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शुक्र की Terraforming से होगा चमत्कार – Terraforming of Venus In Hindi.

कैसे की जा सकती है शुक्र पर जीवन की शुरुआत?

शुक्र की Terraforming के बारें मे – Introduction to Venus Terraforming in Hindi – मित्रों Terraforming विज्ञान एक नया पहलू है| यह न बल्कि एक भविष्य वादी सोच है परंतु एक चुनौती भी है| जैसे जीवन में चुनौती न होता तो इसका कोई मजा नहीं उसी तरह अंतरिक्ष में हर एक चीज़ बहुत सारी बाधाओं से भरा हुआ होता है और यही तो अंतरिक्ष को इतना आकर्षक बनाती है|

वैसे तो प्रकृति को ब्रह्मांड ने  बनाया है पर आज मनुष्य भी अपनी ज्ञान और कौशल के माध्यम से नए नए ग्रहों पर एक नई दुनिया बनाने का ख्वाब देख रहा है| इन्हीं ख्वाबों के सूची में शुक्र की Terraforming भी शामिल है| वैसे तो आज मनुष्य का वर्चस्व पूरे पृथ्वी पर छा चुका है पर इतने में हमें थोड़ी न संतुष्टि मिलेगी! अब हम अंतरिक्ष में अपने एक नए घर की संधान में लग गए हैं|

क्या    Venus  में पनप पायेगा जीवन!

इस 21 वीं शताब्दी में शुक्र की Terraforming एक काफी ज्यादा आलोचना किए जाने वाला विषय बन चुका है| हमारे सौर मंडल में अब 8 ग्रह हैं और हर एक ग्रह की अपनी ही एक दुनिया है| इस दुनिया को अगर हम चाहें तो अपने बल बूते पर बदल भी सकते है परंतु इसके लिए काफी ज्यादा धैर्य और बुद्धि की जरूरत पड़ेगी| पृथ्वी के अलावा अन्य कोई भी ग्रह पर हमें अब तक जीवन का एक भी निशान देखने को नहीं मिला है| उन ग्रहों में जीवन का न होना उनके जलवायु और परिस्थितियों के ऊपर निर्भर करता है|

यहाँ मनुष्य आज एक ऐसी योजना बना रहा है जो आगे आने वाले समय में काफी ज्यादा लाभ पहुँच सकता है| शुक्र की Terraforming से भी हमें बहुत ज्यादा हितकारी परिणाम मिल सकते हैं|

क्या है Terraforming – What is Terraforming?

अगर किसी भी विषय को गहराई से जानना है तो सबसे पहले उसके मूल-भूत आधारों के बारे में जानना बहुत ही जरूरी है| जैसे एक पेड़ की साखा को तने के माध्यम से बढ्ने की हर एक जरूरी समान मिलता है| ठीक इसी तरह Terraforming की संज्ञा आपको इसे बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा| तो चलिये जानते है शुक्र की Terraforming का मतलब क्या है?

अगर आप Terraforming शब्द को ध्यान से देखेंगे तो आपको पता लगेगा की यह दो अँग्रेजी शब्दों से बनी हुई है| पहला शब्द है “Terrain” जिसका हिन्दी  में मतलब है “रहने की जगह” है और दूसरा शब्द है “Form “जिसका हिन्दी के मतलब है “बनाना”| आसान भाषा में कहा जाए तो एक जीवित प्राणी के लिए रहने की जगह को बनाने को ही Terraforming कहते है| तो दोस्तों इसी तरह शुक्र की Terraforming का मतलब है शुक्र में रहने लायक जगह का निर्माण करना जो की किसी भी पृथ्वी में बसे प्राणी के लिए अनुकूल और सही हो|

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मित्रों सुनने में तो Terraforming बहुत आसान जान पड़ता है| परंतु हम आपको बता दें की इसको सफल तरीके से इस्तेमाल में लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी|  यह कोई कल्पित विज्ञान का फिल्म नहीं है जिसमें चुटकियों में सब हो जाएगा| इस में काफी सोध और मेहनत की जरूरत पड़ती है|

विज्ञान के नजरिए से Terraforming:- Real Science of Terraforming.

अगर हम विज्ञान के नजरिया से देखेंगे तो Terraforming एक बहुत पेचीदा प्रणाली मालूम पडेगा| जितना यह सुनाई में आसान पड़ता है उतना ही करने में कठिन है| सिर्फ शुक्र की ही Terraforming नहीं बल्कि बात मंगल की Terraforming तक पहुँच चुकी है| इसलिए इसमें विज्ञान अपना हर एक संभव संज्ञा देने में जुटा पड़ा है | तो , विज्ञान के द्वारा दिये गए Terraforming की सबसे सटीक संज्ञा है-

Terraforming एक काल्पनिक (आज के समय के हिसाब से ) प्रणाली है जिसमें एक ग्रह की वायुमंडल, जलवायु, तापमान और सतह की तल रूप तथा परिस्थिति की को संशोधित करके उस ग्रह को रहने लायक बनाने को ही Terraforming कहते है”|

Terraforming का इतिहास बहुत ही पुराना है, सिसकी शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के समय से ही हो गया था| जी हाँ! अपने सही सुना| यह कोई high-tech बात नहीं है| सन 1942 में Jack Williarson के द्वारा बनाई गयी कल्पित विज्ञान फिल्म Astounding Science Fiction में सबसे पहले शुक्र की Terraforming का जिक्र किया गया था| Terraforming परिकल्पित  विज्ञान और अवास्तविक विज्ञान का एक अनूठा संगम है| वैसे तो यह अब के समय के हिसाब से करने में काफी मुश्किल लगता है परंतु नामुमकिन नहीं है| क्या पता इसी प्रणाली को इस्तेमाल करते हुए पृथ्वी के वातावरण को नकल करते हुए जीवन-उपयोगी एक दूसरे ग्रह का संधान कर लेंगे|

आज के समय मे शुक्र की Terraforming क्या संभव है?:- Is it possible to Terraforming Venus?

अगर हम प्राणी विज्ञान के हिसाब से थोड़ी गहराई के साथ सोचेंगे तो पता चलेगा की जो जीवित प्राणियों के शुख्म कोशिकाएं होती हैं वह अपने आप पर ज्यादा दवाब सह नहीं सकती| अगर वातावरण में बहुत ज्यादा बदलाव हो जाएगा तो यह कोशिकाएं नष्ट भी हो सकती है | इसके अलावा हम भौतिक विज्ञान के नियम और सिद्धांतों को भी नजर अंदाज नहीं कर सकते |

दोस्तों इन सभी सिद्धांतों के द्वारा ही Terraforming की निव रखा गया है| हमें Terraforming के लिए दोनों ही जीवविज्ञान और भौतिक विज्ञान के बीच चीजों को सांझ करते हुए आगे काम करना पड़ेगा क्योंकि यह Astrobiology और Astrophysics की हिस्सा है| यह दोनों विज्ञान के अभिन्न अंग है |

शुक्र की Teraaforming
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1) Image by Okan Caliskan from Pixabay

वैज्ञानिकों का मानना है की शुक्र की सतह पर जीवन को प्रस्फुटित करने के लिए सबसे से पहले हमे उसको heavy metals और solar wind तथा cosmic radiation से बचा कर रखना होगा| हम लोगों को वहाँ खुद जा कर मिट्टी और खनिज की परीक्षा करनी पड़ेगी| आम अंतरिक्ष के पोशाक वहाँ के वातावरण को झेल नहीं सकते| हमें कुछ नया और बेहतर पोशाकों की जरूरत पड़ेगी| NASA ने शुक्र सहित अन्य ग्रहों पर Terraforming करने की प्रक्रिया के वारे में विशेष रूप से प्रकाश डाल कर ,इस नतीजे पर पहुँच है की अभी काफी कुछ करना बाकी है|

सिर्फ डाटा और मशीनों के भरोसा कोई भी ठोस कदम नहीं लिया जा सकता| अंतरिक्ष में गलती करने की कोई भी गुंजाइश नहीं है| हर एक project के लिए अरबों खरबों रूपय की जरूरत होता है| तो कुल मिलकर यह कहा जा सकता है की Terraforming करने में अभी हम को इंतजार करना पड़ेगा| पर वैज्ञानिकों ने शुक्र की Terraforming को लेकर काफी कुछ theory दिये है , इसलिए उनके बारे में जानना भी बहुत ही जरूरी है|

Terraforming के लिए शुक्र ही क्यूँ? – Why only Venus for Terraforming?

आप सभी तो जानते ही होंगे की आकार और वजन के हिसाब से पृथ्वी के तरह सौर मंडल में और दो ग्रह मौजूद है और वह  दो ग्रह है शुक्र और मंगल| वैसे तो हम मंगल के ऊपर काफी कुछ जानते ही होंगे पर क्या आप शुक्र के बारे में भी उतना ही जानते हैं? नहीं ना! कोई बात नहीं हम आज आपको शुक्र को लेकर ऐसे कुछ बातें बताएंगे जो की आपको जरूर रोमांच प्रदान करेगा|

 

शुक्र की Terraforming प्रक्रिया तकनीकी रूप से काफी जटिल है| आज का हमारा तकनीक Terraforming के लिए जरूरी आधारों को बना में काफी दिक्कत पैदा करेगा| शुक्र की वजन 4.867 * 10^24 k.g है , जो की पृथ्वी के वजन 5.972 * 10^24 से थोड़ा ही कम है| इसके अलावा इन दोनों की बनावटी मौलिक पदार्थों में भी काफी ज्यादा समानता दिखाई पड़ता है|

शुक्र की  जो पृथ्वी के भाँति सतह है यह उसकी Terraforming में काफी ज्यादा मदद करेगा| परंतु हाँ! काफी ज्यादा पृथ्वी के साथ समानता होने के बावजूद शुक्र का वायुमंडल को सफल  Terraforming होने से निश्चित रूप से रोकेगा|

शुक्र की Terraforming कैसे हो सकती है? – How can Venus be Terraformed?

वैसे तो शुक्र की Terraforming के बारे में आलोचना तो 80 साल पहले से ही शुरू हो गया था| परंतु इसके बारे में गंभीर रूप से सोध 20 वीं शताब्दी के अंत में ही शुरू हुआ| हाल ही के एक सोध से पता चला है की , शुक्र की Terraforming में तापमान एक मुख्य बाधक के रूप में सामने आया है| शुक्र की सतह का तापमान 462 C है| इतनी अधिक तापमान के चलते इसके वायुमंडल में हर एक धातु के मौलिक कण Ion के रूप में मँडराते रहते है| Terraforming के लिए बहुत जरूरी बन जाता है की इस तापमान को कम किया जाए|

Carl Sagon की थियरि:- Theory of Carl Sagon.

1961 में Carl Sagon के द्वारा शुक्र की Terraforming को लेकर एक लिखित थिओरि रखी गयी| यह थिओरि उनकी किताब The Planet Venus में संजो कर रखा गया था| उनके थिओरि के हिसाब से अगर हम आनुवंशिक रूप से विकशीत किया गया किटाणुयों को शुक्र के जमीनी सतह पर छोड़ दें तो वह आसानी से वहाँ पर पहले से भरपूर मात्रा में मौजूद carbon कणों को जैविक कणों में बदल सकते हैं| हालाँकि इस थिओरि को बाद में शुक्र में sulfuric acid के आविष्कार के चलते नकार दिया गया|

Paul Birch की थियरि :- Theory of Paul Birch.

1991 में ब्रिटिश वैज्ञानिक Paul Birch ने शुक्र की Terraforming को लेकर एक थिओरि कहा| उनका यह थिओरि वाकई में काफी ज्यादा हैरान करने वाला था| उनके थिओरि के हिसाब से शुक्र को Hydrogen से bombarding करके वहाँ पर बदलाव लाया जा सकता है| इस bombarding के चलते graphite का वहाँ जन्म होगा जो की बाद में पानी में तबदील होगा जो की भाँप के रूप में होगा| इस प्रक्रिया से शुक्र की 80% हिस्सा तरल पानी के समंदर से भर जाएगा|

इसके अलाव Birch का और भी कहना था की शुक्र की Lagrangian Point ( L1 ) पर अगर बड़े बड़े आईने soletta mirror के साथ लगाया जाए तो , पृथ्वी के भाँति शुक्र पर भी 24 घंटे का दिन होगा| अगर हम बहुत बड़े वस्तु को शुक्र से टकराएँ या 95.6 K.m से ज्यादा व्यास के कोई भी वस्तु को इसके अक्ष पथ के पास से निकले तो इसकी घूमने की गति भी पृथ्वी के साथ समान हो जाएगी| यहाँ पर Iron aerosol को भी इस्तेमाल में लाया जाता है| यह शुक्र के वायुमंडल की दवाब को कम करने में मदद करता है|

इस थिओरि शुरुआत में तो काफी ज्यादा लोकप्रिय हुआ था परंतु इसके कुछ वैज्ञानिकी खामियाँ के चलते इसको भी रद्द किया गया|

 

Mark Bullock और David H Grinson की theory :- Theory of Mark Bullock and David H Grinson.

1996 में दो अमेरिकी वैज्ञानिक Mark Bullock और David H Grinson ने शुक्र की Terraforming को लेकर एक विशेष थिओरि रखा| यह थिओरि Paul Birch के थिओरि से काफी मिलता जुलता था| सिर्फ इसमें hydrogen की जगह Calcium और Magnesium को bombarding करने के लिए कहा गया था| इस प्रक्रिया के लिए बहुत भरी मात्रा में Calcium और Magnesium की जरूरत पड़ता है| इसी जरूरत को पूरी करने के लिए शुक्र पर माइनिंग करने की जरूरत पड़ता जो की आगे चल कर carbon sink की तरह भी काम करेगा|

अगर देखा जाए तो इस थिओरि में अभी तक शुक्र के Terraforming के ऊपर दिये  गए दूसरे थिओरि के मुकाबले काफी ज्यादा सटीक था| परंतु दुख की बात यह है की इस थिओरि से जन्मा cooling effect इस का सबसे बड़ी दुश्मन बनी| जब calcium और magnesium की खदान शुक्र में मौजूद कार्बन को पूरे तरीके से सोख लेंगे तब इस का तापमान -400 k तक चला जाएगा| तापमान में इतनी गिरावट जीवन के लिए बहुत ही ज्यादा प्रतिकूल है| इसके चलते मेहनत से बनाई गयी पानी भी बर्फ बन के जम जाएगा|

शुक्र के Terraforming से जुड़ी बाकी थेओरिस:- Other Venus Terraforming related theories.

एक थिओरि में वैज्ञानिकों ने कहा है की , अगर हम solar shade को इस्तेमाल में लाएंगे तो बात आसानी से बन सकती है| इस से शुक्र पर पड़ने वाली सूर्य की प्रकाश और विकिरण को रोक कर तापमान में मनचाहे गिरावट किया जा सकता है| इस थिओरि का नाम Runway green House Effect रखा गया|

इस थिओरि में इस्तेमाल किए गए solar shade के मदद से शुक्र की Langrangian Point को ढका जाएगा| आपको बता दें की शुक्र का यह जगह सूर्य से सबसे ज्यादा आलोक को प्राप्त करता है|इसी जगह पे शुक्र का जो ताप होता है यह सबसे ज्यादा होता है| अगर इसी जगह पर shade को लगा कर तापमान में परिवर्तन लाया जा सकता है तो अन्य दूसरे जगहों पर भी इसको इस्तेमाल किया जा सकता है| इससे कार्बन जम कर dry ice में बदल जाएगी जो की बाद में पानी बनाने में काफी मदद करेगा|

NASA के वैज्ञानिक Geoffrey A.Landis का कहना है की , अगर शुक्र के बादलों के ऊपर बड़े बड़े आईनों से बने वायु यानों को रख कर उस में जीवन को आसानी से बढ़ाया जा सकता है| यह थिओरि बाकी थिओरि से काफी ज्यादा नई है और कारगार भी है|

शुक्र की Terraforming में आने वाले कठिनाइयाँ:- Difficulties faced during Terraforming of Venus.

दोस्तों हमने इस लेख के ऊपर के हिस्से में शुक्र की Terraforming कैसे किया जा सकता है , उसके बारे में जाना| अब बारी है चुनोतियों की | हाँ ! अपने सही सुना| शुक्र की Terraforming काफी सारे चुनोतियों से भरा हुआ है| तो चलिये थोड़ी नजर इन चुनोतियों पर भी डालते है|

  • पहला चुनौती है शुक्र का वायुमंडल | यह बहुत ही ज्यादा गरम है| इसको रहने लायक बनाने के लिए सबसे पहले हमें इसको काफी ठंडा करना पड़ेगा| बिना ठंडा किया इतनी ज्यादा गरम जगह पर पृथ्वी का कोई भी प्राणी जीवित नहीं बचेगा|
  • तो , दूसरा चुनौती है , शुक्र को ठंडा करने के लिए जरूरत की ऊर्जा और उपकरणों की बंदोबस्त | शुक्र लगभग एक पृथ्वी की आकार का ही ग्रह है| इतने बड़े ग्रह को अगर पूरे तरीके से ठंडा करेंगे तो हमें बहुत सारी उपकरण और ताकत की जरूरत पड़ेगी|
  • तीसरी चुनौती है आवश्यक महाकाश यानों की कमी| 1972 की Apollo 17 के आखिरी mission के बाद अब तक कोई ही मनुष्य पृथ्वी के वातावरण से बाहर नहीं गया है| इसके अलावा हम सिर्फ हमारे उप-ग्रह तक ही जा पाएँ है| इसलिए शुक्र जैसी अंजान ग्रह में ऐसे सीधे सीधे चले जाना बहुत सारे जोखिम को न्योता देने के समान होगा| इसके लिए हमारे पास महाकाश यान भी नहीं है|
  • चौथी शुक्र की अपने अक्ष पथ की गति काफी ज्यादा धीमी है| इसको अगर हमें रहने के उपयोगी बनाना है तो पहले इसकी इस गति को बढ़ाना होगा जो की अपने आप ही काफी ज्यादा बड़ा काम है|

पाँचवीं और सबसे बड़ी चुनौती है एक power full propulsion करने वाला इंजन का अभाव| शुक्र हमसे कम से कम 162 million km दूरी पर है जो की समय के चलते बदलता रहता है| इसी कारण से हमें एक शक्तिशाली इंजन की जरूरत निश्चित रूप से पड़ेगी|

अन्य ग्रहों मे Terraforming:- Terraforming in other planets.

दोस्तों शुक्र के अलावा वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के बाकी ग्रहों पर भी सोध करके उमसे जीवन के नए स्वरूप के लाने के लिए कई सारे थिओरि प्रदान किए हैं| हमने इस लेख में पहले से ही बता रखा है की शुक्र के अगर कोई दूसरा ग्रह है जो की Terraforming के लिए उपयोगी है तो वह है मंगल ग्रह| थोड़ा मंगल वह ग्रह है जैसे पृथ्वी के बाद सबसे ज्यादा सोध किया गया है| इसलिए थोड़ा चलिये हम इस मंगल ग्रह पर भी नजर डाल देते हैं|

मंगल की Terraforming :- Terraforming of Mars.

वैसे शुक्र की Terraforming करना जितना मुश्किल है उतना आसान है मंगल में Terraforming करना| हमारे पास वर्तमान का जो तकनीक है उससे किसी भी ग्रह को ठंडा तो उतनी आसानी से नहीं कर सकते हैं पर किसी को आसानी से गरम कर सकते हैं|

Terraforming Of Mars In Hindi
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शुक्र के Terraforming से  विपरीत मंगल के Terraforming के लिए हमें मंगल को गरम करना पड़ेगा क्योंकि मंगल के दोनों मेरु में बर्फ के रूप में पानी मौजूद है| जब ग्रह की तापमान बढ़ेगा तो यह पिघल कर तरल पानी के रूप में प्रवाहित होंगी|  इस प्रक्रिया को सटीक बनाने के लिए हम मंगल पर छोड़े गए Curiosity Rover के तथ्यों का भी सहारा ले सकते हैं|

मंगल पर Terraforming के लिए मुख्य रूप से तीन बातों का ध्यान रखना पड़ेगा|

  • Magnetosphere का निर्माण करना|
  • वायुमंडल का निर्माण|
  • तापमान में बुद्धि|

पहला थ्योरी:- First Theory

मंगल की Terraforming के लिए दिया गया एक थ्योरी के हिसाब से मंगल पर सबसे पहले अमोनिया ( NH3 ) और मीथेन  ( CH4 ) जैसे ग्रीन हाउस गैस का इस्तेमाल किया जाएगा| आप तो जानते ही होंगे यह सब गैस पृथ्वी के तापमान में किस तरीके से बदलाव लाये हैं| इसलिए इसमें कोई संदेह की बात नहीं की यह गैस नाकाम होंगे| पर हाँ यह सब गैस बहुत ज्यादा unstable हैं| इन सभी के आणविक संरचना कुछ इस तरीके से है की यह ज्यादा देर तक मंगल के वायु मंडल में टिक नहीं पाएंगे| इस लिए यह थिओरि बाद में कार गार साबित नहीं हुआ|

दूसरी थ्योरी:-    Second Theory

यह थिओरि पहले थिओरि के समान है परंतु इसमें highly stable greenhouse gas Chlorofluorocarbon ( CFC ) का इस्तेमाल किया जाता है| इस को बाकी गैसों से मिलाकर मंगल पर छोड़ा जाएगा| इसी वजह से मंगल के सतह का तापमान बढ़ेगा|

जब तापमान रहने लायक हो जाए तब हम वहाँ पर जैविक किटाणुयों को प्रजनन के लिए छोड़ देंगे| यह किटाणुयों बहुत तेजी से अपना प्रजनन करते हुए मंगल पर मौजूद मौलिक पदार्थों को विघटित करके जीवन के लिए बहू उपयोगी organic molecule का निर्माण करेंगे| इन्हीं molecule से बाद में मंगल पर  रूप से पानी का बनना शुरू होगा|

Mars Terraforming In hindi
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एक बार पानी बनने के बाद बाकी का काम बहुत ही आसान हो जाएगा| जब पानी पूरे तरीके से मंगल पर मौजूद होगा तब हम वहाँ पर Moss को लगा कर कृत्रिम उपजाऊ मिट्टी भी बना सकते है| यहाँ गौर करने की बात यह है की वायुमंडल के लिए हमें अत्याधुनिक तकनीक से बनी यंत्रों पर ही रहना पड़ेगा क्योंकि मंगल पर कोई वायुमंडल ही नहीं है|

एक बार मिट्टी अच्छे से बन जाने के बाद हम उस पर पैड पौधे लगा कर कृत्रिम जंगल भी बना सकते हैं| खाने की सामग्रियों के लिए हम मंगल पर खेती भी कर सकते हैं|

मंगल की Terraforming के दौरान आने वाली चुनौतियाँ:- Difficulties in Terraforming of Mars.

दोस्तों पर यहाँ हम आपको बता देना चाहते हैं की , भले ही मंगल पर Terraforming करना शुक्र से आसान हो पर यह भी कम चुनौतियों से भरी नहीं है| मंगल की सतह काफी ज्यादा बंजर और शक्त है| इस ग्रह का एक हिस्सा काफी ज्यादा गरम तो दूसरा हिस्सा काफी ज्यादा ठंडा रहता है|

इसके अतिरिक्त मंगल की मेरु में जमी हुई बर्फ तक पहुँचने का रास्ता बहुत ही कठिन है| बड़े बड़े खाई और बीहड़ मैदानों से भरी हुई जगहों से गुजर कर इस जगह को पहुंचा जा सकता है| फिर हमारे पास मंगल पर जाने के लिए सही रूप से पोशाक भी नहीं है |

इस तरीके के बहुत सारे छोटे बड़े दिक्कत तो हमारे सामने हैं , पर Space X की हाल ही के योजना यों से पता चला है की मंगल पर जाने का ख्वाब बहुत जल्द ही पूरा होगा|  इसलिए हमें भी यह आशा है , हम जल्द से जल्द मंगल को अपना दूसरा घर बना पाएँ| खैर यह तो सिर्फ समय ही बताएगा|

दोस्तों  सौर मंडल में बाकी बचे जीतने भी ग्रह है उन से जीवन की उम्मीद करना ही बहुत बड़ी गलती होगी| बुध ग्रह सूर्य से अति निकट होने के वजह से वहाँ का तापमान जीवन के लिए ठीक नहीं है | बाकी बचे बृहस्पति जैसे gas giants , इन सभी में मौजूद खतरनाक  गैस किसी कीमत पर जीवन को पनप ने नहीं देगा|

यह तो था दूसरे ग्रहों का Terraforming के बारे में , अब थोड़ा चलिये हमारे पृथ्वी के ऊपर भी नजर डाल लेते है|

पृथ्वी की Terraforming:- Terraforming of  Earth.

दोस्तों आपने कभी इस बारे में सोचा है की , पृथ्वी में जब से मानव रहने को आया हैं तब से ले कर आज तक हमारी प्रकृति में कितने सारे बदलाव आया है| आपके जानकारी के लिए बता दें की पेड़-पौधों से ले कर इंसान तक हर किसी जीव में विकाश का धारा हमेशा से ही चलती आ रही है|

शुक्र की Terraforming और मंगल की Terraforming तो बात ठीक था पर अब यह Earth Terraforming क्या है? मित्रों अगर हम आपको इसका जवाब बता दें तो आप चौंक जाएंगे| आप को जान कर बहुत ही हैरानी होगी की पृथ्वी की Terraforming हर एक क्षण हो रही है|

यहाँ पर बनने वाला हर एक पुल , हर एक घर , हर एक बांध और हर एक कारख़ाना सब पृथ्वी के Terraforming का ही नतीजा है| हम लोग हमारे प्रकृति को बदलते ही जा रहे हैं| बिना किसी सोच विचार के हर एक प्राकृतिक संसदों का इस्तेमाल कर रहें हैं| कुछ लोग कहेंगे की विकाश के लिए यह सब करना ठीक है , परंतु Global Warming का क्या? क्या हम अपनी सुविधा के लिए हमारे प्रकृति की बलि ऐसे ही चढ़ा देंगे! विडंबना की बात यह है की पृथ्वी के Terraforming के वजह से जितना फायदा हमें हो रहा है उस से कई गुना नुकसान हमारा हो रहा है|

पृथ्वी की terraforming
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Credit:Nasa

तबाही का द्वार है पृथ्वी की Terraforming :- Way to disaster; earth Terraforming.

हाल ही में यूरोप के वैज्ञानिकों ने एक शोध के नतीजे के तौर पर पृथ्वी के बदलाव में कार्बन गैस की भूमिका को प्रमुख माना है| उसी शोध के हिसाब से इंग्लैंड , फ़्रांस और बाकी यूरोपियों देशों से कार्बन उत्सर्जन होने की मात्रा में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गयी है| यह बढ़ कर 10 billion tones तक पहुँच चुका है| अगर इसी तरीके से कार्बन की उत्सर्जन होता रहेगा तो पृथ्वी का तापमान इस सदी के अंत तक 2C तक बढ़ जाएगा जो की काफी ज्यादा होगा

कार्बन के बढ़ोतरी जैसे समस्या से ज़्यादातर विकशीत देश ग्रसित है | परंतु इसका यह मतलब नहीं है की इसमें भारत जैसे विकासशील देशों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है| पिछले सालों के मुकाबले हमारे देश में कार्बन की उत्सर्जन का मात्रा 4.6% तक बढ़ चुका है| यह एक आने वाली बहुत बड़ा खतरे की घंटी के समान है|

कैसे रोक पाएंगे Earth Terraforming को :-

इस खतरे से बचने के लिए हमें सबसे पहले ग्रीन हाउस गैस का उपयोग करना बंद करना होगा| इन गैसों में CFC , मीथेन , अमोनिया , कार्बन डाइ ऑक्साइड आदि प्रमुख है| इसको लेकर सारे विश्व के देशों के अंदर Paris agreement भी हुआ है| इस संधि के चलते हर एक देश अपने देश में होने वाली कार्बन तथा अन्य गैसों के उत्सर्जन में मात्रा में कमी लाएगी| परंतु यहाँ चौंकाने वाली बात यह है की , इस को ले कर विश्व के सारे देश एक-मत नहीं है| बहुत सारे देश इस संधि को मानते भी नहीं है| ऐसे में Earth Terraforming को रोकना संभव नहीं होगा| इसके रोकने के लिए हर एक देश को एक साथ काम करना होगा|

इसके अलावा हमें कृषि में इस्तेमाल किए जाने वाला कृत्रिम pesticide की मात्रा को भी कम करना पड़ेगा| यह सब pesticide में मौजूद heavy metal bio magnification की कारण बनते है| इसी कारण न बल्कि मिट्टी खराब होती है परंतु पानी का भी जैव-विविधता खराब होता है| इन सभी heavy metal का half-life पीरियड भी बहुत ज्यादा होती है| इसको कोई भी किटाणुयों विघटित नहीं कर सकता , जिससे यह लंबे समय तक मिट्टी को प्रदूषित करता रहता है| इसके अलावा कारखानों से निकलती पदार्थ पानी को बहुत ज्यादा प्रदूषित कर रहा है| इन सभी पदार्थों को पहले साफ किया जाना चाहिए और बाद में इसे पानी में छोड़ना चाहिए|

सारांश:-

पिछले दो शताब्दियों में तापमान 0.8C बढ़ चुका है और समंदर 0.1 इंच के हिसाब से अपना जल स्तर बढ़ाता जा रहा है| यह सब प्राकृतिक गतिविधियां होने के लिए तो बहुत ही ज्यादा समय लेते हैं परंतु जब यह कहर ढाते हैं तो इससे बचना मुश्किल हो जाता है | मित्रों हम अगर दूसरे ग्रहों में जीवन के संधान में उपयोग किए जाने वाले समय से थोड़ा सा भी समय अपने पृथ्वी के लिए निकाल कर इसको बचाने की कोशिश करें तो वाकई में हमारा पृथ्वी कितनी ज्यादा सुंदर दिखेगी|

वैसे तो शुक्र और मंगल पर Terraforming का सपना साकार तो एक ना एक दिन हो कर रहेगा| क्योंकि हमारी तकनीक दिन व दिन बहुत ज्यादा उन्नत होती जा रही है|

हम ने हाल ही में Black Hole की फोटो लेने में सफल हुए है , जो की अपने आप में ही एक अभूतपूर्व सफलता है| तो दोस्तों लेख के आखिर में आपको इतना ही बताना चाहते हैं की शुक्र में Terraforming तो अभी हो पाना मुश्किल है , पर मंगल को हम जल्द ही बदलने वाले हैं|

NASA का 2020 में आने वाला mars exploration mission मंगल में जीवन के संधान में किए गए अब तक के सभी शोध और mission में और एक नया पन्ना जोड़ देगा| यह mission मंगल के Jezero Crater से शुरू होगा और अति कम 668 sols का अपना यात्रा पूरा करके इस मिशन को पूर्ण विराम दिया जाएगा|

दोस्तों आपको यह लेख कैसा लगा comment कर के जरूर कहिएगा और हमेशा याद रखिएगा :-

   ” दुनिया को बचाना है, पृथ्वी ही हमारा एक मात्र ठिकाना है”।

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