
पूरे सौर-मंडल में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है, जहाँ हमें समंदर देखने को मिलता है। इसलिए पृथ्वी को जलीय ग्रह का दर्जा भी दिया गया है। वैसे वैज्ञानिकों ने कई अन्य ग्रहों पर पानी की खोज में काफ़ी समय लगाया है, और इस दौरान उन्हें काफी हद तक सफलता मिली है तथा अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी भी प्राप्त हुई है। मित्रों! पृथ्वी के अलावा यदि किसी दूसरे ग्रह पर पानी मिलने (Ocean on Mars) की संभावना है, तो वह मंगल ग्रह है। क्योंकि यह ग्रह पृथ्वी का ट्विन प्लैनेट माना जाता है और यहाँ जीवन के पनपने की कई संभावनाएँ मौजूद हैं।

अगर मंगल (Ocean on Mars) पर समंदर भी मिलता है, तो इसमें हमें चौंकने की ज़रूरत नहीं है। क्योंकि इस ग्रह पर इस तरह की चीज़ें होने की संभावना पहले से ही जताई जाती रही है। मंगल को इंसान अपना दूसरा घर बनाना चाहता है और इसके लिए वह काफ़ी मेहनत भी कर रहा है। वैसे किसी भी ग्रह पर घर बसाने के लिए पानी की आवश्यकता होती है, क्योंकि यही पानी लंबे समय तक वहाँ टिके रहने में हमारी मदद करेगा। यही कारण है कि हमें दूसरे ग्रहों पर पानी की तलाश करनी पड़ रही है।
मित्रों! आज के इस लेख में हम मंगल ग्रह पर पाए जाने वाले संभावित समंदर के बारे में बात करेंगे, जो कि वर्तमान समय की एक बहुत बड़ी खोज मानी जा रही है। वैसे लेख में आगे बढ़ने से पहले मैं आप लोगों से एक विनती करना चाहूँगा कि विज्ञान से जुड़े ऐसे ही रोचक और ज्ञानवर्धक लेख पढ़ते रहने के लिए हमारी इस वेबसाइट को ज़रूर बुकमार्क कर लें।
विषय - सूची
मंगल के ऊपर मिला समंदर! – Ocean on the Mars! :-
वैज्ञानिकों के अनुसार प्राचीन काल में मंगल (Ocean on the Mars) के ऊपर पानी की काफी ज्यादा मौजूदगी थी। और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ये भी माना गया है कि, मंगल पृथ्वी की भांति एक नीला ग्रह (Blue Planet) था। मित्रों! आज से लगभग कई दशकों पहले मंगल को वैज्ञानिकों ने इंसान की दूसरे घर के रूप में पहचाना था। क्योंकि इतने बड़े अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसे ग्रह को ढूँढना लगभग असंभव है। इसलिए मंगल के ऊपर आज भी इंसान इतने शोध कर रहें हैं। खैर कुछ वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि, मंगल के उत्तरी गोलार्ध में प्राचीन समंदर के होने कि कई सारे सबूत मिलते हैं।

क्योंकि वैज्ञानिकों को समय-दर-समय कई सारे मंगल के ओर्बिटर से पुराने रिवर डेल्टा के तसवीरों को देखने को मिलते रहते हैं। मित्रों! अधिक जानकारी के लिए बता दूँ कि, ये पुराने रिवर डेल्टा प्राचीन काल में बहने वाले नदियों को दर्शाता हैं। वर्तमान में वैज्ञानिकों ने मंगल के एक खास जगह पर एक बहुत ही बड़े रिवर डेल्टा के बारे में खोज किया हैं। जो की शायद एक बहुत बड़े जल स्रोत का हिस्सा रहें हैं। साथ ही एक बात ये भी हैं कि, इन प्राचीन नदियों में आप लोगों को कई सारे पुराने घाटियां भी देखने को मिलते हैं। जो की हमारे पृथ्वी पर स्थित घाटियों जैसी ही हैं। इसलिए शायद मंगल को पृथ्वी की जुड़वा भाई भी कहा जाता हैं।
मित्रों! क्या अपने कभी सोचा हैं कि, आखिर क्यों मंगल को पृथ्वी के साथ तुलना किया जाता हैं? हमारे सौर-मंडल में मंगल के अलावा भी दूसरे कई सारे ग्रह हैं, परंतु मंगल में आखिर ऐसा क्या खास हैं; जो वैज्ञानिक सिर्फ इसके पीछे ही पड़े हुए हैं! तो मित्रों, मेँ आप लोगों को बता दु कि; मंगल लगभग पृथ्वी के जैसा ही हैं। मंगल की हर एक चीज़ पृथ्वी से काफी ज्यादा मिलता-जुलता हैं। इसलिए इसे पृथ्वी से तुलना किया जाता हैं।
मंगल और पानी ! :-
जब भी मंगल (Ocean on the Mars) की बात होते हैं, तो सबसे पहले हमे इसके ऊपर मौजूद प्राचीन पानी के स्रोतों के बारे में याद आता हैं। तो आप लोगों को मेँ बता दूँ कि, मंगल के ऊपर ऐसे भौगोलिक संरचनाओं को देखा गया हैं कि; जैसे मानों लगता हैं, कई सारे नदियां किसी एक समंदर में मिल रहें हो। जी हाँ! मित्रों, आप लोगों ने बिलकुल सही सुना; वैज्ञानिकों को मंगल के सतह पर प्राचीन नदियों से बने हुए संरचनाओं के बारे में काफी बड़े-बड़े सबूत मिले हैं। इसलिए यहाँ कहा जाता हैं कि, हमें पानी मिल सकता हैं। वैसे आप लोगों को इसके बारे में क्या लगता हैं; कॉमेंट करके जरूर ही बताइएगा।

आज के समय में अगर हम मंगल को देखें तो, आप लोगों को पता चलेगा कि; मंगल में कई सारे ऐसे पुराने रिवर बेड हैं; जो की पूरे तरीके से पुराने समय पर पानी के होने की पुष्टि करते हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार मंगल के ऊपर “Blueberry Stone” को देखा गया हैं, जिसके अंदर पानी के साथ आइरन ऑक्साइड देखने को मिलते हैं। मित्रों! ये बात बिलकुल भी साधारण नहीं हैं। क्योंकि ये एक बहुत ही खास बात हैं। कुछ शोध मंगल के सतह के नीचे बहने वाले पानी के बारे में भी पुष्टिकरण करते हैं। क्योंकि ये वही जगह हैं, जहां आज भी पानी के होने की संभावना सबसे ज्यादा हैं।
आज के जमाने में वैज्ञानिक मंगल के बारीकी से जांच कर रहें हैं। और इसके अंदरूनी संरचना के बारे में काफी ज्यादा चर्चा भी कर रहें हैं। कहते हैं कि, इससे हमें मंगल से जुड़े हर एक छुपी हुई राज के बारे में पता चलेगा। वैसे व्यक्तिगत रूप से मुझे ऐसा लगता हैं कि, मंगल के ऊपर पानी की उपस्थिती एक बहुत ही खास बात होगी। क्योंकि इतने सालों में हम लोगों ने इसके बारे में अभी तक कुछ खास ढूंढा नहीं हैं। इसलिए ये बात एक असाधारण बात हैं।
क्या कह रहें हैं वैज्ञानिक! :-
मंगल के पानी (Ocean on the Mars) को ले कर कई सारे वैज्ञानिकों का अलग-अलग राय हैं। कुछ वैज्ञानिको के अनुसार मंगल के ऊपर प्राचीन काल में पानी बहता था, परंतु आज इसके ऊपर पानी मिलना मुश्किल हैं। वहीं कुछ वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि, मंगल पर आज भी पानी हो सकता हैं; जो की शायद इसके सतह के नीचे आज भी बह रहा हो। वैसे देखा जाए तो, दोनों ही बातें संभव हो सकते हैं। क्योंकि इसके लेकर आज कोई भी ठोस सबूत नहीं हैं।

वैसे आज के जमाने में मंगल की गहन रूप से मैपिंग हो रही हैं। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल के ऊपर पृथ्वी के भांति ही पहाड़ और घाटियां मौजूद हैं। साथ ही पहाड़ों के छोर पर प्राचीन नदियों के चिन्हों को देखा गया हैं। ये बात बहुत ही ज्यादा अद्भुत हैं, क्योंकि इस तरह के चीजों को अकसर हमें देखने को मिलते नहीं हैं। वैसे कुछ रिपोर्ट्स में मगल के ऊपर “फेन डेल्टा” को देखा गया हैं। बता दूँ कि, ये डेल्टा बालू और मिट्टी से बनी हुई एक विशेष संरचना को दर्शाता हैं। जो की बहते हुए पानी के स्रोत के किनारे में देखने को मिलते हैं।
मित्रों, अधिक जानकारी के लिए आप लोगों को बता दूँ कि; ये फेन डेल्टा हमारे पृथ्वी पर देखे जाने वाले फेन डेल्टा के समान हैं। क्योंकि ये डेल्टा अक्सर बड़े पानी के स्रोत के पास भी देखे जाते हैं। बताते हैं कि, अक्सर ये डेल्टा किसी एक नदी और समंदर के मिलन स्थल पर देखने को मिलते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये सारे चीज़ें सतह से लगभग 12,000 फीट के ऊंचाई पर देखे गए हैं।
निष्कर्ष – Conclusion :-
आज से लगभग 3.5 अरब साल पहले मंगल (Ocean on the Mars) के ऊपर पानी बहता था। और इसका सबूत हमें पुराने रिवर डेल्टा से मिलते हैं। साथ ही अधिक जानकारी के लिए बता दूँ कि, मंगल पर पानी के होने कि पुष्टि उस पर मौजूद प्राचीन समंदर के चिन्हों से भी साबित होते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल का ये प्राचीन समंदर आज हमारे ग्रह पर मौजूद आर्कटिक समंदर के आकार का था।
Source :- www.livescience.com



