Chemistry

क्यों हैं यह पदार्थ इतना खास – बहुलक (पॉलिमर)- Polymer Definition In Hindi.

धीमे जहर की ही तरह हमें धीरे-धीरे मार रहा हैं यह खतरनाक पदार्थ! आखिर कैसे ?

दुनिया में आज तरह-तरह के उद्योग और कारखाने बसे हुए हैं | इन्हीं कारखानों के अंदर कुछ कारखाने ऐसे भी हैं जो की इंसानों के लिए रोजाना इस्तेमाल में आने वाले समान बनाते हैं | वैसे तो इंसानों की सुविधा के लिए आज कल कई सारे उद्योग गढ़ उठे हैं , परंतु एक उद्योग ऐसा भी है जिस के बिना हमारा संपूर्ण जीवन की कल्पना ही नहीं किया जा सकता हैं | तो , आखिर वह उद्योग कौन सा हैं ! दोस्तों , मेँ यहाँ पॉलिमर (polymer in hindi) उद्योग की ही बात कर रहा हूँ | वैसे तो यह उद्योग बहुत ही बड़ा है , इसी कारण से इसका प्रभुत्व भी पूरे पृथ्वी पर देखने को मिलता हैं |

क्यों है यह पदार्थ इतना खास - बहुलक (पॉलिमर) ! - Polymer Definition In Hindi.
पॉलिमर के प्रकार | Credit :Azom.

खैर मेँ आपको यहाँ और भी बता दूँ की , पॉलिमर (polymer in hindi) के उद्योग से बनने वाले वस्तुओं से हम हर वक़्त चारों तरफ से घिरे हुए हैं | उदाहरण के लिए आप पॉलिथीन को ही ले लीजिए | पॉलिथीन भी एक प्रकार का पॉलिमर (polymer definition in hindi) ही हैं | बाजार से समान लाने से ले कर किसी को डाक से द्वारा समान भिजवाने तक , हर एक जगह पर पॉलिथीन का ही तो इस्तेमाल होता हैं | इसके अलावा अभी तक पूर्ण रूप से व्यावहारिक तौर से बड़ी मात्रा में पॉलिथीन का विकल्प भी सही तरीके से ढूंढा नहीं गया हैं | मित्रों ! आज के परिवेश प्रदूषण या यूं कहें तो ग्लोबल वार्मिंग का भी यह पॉलिथीन मुख्य वजह हैं | खैर इसके बारे में हम कभी अन्य एक लेख पर चर्चा करेंगे |

तो , पॉलिमर (polymer definition in hindi) पर आधारित इस लेख में हम लोग आगे इसके संज्ञा और बहुत सारे प्रकारों के बारे में जानेंगे | इसके अलावा मेँ आपको इस लेख के अंत में इस से जुड़ी कुछ रोचक बातें भी बताऊंगा , इसलिए लेख को आरंभ से ले कर अंत तक जरूर पढ़ें |

पॉलिमर किसे कहते हैं ? – Polymer In Hindi :-

रसायन व प्राणी विज्ञान में पॉलिमर (polymer definition in hindi) के आपको दो संज्ञा देखने को मिलेंगे | परंतु मेँ आपकी जानकारी के लिए बता दूँ की यह दोनों ही संज्ञा 100% सही हैं और लगभग एक समान ही हैं | इसके अलावा और बात का आपको यहाँ ध्यान रखना पड़ेगा की हम लोग आज इस लेख के अंदर रसायन विज्ञान के दृष्टिकोण से पॉलिमर से जुड़ी मूलभूत बातों को समझेंगे | ठीक हैं ! तो चलिए अब इसके संज्ञा से शुरू करते हैं |

मित्रों ! पॉलिमर को अगर मेँ सरल भाषा में समझाऊँ तो , यह एक ऐसा पदार्थ है जो की कई सारे लंबे कणिकाओं से बनी चेन से बना हुआ होता हैं | यहाँ पर पॉलिमर की सारे गुण इसके मौलिक कणिकाओं के ऊपर पूर्ण रुप से निर्भर करते हैं | कोई-कोई पॉलिमर रबर की भांति लचीले होते हैं , तो कई-कई पॉलिमर शीशे की तरह नाजुक व ठोस होते हैं |

आप अपने पूरे दिन में हर 5 मिनट के अंदर कोई न कोई पॉलिमर से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल करते ही करते हैं , चाहे वह एक शीशे का बोतल हो या कोई लिखने वाला कलम | प्लास्टिक भी एक पॉलिमर ही हैं और आप जानते ही होंगे की प्लास्टिक का महत्व हमारे जीवन में कितना ज्यादा हैं |

आखिर पॉलिमर कैसे बनते हैं ? – How  Polymers Are Made ? :-

आपने अभी ऊपर ही पॉलिमर (polymer definition in hindi) की संज्ञा को जान लिया हैं | इसलिए चलिए अब यह कैसे बनाता है , इसके बारे में भी थोड़ा जान लें | मित्रों ! हर्मन स्टौडिंगर नाम के एक स्विस वैज्ञानिक ने पॉलिमर कैसे बनता है , इसके बारे में गहन खोज किया था | इसलिए कई बारे उन्हें आधुनिक पॉलिमर विज्ञान का जन्मदाता भी कहा जाता हैं | खैर पॉलिमर के बनने को ले कर उन्होंने मूल रूप से एक प्रक्रियाओं को जिम्मेदार ठहराया हैं |

पोलीमेराइजिशन या बहुलीकरण नाम से प्रसिद्ध यह प्रक्रिया दुनिया भर में काफी ज्यादा पॉलिमर को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं | इसके अलावा हर्मन ने मैक्रो मॉलिक्यूल नाम के एक शब्द का भी उपयोग किया | मैक्रो मॉलिक्यूल यानी आकार में बड़े कणिका जो की पॉलिमर (polymers in hindi) को बनाने में काफी ज्यादा मदद करते हैं |

तो , चलिए थोड़ा बहुलीकरण के बारे में भी जान लेते हैं | बहुलीकरण या पोलीमेराइजीशन एक ऐसी प्रक्रिया में जिस में छोटे-छोटे मोनोमर कणिकाओं को को-वालेंट (covalent) बॉन्ड में जोड़ कर के बड़ी कृत्रिम पॉलिमर का चेन बनाया जाता हैं | खैर कृत्रिम से याद आया की मैंने हाल ही में कृत्रिम बुद्दिमता से जुड़ी एक दिलचस्प लेख लिखा है जिसे आप एक बार पढ़ना न भूलें |मेँ आपको और भी बता दूँ की यह चेन कई सारे मनोमर के कणिकाओं को ले कर बनती है , इसलिए इस चेन की लंबाई बहुत ज्यादा भी हो सकती हैं |

यह मैक्रो मॉलिक्यूल क्या हैं ? :-

मैंने ऊपर मैक्रो मॉलिक्यूल का जिक्र किया हैं | इसलिए चलिए थोड़े समय के अंदर इस को और भी अच्छे से समझ लेते हैं | मैक्रो मॉलिक्यूल मूल रूप से मोनोमर के द्वारा बने चेन को कहते हैं | चेन की लंबाई बहुत ज्यादा होने के कारण इनका भी आकार बहुत ज्यादा होता हैं |

इसके अलावा मैक्रो मॉलिक्यूल किसी भी पॉलिमर (polymer definition in hindi) चेन की मूल आधार होता हैं | इसके बिना एक पॉलिमर चेन कभी भी नहीं बन सकता हैं | मैक्रो मॉलिक्यूल पॉलिमर चेन की निव हैं | इसलिए इसका महत्व यहाँ इस चेन के अंदर बहुत ही ज्यादा हैं |

मेँ आपको और भी बता दूँ की एक-एक मैक्रो मॉलिक्यूल के अंदर कई सौ मोनोमर मौजूद रह सकते हैं | मोनोमर से बनी इन कणिकाओं की संरचना आप अपने कल्पना में भी नहीं कर सकते हैं , क्योंकि यह इतने जटिल व सुंदर तरीके से आपस में बंधे हुए होते हैं की मानों किसी फूल के माले में एक-एक पुष्प की भांति उसके अंदर सजे हुए हों |

खैर आपको मेँ यहाँ थोड़ी सी और जानकारी दे दूँ की हर्मन जी को इन्हीं खोज के कारण उन्हें रसायन विज्ञान में साल 1953 को नोवल पुरस्कार मिला | उन्होंने साल 1920 से ही पॉलिमर के ऊपर गहन शोध करना शुरू कर दिया था | आज उन्हीं के कारण मेँ और आप पॉलिमर (polymer in hindi) से जुड़ी हुई इतने रोचक और मूलभूत बातों को जान पा रहें हैं |

मित्रों ! आपको क्या लगता हैं ? आपने इस लेख के माध्यम से पॉलिमर के विषय में अभी तक क्या-क्या जाना ! क्या आपने पॉलिमर से जुड़ी ऐसी मूलभूत बातें पहले कभी कहीं सुना था |

क्यों है यह पदार्थ इतना खास - बहुलक (पॉलिमर) ! - Polymer Definition In Hindi.
पॉलिमर की संरचना | Credit : Intech Open.

पॉलिमर की संरचना – Structure Of Polymer in Hindi  :-

दोस्तों ! चलिए अब पॉलिमर (polymer definition in hindi) की संरचना के बारे में थोड़ा चर्चा करते हैं |

मुख्य रूप से पॉलिमर की संरचना को 4 भागों में बांटा गया हैं | मैंने नीचे एक-एक करके सब के बारे में जानकारी प्रदान की है , इसलिए आप सभी लोगों से अनुरोध है की लेख के इस भाग को ध्यान से पढ़ें |

  1. लिनियर पॉलिमर (Linear Polymer) :- यह एक विशेष प्रकार का पॉलिमर है जिस की संरचनास्पेगटी”की तरह होता हैं | ऐसे पॉलिमर कई सारे लंबे-लंबे मोनोमर के चेन से बनी हुई होती हैं | इन चेनों को बनाने में वेंडर वाल फोर्स या हाइड्रोजन बॉन्ड इस्तेमाल होता हैं | मेँ आपको बता दूँ की इस तरीके के बॉन्ड काफी ज्यादा कमजोर होते हैं और यह आसानी से उच्च तापमान में टूट जाती हैं | इसलिए कई बार लिनियर पॉलिमर को थर्मो प्लास्टिक पॉलिमर भी कहा जाता है |
  2. ब्रांच्ड पॉलिमर (Branched Polymer) :- मित्रों ! अगर आपने सही तरीके से लिनियर पॉलिमर को पहचान लिया तो , आपके लिए ब्रांच्ड पॉलिमर को पहचानना बही बहुत आसान हो जाएगा | खैर लिनियर पॉलिमर के आजू-बाजू अगर कोई दूसरा पॉलिमर उस से निकलता है तो उस पॉलिमर को ब्रांच्ड पॉलिमर कहते हैं | इसके अलावा काफी सारे छोटे-छोटे मोनोमर चेन से बनने के कारण यह लिनियर पॉलिमर की तरह काफी ज्यादा घने नहीं होते हैं |

मेँ आपको यहाँ और भी बता दूँ की लिनियर पॉलिमर की ही तरह ब्रांच्ड पॉलिमर भी थर्मो प्लास्टिक पॉलिमर  हैं |

यह भी हैं पॉलिमर की संरचना के प्रकार :-

  1. क्रॉसलिंक्ड पॉलिमर (Cross-linked Polymer) :- विश्वास कीजिए दोस्तों पॉलिमर (polymer definition in hindi) के बारे में इतनी सरलता के साथ जानकारी शायद ही कहीं आपको देखने को मिलेगा | खैर अब मुद्दे पर आते हैं | क्रॉस लिंक्ड पॉलिमर जो है , यह लिनियर पॉलिमर से ही बना हुआ होता हैं | मेरे कहने का अर्थ यह हैं की , अगर कोई दो या इस से अधिक लिनियर पॉलिमर आपस में मिल जाते हैं तब एक क्रॉस लिंक्ड पॉलिमर बनता है |

आमतौर पर क्रॉस लिंक्ड पॉलिमर की आकार एक सीढ़ी” की तरह होता हैं | इसके अलावा और एक बात इसे बहुत ही खास बनाता हैं | यहाँ पर आपको वेंडर वाल फोर्स से बनी बॉन्ड भी नजर आएंगे | यह बॉन्ड दोनों लिनियर पॉलिमर के चेनों को आपस में जोड़ती हैं | इसके अलावा यह पॉलिमर थर्मो प्लास्टिक पॉलिमर  नहीं हैं |

  1. नेटवर्क्ड़ पॉलिमर (Networked Polymer) :- यह पॉलिमर (polymer definition in hindi) एक प्रकार से सबसे अनोखा और महत्वपूर्ण पॉलिमर हैं | यह इकलौता ऐसा पॉलिमर है जो की तीन आयामी संरचना में परिवर्तित हो सकता हैं | इसकी संरचना बहुत ही ठोस तरीके से होता है , इसलिए इस पर ताप का किसी प्रकार से कोई असर नहीं पड़ता हैं |

इन्हें अन्य पॉलिमर की तरह आसानी से किसी भी मनचाहे रूप में ढाला नहीं जा सकता हैं | हालांकि अभी तक ऐसा कोई तकनीक उपलब्ध नहीं है जो की नेटवर्क्ड़ पॉलिमर को अन्य किसी दूसरे रूप में ढाल सके |

मित्रों ! यहाँ पर और एक बात पर आपको थोड़ा गौर करना चाहिए | कई बार दो अलग-अलग प्रकार के मोनोमर के चेन को एक साथ मिला कर एक अलग ही प्रकार के पॉलिमर को बनाया जाता हैं | दो अलग-अलग मोनोमर से बनी हुई इस पॉलिमर को विज्ञान की भाषा में कपोलिमर्स” कहा जाता हैं |

पॉलिमर की उपयोगिता – Uses Of Polymers In Hindi :-

पॉलिमर (polymer definition in hindi) के विषय में आपने अभी तक बहुत कुछ जान लिया हैं | इसलिए अब यह पूर्ण रूप से जरूरी हो जाता है की , इसके कुछ उपयोगिताओं के बारे में जान लिया जाए | तो , चलिए जानते हैं इसके बारे में |

  •  पोलीप्रीन को ज़्यादातर स्टेसनरी , पैकेजिंग , कपड़ों के कारखानों , कनस्ट्रकशन , प्लास्टिक के कारखाने और हवाई जहाज बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं |
  • आपने अकसर अपने घरों के अंदर पानी के पाइप देखें ही होंगे | यह पानी के पाइप एक प्रकार से पॉलिमर से ही बनी हुई होती हैं | आमतौर पर ज़्यादातर पाइप पोली विनाइल क्लोराइड (PVC) से बनी हुई होती हैं | इसे हम बोल चाल की भाषा में पीवीसी पाइप भी कहते हैं |
  • आज का जमाना तो आधुनिक और बिजली से  चलने वाला जमाना हो चुका हैं | हम लोग हर वक़्त किसी न किसी बिजली से चलने वाली उपकरण को इस्तेमाल करते ही करते हैं | परंतु क्या आप जानते हैं ! इन उपकरणों में 70% से 75% उपकरणों के अंदर पॉलिमर को इस्तेमाल किया जाता हैं |  जी हाँ ! अपने सही सुना 70% से 75% चीजों के अंदर बेकलाइट नाम के एक विशेष पॉलिमर को इस्तेमाल किया जाता हैं | आज कल बेकलाइट को स्विच , खिलौने , जेवर , हथियार और कंप्यूटर के पुर्जे बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं |
Plasctic bag Main Cuase Of Pollution.
प्लास्टिक की थैलियाँ – प्रदूषण का मूल कारण | Credit :Khyber news.
यह भी हैं इसके उपयोगिता :-
  • इसके अलावा पीवीसी को आज काल कपड़े बनाने में , फर्नीचर बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता हैं |
  • यूरिया फॉर्मलडीहाइड नाम के पॉलिमर से एक प्रकार का विशेष गौंद बनाया जाता हैं | बाद में इसी से आसानी से न टूटने वाले डिब्बे और मोल्ड भी बनाया जाता हैं |
  • मित्रों अगर आपने कभी अपने घर को गौर से देखा होगा तो , आपको पता होगा की आपके घर में मौजूद 80% चीज़ें पॉलिमर से ही बनी हुई हैं | परंतु मित्रों अब यहाँ मेँ घर के अंदरूनी हिस्से और वस्तुओं के साथ ही साथ इसके बाहरी सतह की भी बात कर रहा हूँ | बाहरी सतह माने घर में लगा हुआ रंग | जी हाँ ! दोस्तों ग्लिप्टल नाम के एक पॉलिमर (polymer in hindi) से घर में लगाए जाने वाला रंग बनता हैं | इसके अलावा यह पॉलिमर अन्य प्रकार के धातुओं के ऊपर बाहरी आवरण चढ़ाने में भी इस्तेमाल किया जाता हैं |
  • पॉलिमर पोलीस्टेरिन को रोज़मर्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले वस्तुओं के अंदर उपयोग में लिया जाता हैं | इस पॉलिमर से पाने पीने वाले ग्लास , बोतल , खिलौने , डब्बे , थालियाँ बनाने में इस्तेमाल किया जाता हैं | इसके अलावा और भी बता दूँ की पोलीस्टेरिन एक अच्छी ताप रोधी चीज़ के तरह भी काम मेँ आता हैं |

मित्रों ! आपसे मेँ यहाँ पर एक सवाल पूछना चाहता हूँ की , क्या आपने कभी पॉलिमर के ऊपर दिए गए उपयोगिताओं के बारे में इस से पहले अपने रोज़मर्रा के जीवन में कभी कुछ सोचा हैं ? मैंने तो कभी पॉलिमर (polymer in hindi) के इतने उपयोगिताओं के बारे में न ही कुछ सुना था और न ही कभी जाना था |

पॉलिमर से जुड़ी कुछ रोचक बातें – Amazing Polymer Facts :-

लेख के इस भाग में मेँ आपको पॉलिमर (polymer facts in hindi) से जुड़ी बेहद ही आश्चर्यचकित कर देने वाले बातों को आपके सामने रखूँगा | तो , चलिए आगे बढ़ते हैं |

  • आपने अकसर खाने ले जाने वाले डिब्बों को देखा होगा , जिसको बनाने में 100% फूड ग्रेड प्लास्टिक का इस्तेमाल होने का दावा किया जाता हैं | परंतु दोस्तों आपको जानकार थोड़ा गुस्सा और अचंभा भी लगेगा की , यह दावा पूर्ण रूप से हमेशा सत्य नहीं होता | ज़्यादातर देखा गया है की इन प्लास्टिक के डिब्बों के अंदर प्लास्टिक के साथ-साथ कुछ खतरनाक रासायनिक पदार्थ भी मिलाए जाते हैं , जिससे डिब्बे को अच्छे से बनाया जा सके | इसलिए प्लास्टिक के डिब्बों में खाना खाना भीलकुल भी सही विकल्प नहीं हैं | यह एक धीमी जहर की तरह आपके शरीर को क्षति पहुंचा सकती हैं |
  • प्लास्टिक के डिब्बे और पोलीथिन हो सकते हैं होने-वेज ! जि हाँ आपने सही सुना | प्लास्टिक से बनी हुई डिब्बों को बनाने के लिए मुर्गे के चर्बी को इस्तेमाल किया जाता हैं | मुर्गे की चर्बी डिब्बे और पोलीथिन बेग के सतह को चिकनी और चमकीली बनाती हैं | तो , अगर आप एक शाकाहारी व्यक्ति हैं तब आपको पोलीथिन या प्लास्टिक के डिब्बों को सोच समझ कर ही इस्तेमाल करें |
  • प्लास्टिक को आज के प्रदूषण का एक मूल कारण माना गया हैं | तो , आखिर इसकी वजह क्या हैं ? मित्रों ! प्लास्टिक एक पॉलिमर है जो की एक प्रकार से विघटित न होने वाला पॉलिमर हैं | आपको जान कर चौकेंगे की एक मामूली प्लास्टिक की थैली को मिट्टी के अंदर विघटित होने के लिए 450 साल लगता हैं | जी हाँ ! 450 साल |
Enviorment Pollution Due To Plastic.
प्लास्टिक से बना कूड़ा | Credit : The Leaf Let.
आपको हैरान देगा यह बातें :-
  • हर साल पूरे पृथ्वी भर में 272 अरब kg प्लास्टिक से बनी वस्तुओं की खपत होती है | इस हिसाब से ये प्रति एक मिनट में एक प्लास्टिक थैली बनता है|
  • आज तक जीतने भी प्लास्टिक पॉलिमर से बनी हुई चीज़ें हैं , वह अब तक विघटित (disintegrated) नहीं हुए हैं | क्योंकि प्लास्टिक को इंसानों ने हाल ही में इस्तेमाल करना शुरू किया हैं , प्राचीन काल में लोग धातु और मिट्टी से बनी हुई चीजों का इस्तेमाल करते थे |
  • प्रति वर्ष 11 अरब प्लास्टिक थैलियों का उपयोग पूरे विश्व भर में होता हैं | इतने ज्यादा थैलियाँ परिवेश को काफी ज्यादा प्रदूषित कर रहे हैं |
  • 1 अरब प्लास्टिक थैलियों को बनाने के लिए करीब-करीब 2.4 करोड़ लीटर ईंधन का उपयोग होता हैं | वाकई में इतनी भारी मात्रा में ईंधन की खपत वायु प्रदूषण का एक मूल कारण हैं |

तो , मित्रों ! अब आखिर में सिर्फ इतना कहना चाहूँगा की हम लोग ही हमारे देश को बादल सकते हैं | स्वच्छ और सजग भारत हर एक भारतीय का लक्ष्य होना चाहिए | वैसे ही हमारे देश के कई सारे सहर प्रदूषण से काफी ज्यादा परेशान हैं और हम अब अगर कुछ कदम नहीं उठाएंगे तो हमें आने वाले समय में भारी कीमत चुकाना ही पड़ेगा |  हमेशा प्लास्टिक के थैलीओं का परहेज करें और इसके बदले कपड़े से बनी हुई थैली का ही उपयोग करें | आइए हम सब मिल कर स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाएँ |

                                                अगर देश स्वच्छ रहेगा तो , सब का मन भी स्वच्छ रहेगा |

——————————————————————————————————————————————————Sources :- www.relativelyinteresting.com , www.vedantu.com , www.byjus.com .

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Bineet Patel

I am a learner and passionate writer who loves to spread the interesting concepts of science through my writing.

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