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जानिए भारतीय महिलाओं के अनुसार, पुरुषों की सुंदरता क्या होती है?

Human Psychology In Hindi

Human Psychology In Hindi – स्त्री और पुरुष दोनों प्रकृति के द्वारा बनाये गये एक दूसरे के पूरक हैं, स्त्री के बिना पुरुष अधूरा है तो वैसे ही स्त्री बिना पुरुष के अधूरी है। हमारे संस्कारों में हमे स्त्री और पुरुष दोनों को बिना किसी भेदभाव के आदर देना सिखाया गया है। पर समय कितना भी आगे चलता रहे स्त्री और पुरुष में हमेशा बहस होती ही रहती है, कोई भी आजतक किसी को पूरा समझ नहीं सका है। स्त्रियों हमेशा सभी लड़को को कई बार एक समान मान लेती हैं तो ऐसा ही पुरुष भी कई बार सोचते हैं, पर सच्चाई हमेशा अलग ही नजरिया रखती है।

इस लेख में हम बात करने वाले हैं भारतीय महिलाओं की जिनके अनुसार पुरुषों की सुंदरता और उनके व्यक्तित्व उन्हें कैसे लगते हैं और वे उनके बारे में कैसे सोचती हैं। आईये जानते हैं इसके बारे में क्योरा की प्रसिद्ध हिन्दी लेखिका दिव्या चौधरी की कलम से…

महिलाओं के अनुसार पुरुषों में सुन्दरता उनके रूप से ज्यादा उनके व्यक्तित्व की देन होती है। रूप, यौवन, चेहरे की सुन्दरता, सिक्स-पैक एब्स, आकर्षक जॉव-लाइन, ये सब अस्थायी है और ऐसी कोई चीज़ जो कल नहीं रहेगी उसे सुन्दरता का मानक मानना सही नहीं है।

तो फिर क्या है वो, जो एक महिला की नज़र में पुरुष की सुन्दरता परिभाषित करता है? लिस्ट बहुत लम्बी है, आराम से पॉपकॉर्न लेकर बैठिये और आनंद लीजिये।

पुरुषों को सुन्दर बनाता है:

उनका अपने परिवार की परवाह करना। भले ही कोई बीमार हो, परेशान हो या बस यूँ ही।

उनका किसी उद्देश्य के लिए निष्ठां और लगन से कार्य करना। उनके व्यवसाय की बात हो या उसके बाद किया गया उनका जीवों के अधिकारों के लिए स्वयंसेवा का काम।

उनकी बेहद कूल हॉबी या कोई भी चीज़ जिसके लिए उनमे जूनून हो। आइस फिशिंग, ट्रैकिंग, एक के बाद एक FRIENDS के एपिसोड्स देखना, संगीत वाद्ययंत्र बजाना या उनका गाना-भले ही वो बेसुरे हो।

उनका बिंदास अपनी बात कहना, चाहे वो उनके विचार हो या अपनी भावनाओं को व्यक्त करना हो। उनका दिल खोल के तरीफ करना या ये बताना की वो आपसे क्या उम्मीदे रखते है।

उनकी हँसी और दूसरों को हँसाने की कला, और उस दिशा में की गयी उनकी नाकाम कोशिशे भी।

उनका अपनी गलती स्वीकार कर लेना, चाहे वो समय पर ना आ पाने की गलती हो या झूठ बोलने की या ख़राब खाना बनाने की।

उनका बुद्धिमान होना। घबराइए मत, मैं यहाँ पर PhD की बात नहीं कर रही।
किसी भी विषय में, जिनमे उनकी रूचि हो, उस पर अपनी खुद की राय होना एक व्यक्ति को सुन्दर बनाता है। मुझे व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और उनकी चर्चा करना बेहद पसंद है, लेकिन उन्हें इतिहास या क्रिकेट का ज्ञान भी हो, तो कोई परेशानी वाली बात नहीं है।

उनका कच्चापन(vulnerability), जब वो अपना “मैं पुरुष हूँ” का मुखौटा उतार के, बस एक इंसान की तरह अपने दुःख और भेद्यता हमे दिखाते है, ये उन्हें सुन्दर बनाता है।

उनका शिष्टाचार, वो औरों से कैसे बात और व्यवहार करते है।ख़ास तौर पर उन लोगों से, जिनसे उन्हें कोई फायदा नहीं मिलने वाला।

उनका खुद को बेहतर बनाने का रवैया, चाहे वो विचारों से सम्बंधित हो या कुछ नया सीखने का उनका जज़्बा।

उनका हमे हमारे सपनों के लिए प्रेरित करना, और जब भी कोई चुनौतीपूर्ण स्थिति आये, हमारे साथ हमारा हौसला बनकर खड़े रहना।

उनका हमे हम जैसे है, वैसे ही स्वीकार करना। महिलाओं को हर दिन आत्म-संदेह का सामना करना पड़ता है, और ऐसे में जब कोई उन्हें उनकी अच्छाई और बुराई दोनों के साथ स्वीकार करता है, तो इससे ज्यादा सुन्दर चीज़ और कुछ नहीं हो सकती। इसके लिए उन्हें कभी झूठ बोलना पड़े कि हम पतले दिख रहे है, तो वो भी बोलना चाहिए।

और सबसे बड़ी बात, जो उन्हें हमारी नज़रों में सुन्दर बनाती है वो है उनका उत्तम (perfect) ना होना
उनकी अपनी खामियां हैं और वह हमेशा सही नहीं होते। यही बात उन्हें हमारे स्वप्न से निकाल के हमारी वास्तविकता बनाती है।

अनुलेख: इस उत्तर पर केवल महिलाएं सुझाव दे सकती है, पुरुषों को केवल प्रशंसा करने की आज़ादी है।

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Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान, सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।

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