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चंद्रमा की सतह पर पानी के अणु फुदकते हुए दिखाई देते हैं – वैज्ञानिक

Water Molecules New Research On Moon

Water Molecules – एक दिन में किस तरह चंद्रमा पर जल परिवर्तन होता है अब वैज्ञानिक ये जानते हैं। नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO)  ने पता लगाया   है चंद्रमा के दिन ढ़लने के साथ ही चांद पर मौदूज पानी के कण भी एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं।  आप इस अध्ययन को  जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में पढ़ सकते हैं।

एक दशक पहले सोचा जाता था कि चंद्रमा एक शुष्क और बंजर उपग्रह है, पर जब धीरे-धीरे हमनें चंद्रमा की सतह को जाना और समझा तो हमें पता चला कि चंद्रमा पर बर्फ भी मौजूद है।  ये बर्फ चंद्रमा के   खड्डों पर मौजूद है जहां पर सूर्य की रोशनी कभी नहीं पहुँच पाती है। टीम ने मिट्टी में पानी का अध्ययन करने के लिए एलआरओ के लिमैन अल्फा मैपिंग प्रोजेक्ट (एलएएमपी) उपकरण का इस्तेमाल किया  इस शोध में उन्होंने पाया कि  एख बहुत पतली पानी के अणुओं की परत    मूवमेंट करती है।

ऑर्बिटर के डेटा से पता चलता है कि चांद के उच्च अक्षांश पर पानी अधिक मात्रा में मिलता है। दोपहर के समय जब मिट्टी अपने सबसे गर्म तापमान तक पहुंच जाती है तो वहां पर चांद पर पानी के अणु (Water Molecules) आपस में टूटकर ठंडी जगहों पर जाने की कोशिश करते रहते हैं।

चंद्रमा पर इस तरह जल का दिन में चलना एक बहुत मुश्किल काम है जिसे  हम अभी नाप नहीं सकते हैं, इसकी वजह भी साफ है क्योंकि चंद्रमा  पर सूर्य की लाइट कुछ अजीब तरीके से रिफ्लेक्ट होती है जो पानी के अणुओं की चाल को नापने में दिकक्त पैदा करती है। सह लेखक डॉ माइकल Poston, दक्षिण पश्चिम अनुसंधान संस्थान दीप टीम के सदस्य, ने एक बयान में कहा कि  “पिछले  मिली रिपोर्ट केअनुसार चंद्रमा पर पानी के अणुओं के फुदकने की मात्रा काफी ज्यादा मिलती है, जिसे हम अपने ज्ञात विज्ञान के अनुसार समझ नहीं सके है कि  ऐसा क्यों होता है। 

पर माइकल Poston अब ज्यादा उत्तसाहित हैं नये मिले परिणाम के कारण वे आशा जता रहे हैं कि इस डेटा से वो चंद्रमा पर मिले पानी के अणुओं का अध्ययन अब अपनी लैब में भी कर सकते हैं। 

अध्ययन से पता चला कि चंद्रमा की मिट्टी से पानी निकालने के लिए कितनी ऊर्जा आवश्यक है, और यह भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों के मिशन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अध्ययन से यह भी पता चला कि कि  सौर हवा  चंद्रमा पर पानी के निर्माण में एक भूमिका निभा सकती है, जिसे समय के साथ – साथ देखना काफी ज्यादा रोचक होगा।

“ये परिणाम चंद्र जल चक्र को समझने में सहायता करते हैं और अंततः हमें चंद्रमा पर भविष्य के मिशनों में मनुष्यों द्वारा उपयोग किए जा सकने वाले पानी की पहुंच के बारे में जानने में बहुत मदद मिलेगी,” ग्रह विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक अमांडा हेंड्रिक्स और प्रमुख लेखक ने कहा।

“चंद्र जल का उपयोग संभवतः मनुष्यों द्वारा ईंधन बनाने या विकिरण परिरक्षण या थर्मल प्रबंधन के लिए उपयोग किया जा सकता है; अगर इन सामग्रियों को पृथ्वी से लॉन्च करने की आवश्यकता नहीं है, तो ये भविष्य के मिशनों को और अधिक किफायती बनाते हैं। ”

नासा चंद्रमा पर वापस जाने और अगले दशक के भीतर हमारे उपग्रह पर  एक स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की योजना बना रहा है , इसलिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है।

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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