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वैज्ञानिकों ने बनाई दुनिया की पहली जीवित मशीन – World’s First Living Machine

इंसानों की मदद करने के लिए आ रही है यह जिंदा मशीन, जाने इससे जुड़ी चकित कर देने वाली बातें

इंसानी शरीर और आज के आधुनिक मशीनों के अंदर सिर्फ एक ही अंतर हैं | जहां इंसानी शरीर एक जीवित चीज़ है वहीं दूसरी और मशीन एक प्रकार से निर्जीव वस्तु हैं |आज के समय में मशीनों का आधुनिकीकरण इसे हूबहू इंसानी दिमाग का नकल बना देती हैं |वैसे तो आपको कई प्रकार के बहुत ही उन्नत मशीन देखने को मिलेंगे, परंतु कभी आपने किसी जीवित मशीन के बारे में (world’s first living machine in hindi) सुना हैं | जी हाँ ! एक ऐसा मशीन जो की जीवित हो और किसी जिंदा जीव की तरह इधर से उधर आ-जा सके |

Scientist researching about xenobots.
शोध के दौरान जीव-विज्ञानी | Credit: Marketo.

शायद आपने इससे पहले इस प्रकार के किसी जीवित मशीन (world’s first living machine in hindi) में नहीं सुना होगा, क्योंकि हाल ही में इस मशीन को वैज्ञानिकों ने काफी मेहनत से बनाने में सक्षम हुए हैं | मित्रों! देखा जाए तो यह एक भविष्य वादी मशीन हैं जो की शायद आने वाले समय में आज के निर्जीव मशीनों की जगह भी लैले | तो, ऐसे में हमारे लिए यह जरूरी बन जाता है की हम भी इस मशीन के बारे में कुछ न कुछ अवश्य ही जाने |

तो, चलिए आज के इस अनोखे लेख में इसी जीवित यंत्र (world’s first living machine) के बारे में कई रोचक और हैरान कर देने वाली बातों को जानते हैं |

दुनिया की पहली जीवित मशीन – World’s First Living Machine In Hindi :-

जब किसी एक जीवित प्राणी के जीवित कोशिकाओं को ले कर इंसान द्वारा बनाए गए एल्गॉरिथ्म के आधार पर उसे (कोशिका को) विकसित किया जाए तो क्या होगा ? थोड़ा सोचिए ! ऐसे करने से वह कोशिका एल्गॉरिथ्म के आधार पर विकसित हो कर एक मशीन का रूप धारण कर लेगा | वैसे यह मशीन अन्य किसी साधारण मशीन के विपरीत जिंदा होगा (world’s first living machine In hindi) | तो, क्या ऐसा करना वास्तव में संभव हैं | चलिए आगे जानते हैं |

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक मेंढक के शरीर से कुछ जीवित कोशिका को निकालकर एक विशेष रूप से बनाए गए कम्प्युटर एल्गॉरिथ्म के आधार पर विकसित करवाया | इस प्रक्रिया से जो जीवित कोशिका उत्पन्न हुआ, उसे वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे पहला जीवित मशीन का नाम दिया हैं | वैसे मेँ आपको यहाँ बता दूँ की स्टेम सेल के प्रक्रिया के जरिए इस कार्य को अंजाम दिया गया है |

इसके अलावा और भी बता दूँ की, इस प्रक्रिया में एक अफ्रीकी मेंढक Xenopus laevis को इस्तेमाल किया गया हैं | वैसे गौरतलब बात यह है की, पृथ्वी  का पहला जीवित मशीन मात्र 0.04 इंच का हैं | इतने छोटे होने के कारण इन्हें अन्य कई प्रकार के नामों से भी पुकारा जाता हैं | वैसे इन्हें कई बार जेनो-बोट्स (xenobots) “ भी कहा जाता हैं | वर्तमान के समय में दुनिया भर जीव-विज्ञानी इस छोटे से मशीन के ऊपर काफी ज्यादा गहन शोध कर रहें हैं |

उनका मानना है की, भविष्य में यह जिंदा मशीन (world’s first living machine) इंसान की शरीर से कई प्रकार के खतरनाक बीमारियों को मिटाने में मदद कर सकता हैं | वैसे मेँ आपको बता दूँ की, इस पर अभी तक औपचारिक तौर पर पुष्टि करण नहीं आया है परंतु सूत्रों से पता चला है की केंसर जैसे बीमारियों को भी यह मशीन नष्ट करने में सक्षम हो सकता हैं |

जिंदा मशीन के कुछ अद्भुत क्षमताएं ! :-

इस छोटे से 1 मिलीमीटर की मशीन के बहुत सारी अद्भुत क्षमताएं हैं | आकार में छोटा होने के कारण यह किसी भी जीव के शरीर के अंदर बहुत ही आसानी से घूम सकता हैं | इसके अलावा यह सटीक और सहज तरीके से आपने आप को जख्म से उबार सकता हैं, जो की एक बहुत ही अद्भुत बात हैं |

कुछ वैज्ञानिक कहते हैं की, इन छोटे-छोटे मशीनों को वह लोग रोगी के शरीर के अंदर औषधीय कण को प्रवाहित करने के लिए इस्तेमाल करेंगे | ऐसा करने से रोगी के शरीर के अंदर औषधि अच्छे से हर एक जगह पहुँच कर अपना काम बहुत ही सटीक तरीके से कर पाएगी | इसी कारण से रोगियों को बहुत ही कम समय में ठीक क्या जा सकता हैं और कई खतरनाक बीमारियों से उन सभी का जान भी बचाया जा सकता हैं |

African Clawed Frog Photo.
जेनोबोट्स को इस अफ्रीकी मेंढक के अंदर बनाया गया हैं | Credit: Florida Mueseum.

वैज्ञानिक इस मशीन को आने वाले समय में विकसित करके इसके आकार में भी काफी सारे परिवर्तन लाने वाले हैं | जिससे यह पहले की भांति छोटा न हो कर एक पूर्ण और सटीक जीव के आकृति में दिखाई भी दे सकता हैं|

स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह जिंदा मशीन (world’s first living machine in hindi ) इंसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं | यह आने वाले समय में एक मुख्य दवा के तरह काम करने वाला हैं |खैर इसके बारे में आपका क्या राय हैं , जरूर ही बताइएगा | क्योंकि हमें बहुत ही खुशी होगी |

क्या सच में यह जीवित हैं ! :-

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है की, यह मशीन न ही कोई जीवित कोशिका है और न ही कोई निर्जीव यंत्र | उनका मानना है की, यह एक प्रकार से कम्प्यूटर के कोड से नियंत्रित होने वाला पहले से प्रोग्राम किया गया एक छोटा सा मशीन हैं | मेँ आपको यहाँ बता दूँ की, कई डॉक्टर इसे नियंत्रित जीवित कोशिका भी कह रहें हैं | उनका कहना है की, यह मशीन मेंढक के दिल के कोशिका से विकसित हो कर आया हैं |

यहाँ ध्यान में रखने वाली बात यह हैं की, दिल के धड़कने से जो कंपन उत्पन्न होता है उसमें इस मशीन को नियंत्रण करने की क्षमता होती हैं | पहले तो यह मशीन सिर्फ एक कोशिका से बनी हुई होती हैं , परंतु बाद में यह कोशिका विभाजित हो कर टिसु में परिवर्तित हो जाता हैं | गौरतलब बात यह भी है की इस मशीन का आकार सिर्फ कुछ टिसु के गुच्छों तक ही सीमित हैं |

वैसे यह जीवित मशीन (world’s first living machine) एक बार कम्प्यूटर के द्वारा प्रोग्राम होने के बाद इसे और बाहर से नियंत्रित किया जा सकता है | शरीर के अंदर जाने के बाद यह खुद व खुद अपना कार्य शुरू कर देता हैं | इस छोटे से मशीन के अंदर उसके चलने से लेकर वह कैसे शरीर के अंदर बढ़ सकता है ऐसी सारी चीजों के बारे में वैज्ञानिक कोडिंग के जरिए कई एल्गॉरिथ्म बना कर उसके अंदर डालते हैं | वाकई में दोस्तों ! 1 मिलीमीटर के आकार का यह मशीन कितने अद्भुत कार्य करने में सक्षम हैं | आपको इसके बारे में क्या लगता हैं ?

निष्कर्ष – Conclusion :-

यह जो जीवित मशीन हैं (world’s first living machine) दोस्तों ! यह आने वाले समय में इंसानी जीवित कोशिकाओं का विकल्प भी बन सकता हैं | इससे हमें यह फायदा होगा की, अगर हमारे शरीर के अंदर किसी कारण से कोशिका नष्ट हो जाता हैं तो उस क्षेत्र में हम इस मशीन के जरिए नष्ट हुए कोशिकाओं को अच्छे कोशिकाओं से बदल सकते हैं | इसी कारण के लिए शरीर में कभी भी कोशिकाओं के नष्ट होने से लोगों की जान पहले के भांति नहीं जाएगा | जो की एक बहुत ही बड़ी और गज़ब की बात हैं |

इसके अलावा यह मशीन शरीर के अंदर रेडियोएक्टिव विकिरण के कारण संक्रमित होने वाले कोशिकाओं को भी नष्ट कर सकता हैं, तथा समंदर के गहराई से माइक्रो-प्लास्टि के कण को भी निकाल कर बाहर कर सकता हैं | इंसानी शरीर के कई प्रमुख नशों से यह हानिकारक पदार्थ को भी सफलता के साथ बाहर निकालने में सक्षम हैं |

वैसे यहाँ पर थोड़ी सावधानी भी बरतनी चाहिए, क्योंकि जबतक हम लोग मशीनों को आपने हिसाब से चला रहें हैं तब तक तो यह हमें कुछ हानी नहीं पहुंचाएंगे परंतु जब यह हमारे नियंत्रण से बाहर निकाल जाएंगे तो तब इन्हें फिर में नियंत्रण में लाना बहुत ही कठिन होगा | इंसान ने मशीन को बनाया हैं और किसी भी हाल में हमें इन मशीनों को हमारे ऊपर नियंत्रण नहीं करने देना हैं | मूल रूप से जेनोबोट्स जैसी अत्याधुनिक मशीनों के ऊपर काफी नजर रखनी चाहिए | क्योंकि यह उन्नत होने के साथ ही साथ जीवित भी हैं !

Source :- www.livescience.com.

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Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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