उल्कापिंडों को काफी महीन टुकड़ों में तोड़ देगें।

उल्कापिंडों को नष्ट करने वाले बम आखिर होते कैसे हैं? :-

अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि, जिन बमों को हम उल्कापिंडों (rocket powered asteroid bombs) के विरूद्ध प्रयोग करेंगे वो आखिर कैसे होते होंगे? मित्रों! यही कारण है कि, मैंने लेख में इस भाग को रखा है। यहाँ पर आप उल्कापिंडों को नष्ट करने वाले इन बमों के बारे में थोड़ा चर्चा करेंगे। जब उल्कापिंडों को तबाह करना रहेगा, तब इन बमों को एक कतार में हम सजा कर सीधे उल्कापिंड कि और दाग देंगे।

अंतरिक्ष में मौजूद सुरक्षा घेरा - Rocket Powered Asteroid Bombs.

 

वैसे बमों से सजी ये कतार लगभग 6 से 10 फिट तक लंबी  होगी, जिसमें कई बम परमाणु बम भी हो सकते हैं। इसके पीछे का कारण ये है कि परमाणु बम काफी ज्यादा सटीक और सक्षम होते हैं और ये उल्कापिंडों को पृथ्वी कि जलवायु में प्रवेश करने से पहले ही खत्म कर सकते हैं। हालांकि! इस डिफेंस सिस्टम के काम करने के ढंग में काफी ज्यादा कठनाई भी शामिल है। जब बमों से सजा हुआ रोड उल्कापिंड को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देगा, तब ये टुकड़े हो सकता है कि, पृथ्वी कि सतह पर गिरें। इससे तुलनात्मक रूप से कम मात्रा में ही सही, परंतु तबाही तो मचेगी ही।

इतिहास से मिले सबक! :-

मित्रों! साल 2013 में रूस के “Chelyabinsk” के पास एक 62 फीट का बड़ा उल्कापिंड आ कर फटा था। इस उल्कापिंड के गिर कर फटने से भारी तबाही मची थी। इसलिए अगर ये डिफेंस सिस्टम अपनी पूरी क्षमता से काम करें, तो आने वाले समय में ये पृथ्वी की एक सुरक्षा घेरे का रूप ले सकता है। खास बात ये है कि, ये घेरा कुछ उस तरह ही दिखाई देगा जिन को हम किसी साइंस फिक्शन (Sci-Fi) फिल्म में देखते हैं। खैर एक खास बात ये है कि, 2013 में गिरा ये उल्कापिंड हिरोशिमा में गिरे परमाणु बम से 30 गुना ज्यादा खतरनाक था।

ये डिफेंस सिस्टम कितना असरदार हो सकता है? :-

किसी भी वस्तू की योग्यता उसकी काम करने के ढंग से प्रस्तुत होती है। उल्कापिंडों (rocket powered asteroid bombs) को अपनी शक्ति से पल भर में नाश करने वाले इन बमों के काम करने के ढंग के बारे में तो हमने देख लिया। परंतु, अभी भी इसकी
योग्यता के बारे में जानना बाकी है। ये बम एक उल्कापिंड से पैदा होने वाले खतरे को हमारे लिए काफी ज्यादा कम कर सकता है। जिसके बारे में हम अभी आगे बातें करेंगे।

How this defense system works.
अंतरिक्ष में परमाणु धमाका | Credit: Movies and Tv.

मित्रों! इस सिस्टम की योग्यता को देख कर वैज्ञानिकों ने कहा हैं कि, ये सिस्टम कुछ इस तरह से काम करेगा कि 500 kg वजनी पत्थरों से होने वाली तबाही को 500 kg झाग के बुलबुले से होने वाली तबाही तक सीमित कर देगा। यानी आप सोच सकते हैं कि, जहां पृथ्वी की सतह पर 500 kg जितने बड़े पत्थर गिर कर तबाही मचाने वाले थे, वहाँ सिर्फ 500 kg के जितने झाग के बुलबुले ही गिरेंगे। जिससे तबाही लगभग न के बराबर ही रह जाएगी। इसी उदाहरण से आप इस सिस्टम की योग्यता का अंदाजा लगा सकते हैं।

आपकी जानकारी के लिया बता दूँ, नासा पृथ्वी की सुरक्षा के लिए काफी ज्यादा सजग रहता है। ये आकार में 460 फीट से बड़े उल्कापिंडों को हर वक़्त ट्रैक करता रहता है। फ़िलहाल नासा इस श्रेणी में आने वाले 8,000 से ज्यादा उल्कापिंडों को ट्रैक कर रहा है जो कि पृथ्वी के बहुत ही करीब हैं। ये हमारे लिए अंतरिक्ष में उड़ रहें किसी भयानक परमाणु बम से कम नहीं हैं। हालांकि! ध्यान देने वाली बात ये भी है कि, इससे काफी छोटे आकार के उल्कापिंड भी काफी तबाही मचा सकते हैं।

निष्कर्ष – Conclusion :-

उल्कापिंडों को (rocket powered asteroid bombs) तबाह करने वाले इन बमों को हम पारंपरिक रॉकेट ईंधन से भी काफी कम समय में अंतरिक्ष में लौंच कर सकते हैं। इसलिए इस सिस्टम कि क़ाबिलीयत और भी ज्यादा बढ़ जाती है। 2013 में होने वाले उल्कापिंड की टक्कर कि घटना को हम एक मिसाइल के जरिये आसानी से रोक सकते हैं। वैज्ञानिकों के हिसाब से आकार में 1,200 फीट जीतने बड़े उल्कापिंड को हम टक्कर होने के पहले 10 दिनों के अंदर रोक सकते हैं।

Chelyabinsk Asteroid Incident.
Chelyabinsk में घटी उल्कापिंड का हादसा | Credit: Scinews.

इसके अलावा हम इस डिफेंस सिस्टम को और एक बेहतर तरीके से भी इस्तेमाल कर सकते हैं। हम इस सिस्टम के बदौलत पृथ्वी की ओर आ रहें उल्कापिंडों के पास कम मात्रा में धमाका कर के उनके गति पथ को बदल सकते हैं। इससे ये होगा कि, हम ज्यादा असलों को इस्तेमाल किए बिना ही पृथ्वी कि सुरक्षा को सुनिश्चित कर पाएंगे।

वैसे मित्रों! अभी भी हमें इस सिस्टम को इस्तेमाल करने से पहले काफी ज्यादा परीक्षण करना बाकी है। जिससे हम इस सिस्टम कि पूरी योग्यता के बारे में एक प्रैक्टिकल आइडिया बन जाए।

Source :- www.livescience.com

Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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