Strange Science - विचित्र विज्ञान

रात में देखने के लिए वैज्ञानिकों ने चुहों में तैयार किया नैनो टेक्नोलॉजी से “Night Vision”

Night Vision In Rats By Nanotechnology

Night Vision In Rats – शोधकर्ताओं की एक टीम ने चुहो में  नैनो टेक्नोलॉजी  की मदद से अति  सुक्ष्म कण(नैनोपार्टिकल) को चुहों की छोटी आँखो में डालकर उनके अंदर नाइट विजन तैयार किया है, जिससे वह अब रात में सब कुछ साफ देखने लगे हैं। इस प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद वैज्ञानिक इसे इंसानो पर भी अजमाना चाहते हैं।

सेल  पत्रिका में प्रकाशित एक नए रिसर्च पेपर में  इस तकनीक का वर्णन किया गया है,  इस तकनीक में nanoantennae से भरे हुए एक साधारण इंजेक्शन का इस्तेमाल  करेंगे जो कि एक खास तरह की की तरंगो को अवशोषित करेगा, जिससे चुहे फिर आसानी से उन तरंगो में भी देख पायेंगे जिससे उनकी आँखे देख नहीं पाती हैं।   

आपको बता दूँ हम इंसान केवल 400 से 700 नैनोमीटर की ही विजिवल (दृश्य) तरंगो में ही किसी को देख पाते हैं, दूसरी तरंगे जैसे पराबैगनी और इंफ्रारेड तरंगो में हम कुछ नहीं देख सकते हैं। अब वैज्ञानिक इस तकनीक से चुहों के देखने का दायरा बढ़ाकर के उन्हें रात के लिए भी तैयार कर रहे हैं। 

तरंगो के साथ मस्तिष्क कैसे काम करता है

अध्ययन के लेखक गंग हान ने एक  बयान में कहा, “जब प्रकाश आंख में प्रवेश करता है और रेटिना से टकराता है, तो छड़ें और शंकु – या फोटोरिसेप्टर कोशिकाएं – दृश्यमान प्रकाश तरंगके साथ फोटॉनों को अवशोषित करती हैं और मस्तिष्क को विद्युत संकेत भेजती हैं। ये तरंगे छोटी होती हैं जिससे हमारा मस्तिष्क देखी गई वस्तु का चित्र बना लेता है  पर जो तरंगे लंबी होती हैं जैसे कि इंफ्रारेड उन्हें हमारा मस्तिष्क समझ नहीं पाता जिससे हम कभी भी इस प्रकाश तंरग में देख नहीं पाते। 

इसी कमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने चुहों की आँखो में नैनोकणों का प्रयोग किया है , इनमें lectin   नाम का एक प्रोटीन है जो चुहों की आँखो में  डाला जाता है। ये प्रोटीन चूहों की आंखों में रेटिनल फोटोरिसेप्टर को ऐक्टिव करता है जिससे चुहे नियर इंफ्रारेड यानि पास की इंफ्रारेड लाइट की लंबी तरंगो में भी देख पाते हैं,   ये प्रोटीन फोटोरिसेप्टर सेल में डलने के बाद, एनआईआर (Near Infrared)  को दृश्यमान हरे रंग की रोशनी में परिवर्तित कर देते हैं जिसे बाद में रेटिना सेल द्वारा देखा जा सकता है।

नैनोपार्टिकल (हरा) आंख की रेटिना की छड़ (वायलेट) और शंकु (लाल) के लिए बाध्यकारी दिखाया गया है। सेल

इस शोध  के लेखक गंग हान का मानना है कि  इस तकनीक के जरिए वे बहुत कम जान पाये हैं, और आगे इसके व्यापक रूप को समझने का प्रयास करेंगे, ये नैनोएनेटेनाई वैज्ञानिकों को कई पेचीदा सवालों का पता लगाने की अनुमति देगा, जिससे हम आगे कई  दृश्य से जुड़े मस्तिष्क रोगों का सही से इलाज कर पायेंगे। 

तकनीक का भविष्य

हान ने इस तकनीक के माध्यम से ये भी जोर दिया कि इससे हम भविष्य में वो काम आसानी से कर पायेंगे जिसके लिए हमें आज मशीनों की जरूरत पड़ती है, हम रात में आसमान में ज्यादा नहीं देख पाते पर अगर हम आँखो में इस पार्टिकल को डाल लें तो हम इंफ्रारेड रोशनी में ब्रह्मांड रे उन रहस्यों को देख सकते हैं जिनके बारे में इंसान हमेशा से ही पागल रहा है।

– वैज्ञानिकों ने पहली बार विकसित किया चुहे में इंसान का दिमाग जिससे होगा इलाज

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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