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क्या है स्टीफन हॉकिंग द्वारा समय यात्रा का सिद्धांत?

क्या समय में भूत में और भविष्य में यात्रा करना संभव है!

Stephan Hawking and Einstein Time Travel Theory In Hindi –   यानि की वर्तमान समय के आगे और पीछे के समय में जाकर के यात्रा करना, यह सुनने में तो अच्छा लगता है पर जब इसे गहराई से सोचा जाता है तो हमारा दिमाग चकरा जाता है। समय यात्रा फिल्मों में हमें काफी मजेदार लगती है पर इसके सिद्धांत और पहलु हमें रहस्य में डाल देते हैं।

वैज्ञानिक द्रस्टी से देखा जाए तो समय यात्रा संभव है अगर देखा जाए तो हम सभी समय में यात्रा कर रहे हैं हम सभी भूतकाल से निकल कर वर्तमान में होते हुए लगातार भविष्य की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं और इसी को ही समय यात्रा कहते हैं और हमारी समय में यात्रा की दर 1 घंटे प्रति घंटे की दर से है।

यानी की हमें भविष्य में 1 घंटा आगे जाने के लिए 1 घंटे का ही समय अंतराल लगेगा ! लेकिन क्या Time Travel की दर को एक घंटे प्रति घंटे की दर से भी ज्यादा तेज किया जा सकता है?

तो क्या हम छोटे से समय अंतराल में ही भविष्य में आगे जा सकते हैं? जवाब है हाँ, हम छोटे से समय अंतराल में हजारों साल का सफर तय कर सकते हैं ।

आइंस्टीन का सापेक्षतावाद का सिध्दांत

जब अल्बर्ट आइंस्टीन ने थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी यानी सापेक्षतावाद का सिध्दांत प्रकाशित किया तो उसी सिध्दांत के आधार पर टाइम ट्रेवल की कल्पना की जाने लगी।

आइंस्टीन के थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी सिध्दांत के प्रकाशित होने से पहले लोगों में केवल एक ही अवधारणा थी कि ब्रह्माण्ड में समय की गति हर जगह वही है जो पृथ्वी पर होती है ।

उनका मानना था की समय जिस रफ़्तार से पृथ्वी पर गुजर रहा है उसी प्रकार ब्रह्माण्ड में दूर कही किसी दूसरे ग्रह पर भी समय इसी रफ़्तार से गुजर रहा होगा ! लेकिन आइंस्टीन ने लोगों की इस अवधारणा को गलत साबित कर समय की  एक अलग परिभाषा दी।

स्पेसटाइम क्या है? What is SpaceTime 

(The Time Travel Theory) 

अल्बर्ट आइंस्टीन ने बताया कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से जुड़े हुए हैं ! जिसे SpaceTime कहते हैं ! समय एक 4th डायमेंशन यानी चौथा आयाम है और समय की गति को धीमा या तेज किया जा सकता है.

ब्रह्माण्ड में समय एक नदी की तरह चल रहा है जिस तरह नदी में कहीं पर पानी की रफ़्तार तेज होती है तो कहीं धीमी उसी प्रकार ब्रह्माण्ड में समय अलग अलग जगहों पर अलग अलग गति से चल रहा है !

आइंस्टीन के द्वारा थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी सिध्दांत में दिए स्पेस टाइम की समीकरण से ही समय यात्रा सम्भव है। आइंस्टीन की स्पेस टाइम की समीकरण के अनुसार अगर कोई वस्तु जितनी तेज चलेगी तो उसके लिए समय धीमा हो जाएगा और उस वस्तु की गति जितनी बढ़ती जायेगी तो उसके लिए समय उतना ही धीमा होता चला जाएगा।

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प्रकाश की रफ्तार पर ही समय यात्रा संभव है! –  Time Travel Theory 

जब आप तेज रफ़्तार से चलने वाली रेलगाड़ी या हवाई जहाज में सफर करते हो तो आपके लिए समय बाहरी दुनिया के अपेक्षा धीमा हो जाएगा और जब आप अपनी यात्रा के बाद उस ट्रैन या हवाई जहाज से बाहर निकलोगे तो आप भविष्य में पहुँच चुके होंगे।

हालांकि इतनी काम रफ़्तार से चलने की वजह से आप भविष्य में एक सेकंड के करोड़वें हिस्से जितना आगे पहुँच पाओगे।

समय का यह अंतर बहुत ही मामूली है समय के इस अंतर को महसूस करने के लिए आपकी रफ़्तार प्रकाश की रफ़्तार के बराबर या 95% तक होनी चाहिए।

Stephan Hawking Time Travel Theory In Hindi
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टाइम ट्रैवल(Time Travel) और रेलेव ट्रैक

बिगबैंग सिध्दांत और ब्लैक होल जैसी अवधारणाओं को समझाने वाले स्टीफन हौकिंग ने टाइम ट्रेवल के लिए एक ऐसे रेलवे ट्रैक की कल्पना की जो पृथ्वी के चारों ओर बना हो और उस ट्रैक पर चलने वाली ट्रैन की स्पीड प्रकाश की गति के बराबर हो।

जब वो ट्रैन पृथ्वी के चरों ओर बने ट्रैक पर प्रकाश की गति से चलेगी तो ट्रैन में बैठे यात्रियों के लिए समय धीमा हो जाएगा इतना धीमा कि उनकी तुलना में पृथ्वी पर गुजरता हुआ जीवन तेजी से नजर आएगा इतना तेज कि ट्रैन के पल यहां के महीनों में बदल जाएंगे।

हालांकि ट्रैन में बैठे यात्रियों को ट्रैन के अंदर का समय सामान्य की तरह ही महसूस होगा लेकिन बाहरी दुनिया की तुलना में ट्रैन के अंदर का समय बहुत धीमा हो चूका होगा।

जब ट्रैन में बैठे यात्रियों के हिसाब से ट्रैन एक हफ्ते के बाद रुकेगी तो यात्रियों के एक हफ्ते के सफर में पृथ्वी पर 65 साल गुजर जाएंगे और वो यात्री खुद को भविष्य में पाएंगे और उन यात्रियों के लड़के उनसे ज्यादा बूढ़े हो चुके होंगे।

क्या भविष्य में ही समय यात्रा संभव है? – The Time Travel Theory and Future 

आइंस्टीन की स्पेस टाइम समीकरण के अनुसार केवल भविष्य में ही समय यात्रा संभव है यानी एक बार भविष्य में पहुँच गए तो पीछे वापस नहीं आ सकते ! मतलब One way Ticket to the Future.

अब यहां पर एक सवाल सामने आता है कि क्या प्रकाश की गति से चलने वाली ट्रैन बना पाना संभव है?  हमारी अभी की तकनीक के हिसाब से जवाब शायद निराशा जनक हो सकता है।

अभी ऐसी ट्रैन बनाना संभव नहीं है क्योंकि आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी के अनुसार अगर किसी वस्तु की स्पीड बढ़ती जायेगी तो उसका द्रव्यमान भी बढ़ता जाएगा।

प्रकाश की गति के लिए चाहिए अंनत ऊर्जा – The Infinite Energy For Time Travel

मान लीजिये कि हमने ऐसी ट्रैन बना ली जो प्रकाश की गति से चल सकती है जब ये ट्रैन प्रकाश की गति से चलेगी तो इसका द्रव्यमान अनंत हो जाएगा । और आइंस्टीन के द्वारा दिए गए समीकरण E = mc^2 से अनंत द्रव्यमान वाली ट्रैन को चलाने के लिए अनंत ऊर्जा की ही जरुरत पड़ेगी।

यह भी जानें – जानिए क्या है स्ट्रिंग थ्योरी ? क्या कहता है विज्ञान – String Theory Explained in Hindi

इतनी ऊर्जा तो हमारी पूरी गैलेक्सी में भी नहीं है अगर हम पूरे ब्रह्माण्ड की ऊर्जा को उस ट्रैन में भर दें तब शायद वो ट्रैन प्रकाश की गति से चले।

अगर हम उस ट्रैन को प्रकाश की गति के 90 या 95% तक चलाएं तब शायद उस ट्रैन को इतनी स्पीड पर चलाने में हमारी सम्पूर्ण गैलेक्सी की ऊर्जा चाहिए।

अब यहां पर एक सवाल सामने आता है की प्रकाश की गति से चलने वाली वाली ट्रैन बनाना संभव नहीं है तो क्या हमारी समय यात्रा ( time travel ) की कल्पना यहीं ख़त्म हो जाती है। मेरा मानना है नहीं, इस सिध्दांत के अलावा भी कई और सिध्दांत हैं जिनके द्वारा समय यात्रा सम्भव है।

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यह संभावित आर्टिकल हमने techandmyths.com से लिया है, समय यात्रा के इस सिद्धांत (Time Travel Theory)  पर गहराई पर विचार करें तो आप लोगों को भी लगेगा कि विज्ञान वास्तव में जैसा दिखता है वैसा है नहीं।  पर फिर भी आप अपने मन की कल्पना को दौड़ा सकते हैं और समय में एक काल्पिनक यात्रा तो कर ही सकते हैं।

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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