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डार्क मैटर कर रहा है ब्रह्मांड में चमत्कार! – Dark Matter Wobbling Space-Time

डार्क मैटर की जल्द ही खुलने वाली है गुत्थी, क्या आपने अभी तक इसके बारे में जाना है!

हमारा ये ब्रह्मांड काफी ज्यादा विशाल है। इस विशाल ब्रह्मांड में कब-क्या-कैसे हो जाए, ये कोई नहीं कह सकता है। मित्रों! हमारे ब्रह्मांड का 95% हिस्सा, हमें दिखाई ही नहीं देता है। कहने का मतलब ये है कि, हम जो भी हिस्सा ब्रह्मांड का देख रहें हैं, वो मात्र कुल हिस्से का 5% ही है। वैज्ञानिक मानते हैं कि, ब्रह्मांड का 95% हिस्सा डार्क मैटर (Dark Matter Wobbling Space-Time) से बना हुआ है। इसलिए हमारा ये ब्रह्मांड काफी मात्रा में अज्ञात ही है। इसके बारे में हमें कोई भी चीज़ सटीक तौर पर पता नहीं है और शायद ही कभी इसके बारे में हमें पता चल पाए।

डार्क मैटर कर रहा हैं ब्रह्मांड में चमत्कार! - Dark Matter Wobbling Space-Time.
डार्क मैटर हैं काफी रहस्यमयी। | Credit: Cosmos Magazine.

डार्क मैटर (Dark Matter Wobbling Space-Time) के बारे में एक खास बात ये भी है कि, इसे न ही हम महसूस कर सकते हैं और न ही देख सकते हैं। तो, आप सोच ही सकते हैं कि; इस चीज़ के बारे में कोई भी जानकारी निकाल पाना कितना ज्यादा कठिन होगा। काफी समय से वैज्ञानिक डार्क मैटर से जुड़े मिशनों को अंजाम देने में लगे हुए हैं, परंतु इसके बारे में अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है। वैज्ञानिक भी हैरान हैं कि, आखिर कैसे इसके बारे में जानकारियों को इक्कठा किया जा सकता है।

वैसे मित्रों! आज के हमारे इस लेख का विषय ही डार्क मैटर से जुड़ा हुआ है। इस लेख में हम डार्क मैटर से जुड़े कुछ बेहद ही अद्भुत और रोचक बातों को चर्चा करने वाले हैं।

डार्क मैटर कर रहा है ब्रह्मांड में चमत्कार! – Dark Matter Wobbling Space-Time :-

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी रिपोर्ट को जारी की है, जिसे सुन कर शायद आपके होश भी उड़ जाएंगे। दरअसल बात ये है कि, इससे पहले डार्क मैटर (Dark Matter Wobbling Space-Time) के बारे में पता लगा पाना कोई आसान काम नहीं था। परंतु अभी हमारे पास कुछ ऐसी तकनीकें मौजूद हैं, जिसके जरिये हम डार्क मैटर के बारे में काफी कुछ जानकारी इक्कठा कर सकते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि, जिस तकनीक के जरिये हम स्पेस टाइम में पैदा हो रहें तरंगों को डिटेक्ट करते हैं,- उसी तकनीक को इस्तेमाल कर के हम डार्क मैटर के बारे में भी पता लगा सकते हैं।

डार्क मैटर कर रहा हैं ब्रह्मांड में चमत्कार! - Dark Matter Wobbling Space-Time.
क्यों खास हैं डार्क मैटर। | Credit: Nature

एक थ्योरी के अनुसार स्पेस में मौजूद कुछ बेहद ही खास सैटेलाइट्स के जरिये, वैज्ञानिक डार्क मैटर के मौजूदगी को आसानी से डिटेक्ट करने में सक्षम हो सकेंगे। क्योंकि डार्क मैटर भले ही क्यों लाइट को अब्सॉर्ब, रिफ्लैक्ट या इंफ्लुएंस न करता हो, परंतु ये मैटर एक पैटर्न में गुरुत्वाकर्षण बल के ऊपर काफी ज्यादा प्रभाव डालता है। आप लोगों को अधिक जानकारी के लिए बता दूँ कि, हमारे ऊपर भी डार्क मैटर का काफी ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इसलिए इस चीज़ को कभी भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

कुछ वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि, डार्क मैटर के ऊपर ही ये ब्रह्मांड बना हुआ है और इसके बिना ब्रह्मांड का कोई अस्तित्व ही नहीं है। हालांकि! इस बात पर भी कई वैज्ञानिकों की अलग-अलग राय है। मित्रों! आप लोगों को क्या लगता है, क्या डार्क मैटर हमारे जीवन को वाकई में प्रभावित करता होगा? कमेंट कर के जरूर बताइएगा।

आखिर क्यों खास है ये डार्क मैटर! :-

अब कई लोगों के मन में ये सवाल आ रहा होगा कि, आखिर ये डार्क मैटर (Dark Matter Wobbling Space-Time) इतना क्यों खास है? आखिर इसमें क्या ऐसी बात है, जो हर किसी को अपनी और आकर्षित करती है? तो, मित्रों मैं आप लोगों को बता दूँ कि, हमारे ब्रह्मांड में डार्क मैटर ही एक ऐसी चीज़ हैं, जो की हर जगह काफी मात्रा में मौजूद हैं। परंतु इसके गुणों और संरचना के बारे में हम लोगों को कुछ भी नहीं पता है। वैज्ञानिकों के अनुसार डार्क मैटर के बारे में जानना किसी कठिन पहेली को हल करने के जैसा है। जितना आप इसे सुलझाना चाहेंगे, उतना ही आप उसमें फंसते जाएंगे।

Image of finding dark matter.
ग्रैवीटेशनल डिटेक्टर डार्क मैटर को ढूंढते हुए। | Credit: Wikipedia.

खैर हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक बहुत ही अच्छा तरीका निकाला है, जिसके जरिये हम आसानी से डार्क मैटर को खोज सकते हैं। इसे खोजने के लिए “Gravitational Wave Detector” की जरूरत पड़ेगी। इस तरह के उपकरण को सबसे पहले आइन्सटाइन जी ने ही खोजा था। ये उपकरण बड़े ही सरलता के साथ ब्रह्मांड में मौजूद हल्के से भी हल्की ग्रैविटेशनल वेब को डिटेक्ट कर सकता है। इससे हम सटीक रूप से डार्क मैटर की मौजूदगी के बारे में पता लगा सकते हैं।

वैसे डार्क मैटर के गुणों को ले कर कई थ्योरी मौजूद हैं। जो कहते हैं कि, डार्क मैटर आकाशगंगाओं में कई बड़े-बड़े हेलोस (Galactic halo) को बनाते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि, डार्क मैटर काफी हल्के पार्टिकल होते हैं। परंतु यहाँ कुछ ऐसे भी वैज्ञानिक मौजूद हैं, जो मानते हैं कि; डार्क मैटर हमेशा तरंग (Wave) की अवस्था में रहता है। तो हाँ! इसके वेभ जैसा स्वरूप भी हो सकता हैं।

क्या डार्क मैटर एक तरंग है? :-

अब डार्क मैटर (Dark Matter Wobbling Space-Time) को कई वैज्ञानिक वेब (Wave)पैटर्न का मान रहें हैं। परंतु आज भी इसके ऊपर काफी ज्यादा विवाद हो रहा है।  दुनिया भर के वैज्ञानिकों के अंदर डार्क मैटर के बर्ताव को लेकर काफी सारे बहस हो चुकी हैं। परंतु जो सबसे रोचक बात सामने आयी है वो ये है कि, डार्क मैटर काफी हद तक एक साधारण तरंग के जैसा ही बर्ताव करता है। जी हाँ! दोस्तों आप लोगों ने बिलकुल सही सुना, डार्क मैटर किसी दूसरे साधारण तरंग की भांति ही हैं, जिसे की हम लोग रोज महसूस करते हैं।

डार्क मैटर कर रहा हैं ब्रह्मांड में चमत्कार! - Dark Matter Wobbling Space-Time.
डार्क मैटर का तलाश। | Credit: Science.

खैर डार्क मैटर का ये तरंग जैसा रूप इसके गुणों के बारे में हमें काफी कुछ जानकारी देता है। तो, यहाँ कुछ वैज्ञानिक कहते हैं, स्पेस एक समुद्र है और स्पेस के तरंग हैं डार्क मैटर। जैसे एक समुद्र में हमेशा अलग-अलग तीव्रता वाले तरंग आते-जाते रहते हैं, ठीक उसी तरह स्पेस के अंदर भी डार्क मैटर अलग-अलग तीव्रता वाले तरंग की तरह गतिशील रहता है। हालांकि! इस बात के ऊपर अभी पुष्टि करण आना बाकी है। परंतु जो भी हो, डार्क मैटर के बारे में कल्पना कर पाना भी हमारे लिए बहुत ही बड़ी बात है।

मित्रों! अगर डार्क मैटर का स्वरूप सच में तरंग जैसा ही है, तो हम आसानी से ग्रैविटेशनल डिटेक्टर के जरिये इनके बारे में काफी कुछ पता लगा सकते हैं। इसलिए अक्सर कहा जाता है कि, अगर सही तकनीक के जरिये स्पेस के मिशन को सही समय पर अंजाम दिया जाए; तब बहुत ही बड़े-बड़े खोज किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष – Conclusion :-

आइन्सटाइन के हिसाब से स्पेस-टाइम के अंदर आने वाले छोटे-छोटे कंपन असल में गुरुत्वाकर्षण बल में हो रहें परिवर्तन के कारण ही संभव होते हैं। इसलिए स्पेस-टाइम में आने वाले छोटे से छोटे बदलाव को भी रेकॉर्ड करना हमारे लिए जरूरी हो जाता हैं। खैर जब इस तरह के कंपन ग्रैविटेशनल डिटेक्टर के जरिये हो कर गुजरते हैं, तब डिटेक्टर के अंदर मौजूद दो आईने के अंदर मौजूद बीच की दूरी में भी परिवर्तन आता हैं। मित्रों! दूरी में आई इस परिवर्तन को डीटेक्ट कर के हम आसानी से ग्रैविटेशनल वेब के मौजूदगी के बारे में पता लगा सकते हैं।

Photo of whirl.
डार्क मैटर की गुत्थी जल्द ही सुलझेगी। | Credit: Innovation Network.

वैसे कुछ वैज्ञानिकों का ये भी मानना हैं कि, डिटेक्टर के अंदर मौजूद इन दो आईने के बीच के दूरी को डार्क मैटर के जरिये भी बदला जा सकता हैं। तो, आप समझ ही सकते हैं कि; डार्क मैटर के उपस्थिति को भी ये डिवाइस कितने अच्छे तरीके से डिटेक्ट कर सकता हैं। खैर यहाँ एक बात ये भी हैं कि, डार्क मैटर का आकार और उसका वजन डिटेक्टर में लगे आईने को अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकता हैं। इसलिए इनके ऊपर भी ध्यान देना बहुत ही जरूरी हैं। वरना हमें कभी भी सटीक रूप से जानकारी मिल नहीं पाएगा।

Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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