Religion

ये हैं तिरुपति बालाजी मंदिर के बारे 10 अद्भुत और विचित्र मान्यताएं

Tirupati Balaji Temple

हमारा भारत बहुत ही समृद्धशाली राष्ट्र है, आपको यहां हर जगह मंदिर दिखाई देंगे। भारत की हर गली में कोई ना कोई मंदिर होता ही है और उससे बढ़कर बात यह है कि उसके साथ मान्यताआ भी जुडी हुई होती हैं जो लोगों को और आकर्षित करती है। ऐसा ही एक मंदिर है जो कि भारत का सबसे अमीर मंदिर भी है, इस लेख में जानिए तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple)  से जुड़ी 10 विचित्र मान्यताएं।

तिरुपति बालाजी मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरूमला पहाड़ों में स्तिथ हैं। इस मंदिर का नाम भारत  के सबसे पुराने और अमीर मंदिरों में सुमार  है। इस मंदिर के बारे में बहुत सी मान्यताएं हैंl आज हम आपको ऐसी ही कुछ मान्यताओं के बारे में बताने जा रहे हैंl आप इन मान्यताओ को सही माने या न मानें किन्तु बालाजी के भक्त इन पर विश्वास करते है l

मान्यता नंबर 1

इस मंदिर में वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे हुए बाल उनके असली बाल हैं। लोग बताते है  कि ये बाल कभी उलझते नहीं है और हमेशा इतने ही मुलायम रहते हैं।

मान्यता नंबर 2


बालाजी की मूर्ति का पिछला हिस्सा हमेशा नम रहता है। यदि ध्यान से कान लगाकर सुनें तो सागर की आवाज सुनाई देती है।
मान्यता नंबर 3
मंदिर के दरवाजे कि दायीं ओर एक छड़ी रहती है। माना जाता है इस छड़ का उपयोग भगवान के बाल रूप को मारने के लिए किया गया था। तब उनकी ठोड़ी पर चोट लग गई थी। जिसके कारण बालाजी को चंदन का लेप ठोड़ी पर लगाए जाने की शुरुआत की गई।</span

मान्यता नंबर 4


सामान्य तौर पर देखने में लगता है कि भगवान की मूर्ति गर्भ गृह के बीच में है। लेकिन वास्तव में, जब आप इसे बाहर से खड़े होकर देखेंगे, तो पाएंगे कि यह मंदिर के दायीं ओर स्थित है।

मान्यता नंबर 5

मूर्ति पर चढ़ाए जाने वाले सभी फूलों और तुलसी के पत्तों को भक्तों में न बांटकर, परिसर के पीछे बने पुराने कुएं में फेंक दिया जाता है।

मान्यता नंबर 6

गुरुवार के दिन, स्वामी की मूर्ति को सफेद चंदन से रंग दिया जाता है। जब इस लेप को हटाया जाता है तो मूर्ति पर माता लक्ष्मी के चिह्न बने रह जाते हैं।

मान्यता नंबर 7

मंदिर के पुजारी, पूरे दिन मूर्ति के पुष्पों को पीछे फेंकते रहते हैं और उन्हें नहीं देखते हैं, दरअसल इन फूलों को देखना अच्छा नहीं माना जाता है।

मान्यता नंबर 8


कहा जाता है 18 वी शताब्दी में, इस मंदिर को कुल 12 वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था। उस दौरान, एक राजा ने 12 लोगों को मौत की सजा दी और मंदिर की दीवार पर लटका दिया। कहा जाता है कि उस समय वेंकटेश्वर स्वामी प्रकट हुए थे।

मान्यता नंबर 9

इस मंदिर में एक दीया कई सालों से जल रहा है किसी को नहीं ज्ञात है कि इसे कब जलाया गया था।

मान्यता नंबर 10


बालाजी की मूर्ति पर पचाई कर्पूरम चढ़ाया जाता है जो कर्पूर मिलाकर बनाया जाता है। यदि इसे किसी साधारण पत्थर पर चढाया जाए, तो वह कुछ ही समय में चटक जाता है, लेकिन मूर्ति पर इसका प्रभाव नहीं होता है।.

Tags

Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान, सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।

Related Articles

8 Comments

  1. Beautiful.i want to see this temple since 3 years.hope to see this time.

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
Close