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इसरो का ये नया “भुवन” पोर्टल आपके होश ही उड़ा देगा! – Bhuvan In Hindi

क्या आपने कभी ऐसी सेवाओं को अपने स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया हैं?

भारत के विकास में इसरो का बहुत ही बड़ा योगदान रहा है। इसरो (ISRO) के कारण आज भारत बहुत सी उन्नत तकनीक व ज्ञान-कौशल में काफी आगे निकल चुका है। इसलिए हमारे देश के लिए इस्रो सच में एक बहुत ही बड़े वरदान के रूप में साबित हो चुका है। दुनिया भर के देश आज इस्रो के बहुत बड़े-बड़े कामों को देख मंत्रमुग्ध हो चुके हैं। मित्रों! यकीन मानिए अमेरिका जैसे देश भी आज इस्रो के कई मिशनों को देख कर उसे शाबासी दे रहें हैं। और आप भी आज इस्रो को शाबासी देने लगेंगे जब आप भुवन” (Bhuvan In Hindi) के बारे में जानेंगे।

मित्रों! आज का हमारा लेख इसरो की एक नई सेवा “भुवन” (Bhuvan in hindi) के बारे में होगा। वैसे जब इस नई सेवा के बारे में बात उठ ही गई है, तो आप लोगों से मेरा एक प्रश्न हैं, आप लोगों ने पहले कभी इस “भुवन” के बारे में कुछ भी सुना हैं? क्योंकि, ये विषय हाल ही में एक बहुत ही बड़ा विषय बन चुका है, तो अगर आप भुवन के बारे में पहले से कुछ भी जानते हैं, तो आप कमेंट कर के मुझे बता सकते हैं। हमें जान कर बहुत ही खुशी होगी।

तो, चलिए अब लेख को शुरू करते हैं और इस भुवन के बारे में जान लेते हैं। आशा है आप मेरे साथ इस लेख में अंत तक बने रहेंगे।

आखिर ये “भुवन” क्या है? – What Is Bhuvan In Hindi? :-

लोगों के मन में “भुवन” (Bhuvan in hindi) के बारे में जो सबसे पहला सवाल होगा, वो ये होगा की, आखिर ये भुवन है क्या? तो, चलिए सबसे पहले इसी सवाल के जवाब को ही जान लेते हैं। मित्रों! भुवन इसरो के द्वारा परिचालित होने वाला एक पोर्टल है, जहाँ पर देश की भू-स्थानिक डेटा और अनेक उपकरणों की सेवाएँ विश्लेषण के लिए प्रदान की जाती हैं”। इस पोर्टल में यूजर को कई अत्याधुनिक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, इन सेवाओं से यूजर अपना मन-चाह काम कर सकता है। इसलिए ये पोर्टल काफी महत्वपूर्ण हैं।

भुवन के बारे में जानकारी! -
कोरोना प्रबंधन में भुवन। | Credit: ISRO

खैर इस पोर्टल में यूजर को, अलग-अलग जगहों की अवास्तव सेटेलाइट इमैजेस को देख पाना, जानकारियों का विश्लेषण करना, डेटा को निशुल्क डाउनलोड करना, बहुत सी रिपोर्ट्स को अपने मन-चाहे नामों के रूप में डाउनलोड” करने की सुविधाएं आदि मिलती हैं। मित्रों! इस पोर्टल में मिलने वाले तस्वीर कोई आम फोटो नहीं होते हैं। इसके सेटैलाइट इमेजेस मल्टी-सेन्सर, मल्टी-टेम्पोरल और मल्टी-प्लेटफॉर्म के होते हैं। जिससे आप इन तस्वीरों को 2D व 3D के आकार में देख सकते हैं। इसके अलावा इस पोर्टल में आपको कई अलग-अलग थीम पर भारत का मैप देखने को मिलता है।

बता दूँ की, अलग-अलग थीम देश के अलग-अलग खूबियों को दर्शाती हैं। इसलिए जो भी मैप्स आप इस पोर्टल पर देखेंगे, वो कोई आम मैप्स नहीं होंगे। मित्रों! वैसे क्या आप भी कभी इन अलग-अलग तरीकों के मैप्स को देखना पसंद करेंगे? जरूर बताइएगा। अभी कई सरकारी विभाग इस्रो के इस भुवन को इस्तेमाल कर रहें हैं। इसके अलावा कई शिक्षा संस्थान और उद्योग भी इस पोर्टल को इस्तेमाल कर रहें हैं।

भुवन पोर्टल को आप यहां से इस्तेमाल कर सकते हैं – https://bhuvan-app1.nrsc.gov.in/bhuvan2d/bhuvan/bhuvan2d.php 

भुवन के बारे में कुछ खास जानकारी! :-

चलिए अब लेख के इस भाग में भुवन (Bhuvan in hindi) के बारे में कुछ खास बातों को जान लेते हैं। सबसे पहले इसरो ने भुवन को साल 2009 में लाँच किया था। 12 अगस्त 2009 ही वो दिन था जब इसरो ने भुवन के बीटा वर्शन को दुनिया के सामने पेश किया था। उस समय भारत का ये पहला अत्याधुनिक वेब-बेस्ड़ मैप्स सर्विस था, जो की इस्रो जैसी कोई सरकारी संस्थान दे रहीं थी। इसरो के द्वारा बनाया गया ये पोर्टल बहुत ही सटीक जगहों की जानकारी देता है। बता दूँ की, इतनी सटीक जानकारी अन्य कोई कंपनी की मैप्स भी नहीं दे पाती।

Photo of resourcesat-1.
रिसोर्ससैट-1 की फोटो।  Credit: Spaceflight Insider.

अन्य कंपनियों का मैप्स ज्यादा से ज्यादा 1 मीटर की सटीकता को दर्शाते हैं, परंतु भुवन इससे कई ज्यादा सटीकता को अपने मैप्स में दर्शाता है। इसलिए अन्य मैप्स की सेवाओं के साथ इसकी तुलना नहीं की जा सकती है। अभी के समय में देश के 177 शहरों की काफी बारीक हाई-रेसोलुशन( High Resolution) वाले मैप्स इस पोर्टल पर मौजूद हैं। धीरे-धीरे देश के बाकी हिस्सों के भी मैप्स जल्द ही इस पोर्टल पर आने वाले हैं। बता दूँ की, देश के बाकी हिस्सों की मैप्स पर सटीकता लगभग 2.5 मीटर की है।

हालांकि! इस पोर्टल पर देश के सैन्य स्थापनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं मिलती हैं, जो की देश के सुरक्षा के तहत किया गया है। वैसे भुवन को विकसित करने में “National Remote Sensing Agency” का बहुत ही बड़ा हाथ रहा है। खैर पोर्टल पर मिलने वाले मैप्स को “Resourcesat-1, Cartosat-1 और Cartosat-2” के माध्यम से प्रदान किया जाता है। इनके जरिए बनने वाला मैप्स वाकई में काफी ज्यादा सटीक होता है।

भुवन को कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है! :-

लाँच के बाद से ही भुवन (Bhuvan in hindi) के यूजरों को एक प्रकार की असुविधा को झेलना पड़ रहा है। उनके हिसाब से कई बार देखा गया है की, वेबसाइट या तो एक्सेस ही नहीं हो पा रही होती हैं या पोर्टल इतना धीमा होता है कि, उसे इस्तेमाल ही नहीं किया जा सकता। यूजर्स को पोर्टल को इस्तेमाल करने से पहले रजिस्टर करना होता हैं, तथा 11 MB के प्लगइन (Plugin) को भी डाउनलोड कर के इन्स्टाल करना पड़ता है। इसके बाद ये पोर्टल सिर्फ विंडो वाले कम्प्युटर में चलेगा और वो भी सिर्फ इंटरनेट एक्सप्लोरर वाले ब्राउज़र में।

भुवन के बारे में जानकारी! - Bhuvan In Hindi
भुवन पोर्टल

हालांकि! अभी भुवन को धीरे-धीरे विकसित किया जा रहा है और अभी इस पोर्टल पर मैप आदि को देखने के लिए पहले की तरह रजिस्टर भी नहीं करना पड़ता है। वैसे यूजर को अगर मैप डाउनलोड करना रहता है, तब उसे पोर्टल पर रजिस्टर करना ही पड़ता है। क्योंकि बिना रेजिस्टर किए आप पोर्टल पर किसी भी मैप या डेटा को डाउनलोड नहीं कर सकते हैं।

मित्रों! अब भुवन पहले से काफी बेहतर बन चुका है। अभी भुवन के जरिए 3D में मैप्स को देखना काफी ज्यादा सहज हो चुका है। वैसे अगर एक ही नाम की कई जगहे होती हैं, तब ये पोर्टल सभी जगहों के बारे में यूजर को विकल्प देता हैं। जिससे यूजर अपनी मन-चाह जगह को मैप्स में देख कर जानकारी ले सकता है।

निष्कर्ष – Conclusion :-

अब लेख के आखिरी भाग में चलिए एक नजर भुवन (Bhuvan in hindi) के महत्व के बारे में जान लेते हैं। मित्रों! भारत सरकार के अनुसार भुवन भारत के असल और सटीक अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को दिखाता है। स्वदेशी ज्ञान-कौशल से बनने के कारण, इसको इस्तेमाल करने से यूजर का डेटा किसी विदेशी कंपनी के हाथों नहीं पड़ता। इससे यूजर का प्राइवसी भी बनी रहती है और यूजर एक अच्छी सेवा को भी अनुभव कर लेता है।

मित्रों! विदेशी कंपनियों के साथ देखा गया है की, वो फ्री सुविधाएं देने के बहाने यूजर के डेटा को अलग-अलग मार्केटिंग कंपनियों के साथ साझा कर देती है। जिससे ये कंपनियाँ मुनाफा तो कमाती ही हैं, साथ ही साथ अपने कारोबार को और भी ज्यादा बड़ा कर लेती हैं। इसलिए हमें जितना हो सके विदेशी कंपनियों से दूर रहना चाहिए।

ये मैप्स की सेवा न बल्कि हमारे आम नागरिकों के डेटा को सुरक्षित रखता हैं बल्कि ये देश को आत्मनिर्भर भी बना रहा है। हम खुद की जरूरतें खुद ही पूरी कर रहे हैं। मित्रों! इससे बड़ी बात और क्या हो सकती हैं! आत्मनिर्भर बनने की हमारे देश में बहुत सी मुहिम छेड़ी गए हैं, जिसमें ये मिशन भी शामिल है। वैसे दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग राष्ट्रीय मैप्स के पोर्टल चलते हैं। जैसे की रुष का “GLONASS” हो या यूरोप का “Galileo”। खैर इस तरह की सुविधाएं आपदा प्रवंधन, नैवीगैशन, मैपिंग, डैटा कैपचरिंग आदि क्षेत्रों में इस्तेमाल किए जाते हैं।

Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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