Health

बच्चों की पॉटी में होते हैं बेशुमार मात्रा में अच्छे बैक्टीरिया जो बनाते हैं उसे “सुपरफूड”

Baby Poo Science Research in Hindi  – वैज्ञानिकों ने हाल में ही अपनी एक नई रिसर्च में एक जबरदस्त खुलासा किया है, उनके मुताबिक नवजात बच्चों के मल (पॉटी) में हजारों की मात्रा में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो शरीर के लिए अच्छे माने जाते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक बच्चों की पॉटी एक खास तरह का “सुपरफूड” है जिसे लेने से आंतो से संबंधी बीमारियां ठीक हो सकती हैं।

आपने देखा होगा कि प्रसव के बाद स्तनधारी जीव अपने नवजात को चाटते हैं। उसके मल को जीभ से साफ करते हैं। इसके पीछे प्रकृति का बड़ा जबरदस्त विज्ञान छुपा होता है।

अमेरिका के वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों का दावा है कि इंसान के नवजात के मल में भी सेहत के लिए बेहत अच्छे माने जाने वाले बैक्टीरिया बेशुमार मात्रा में पाए जाते हैं. विज्ञान पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में इस शोध के नतीजे छापे गए हैं।

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एक नया सुपरफूड (Superfood) 

रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक नवजात का मल एक किस्म का “सुपरफूड” है. उसमें लैक्टिक एसिड वाले बैक्टीरिया बड़ी मात्रा में होते हैं. ये बैक्टीरिया व्यस्क इंसान की आंतों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. पूरे स्वास्थ्य पर इनका असर बेहद सकारात्मक मिला।

उम्र बढ़ने के साथ साथ Antibiotic दवाओं या दूसरे किस्म की कई दवाओं से इंसान की आंत में मौजूद बैक्टीरिया (Bacteria)  कम होने लगते हैं. इसका असर मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है और पेट में बीमारियां जन्म लेने लगती हैं. शोध के मुताबिक नवजातों के मल में मौजूद बैक्टीरिया वयस्क की आंतों में पहुंचकर शॉर्ट चेन फैटी एसिड (Short Chain Fatty Acids)  बनाते हैं.  स्टडी के प्रमुख हरिओम यादव कहते हैं, “शॉर्ट चेन फैटी एसिड आंतों की अच्छी सेहत के लिए बहुत ही जरूरी होते हैं।”

मोटापे के साथ डायबिटीज, ऑटोइम्यून बीमारियों और कैंसर (Cancer)  के मरीजों की आंतों में आम तौर पर शॉर्ट चेन फैटी एसिड बहुत कम होते हैं।

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नवजात के मल की खासियत

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने शिशुओं के मल को बहुत बारीकी से जांचा. शिशु आम तौर पर व्यस्क इंसान की तुलना में ज्यादा स्वस्थ होते हैं।  उनमें उम्र संबंधी बीमारियां नहीं के बराबर होती हैं। इस प्रयोग के दौरान 34 बच्चों के डायपर रोज जमा किए गए थे।

डायपरों से जुटाए गए मल को वयस्क चूहों को खिलाया गया, सेहतमंद बैक्टीरिया से भरे इस मल की खुराक लेते ही चूहे ज्यादा सेहतमंद हो गए।  यादव कहते हैं, “इस डाटा का इस्तेमाल भविष्य में ह्यूमन माइक्रोबायोम (Human Microbiome) , मेटाबॉलिज्म (Metabolism)  से जुड़ी बीमारियों पर प्रोबायोकटिक्स (Probiotics –  हमारी सेहत के लिए अच्छे बैक्टीरिया)  के असर को जानने के लिए किया जा सकता है।”

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कुछ ऐसा ही प्रयोग जर्मनी के माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजी ऑफ एजिंग में भी किया गया. यहां वैज्ञानिकों ने वयस्क मछलियों को नवजात मछलियों का मल खिलाया. प्रयोग के बाद देखा गया कि नवजात मछलियों का मल खाने वाली मछलियों की आंतें बहुत स्वस्थ हो गईं।

इस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिक इस बात का भी संकेत करते हैं कि हमें इस रिसर्च से ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि हर बच्चा स्वस्थ पैदा हो और उसका मल इस काम के लिए कारगर हो यह कम ही होता है।

इस रिसर्च के भविष्य में हम कई अच्छे परिणाम देख सकते हैं, इंसान के शरीर में ज्यादातर बीमारियां पेट के कारण ही होती हैं। अगर ऐसे में वह किसी माध्यम से अपने पेट को सही रख सके तो वह लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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