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नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर दो आश्चर्यजनक सौर ग्रहणों को कैप्चर किया

Solar Eclipses On Mars

Solar Eclipses On Mars – सौर ग्रहण निश्चित तौर पर देखने में बहुत बढ़िया लगते हैं, वैज्ञानिक दृष्टि से तो इनका महत्व केवल अनुसंधान और कुछ गुणों को जानने के लिए होता है पर धार्मिक दृष्टि से देखा जाये तो सूर्य ग्रहण का अपना अलग महत्व है।

हम कई सालों से मानते आये हैं कि केवल पृथ्वी पर ही सूर्य ग्रहण होता है पर अब वैज्ञानिकों ने नासा के क्यूरियोसिटी रोवर के द्वारा इस घटना को मंगल ग्रह पर भी देखा और केप्चर किया है। जिससे अब सौर ग्रहण की पूरी धारणा ही बदल जाती है।

नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने वर्तमान में लाल ग्रह (मंगल)  पर कब्जा कर लिया है , जिसने पिछले महीने सूर्य के सामने से गुजरते हुए मंगल के चंद्रमाओं, फोबोस और डीमोस दोनों के रूप में एक नहीं बल्कि दो ग्रहणों को होता हुआ देखा था। 

मार्स यानि मंगल ग्रह पर 2012 में जब ये रोवर उतरा था तो ये अपने साथ  NASA’s Jet Propulsion Laboratory (JPL) के द्वारा बनाया गया एक यंत्र भी ले गया था जिसे नासा ने सूर्य ग्रहण को देखने और उसे केप्चर करने के लिए डिजाइन किया था। इस यंत्र को नासा ने MastCam (मास्टकैम) का नाम दिया जिसका केवल काम मंगल से सूर्य की ओर देखना था।

डीमोस का पारगमन Deimos Transit

17 मार्च को, या मिशन के सोल 2,350 (एक मार्टियन दिवस, या सोल, 24 घंटे और 37 मिनट का होता है), क्यूरियोसिटी का मास्टकैम मंगल के सबसे छोटा चंद्रमा डीमोस को सूर्य के सामने से गुजरता हुआ देखता है। आपको बता दें कि डीमोस केवल एक छोटा चंद्रमा है, जो एक गांठ के आकार का है, और एक चंद्रमा की तुलना में ये एक क्षुद्रग्रह(उल्का) जैसा दिखता है। वास्तव में मंगल का ये चंद्रमा केवल 2.3 किमी के व्यास का है जो सूर्य ग्रहण के लिहाज से मंगल को अपनी परछाई से ढक़ नहीं पाता और गुजरता (ट्रासिंट)  हुआ दिखाई देता है।

हालांकि डीमोस चांद का आकार बहुत छोटा है पर ये फिर भी वैज्ञानिकों के लिए बहुत उपयोगी है, इसके मंगल से गुजरने या कहें  transit (पारगमन) से वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि यें चंद्रमा उनकी पहले से ज्ञात दूरी से 40 किलोमीटर पीछे है।

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डीमोस पारगमन। यहाँ चित्र 10. नासा / JPL-Caltech / MSSS के कारक द्वारा तैयार किए गए हैं

फोबोस द्वारा मंगल पर सूर्य ग्रहण

26 मार्च को इसके बाद Curiosity रोवर मार्स ग्रह के दूसरे बड़ा चंद्रमा फोबोस को भी कैप्चर करता है, ये चंद्रमा आकार में डीमोस से काफी बड़ा है जिस कारण इसे उसका बड़ा भाई भी कहा जाता है। फोबोस कई मायनों में डेमोस की तुलना में बहुत अधिक नाटकीय है। यह बड़ा है, 11.5 किलोमीटर (7 मील) की दूरी पर है, और मंगल ग्रह से 6,000 किलोमीटर (3,700 मील) दूर एक दिन में तीन बार परिक्रमा करता है। ये पूरे सौर मंडल में किसी ग्रह का ऐसा चांद है जो इतनी पास से अपने ग्रह की परिक्रमा करता है। 

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फोबोस, डीमोस का बड़ा भाई। यहाँ चित्र 10. नासा / JPL-Caltech / MSSS के कारक द्वारा तैयार किए गए हैं

वास्तव में, फोबोस प्रत्येक 100 वर्षों में मंगल के करीब 1.8 मीटर (6 फीट) की दर से मंगल की ओर आ रहा है। इस दर पर, यह मंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो जाएगा या लगभग 50 मिलियन वर्षों (5 करोड़ साल) में एक अंगूठी के आकार के होकर के बिखर कर खत्म हो जायेगा। 

क्यूरियोसिटी रोवर और इससे पहले के मंगल पर भेजे गये रोवरों ने भी इस तरह 40 बार फोबोस  के द्वारा हुए मंगल पर सूर्य ग्रहण को देखा है और डीमोस द्वारा हुए  पारगमन (Transit) को आठ बार रिकोर्ड किया है।

 

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Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान, सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।

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