पृथ्वी के अलावा इस ब्रह्मांड में हमारे पास कोई दूसरा घर नहीं है। परंतु मित्रों क्या आप जानते हैं, हम ये भी नहीं कह सकते हैं की, इंसान ही इस पूरे ब्रह्मांड में अकेला है। जब तक किसी वस्तू के अस्तित्व के बारे में कोई प्रमाण नहीं मिलता है, तब तक उसकी सच्चाई के बारे में कई अनुमान लगाना लगभग निरर्थक ही है। आए दिन वैज्ञानिक अन्तरिक्ष में कई मिशनों को अंजाम देते रहते हैं, जिसमें वे लोग परग्रहिओं (TOI-700’s Exoplanets In Hindi) के बारे में पता लगाने का प्रयास करते हैं। परंतु उसमें अभी तक कोई संतोष-जनक सफलता हमें नहीं मिली है।
ऐसे में आप लोगों को इंटरनेट पर परग्रहिओं (TOI-700’s Exoplanets In Hindi) से जुड़े बहुत से आर्टिकल्स पढ़ने को मिलते रहते हैं। इस विषय से जुड़ी एक खास बात ये भी है कि, हम लोग अकसर सोचते हैं कि, पृथ्वी के जैसा दूसरा ग्रह इस अन्तरिक्ष में ढूँढना लगभग असंभव है। क्योंकि अभी तक ये ही सिर्फ एक ग्रह है, जिसके ऊपर जीवन फल-फुल रहा है। इसके अलावा शायद ही कोई ग्रह अभी होगा जो कि जीवन को अपने ऊपर संभालने का साहस करेगा।
खैर आज के लेख में हम एक ऐसे ग्रह की चर्चा करने जा रहें हैं, जो शायद पृथ्वी के जैसा ही हैं। कहने का मतलब ये हैं कि, इस ग्रह के ऊपर भी कोई दूसरी परग्रही सभ्यता या यूं कहें कि कोई दूसरी इंसानी सभ्यता भी रह रही होगी।
एलियंस का नया घर “TOI-700”! – TOI-700’s Exoplanets In Hindi :-
अकसर ये माना जाता रहा हैं कि, रेड द्वार्फ स्टार (Red Dwarf Star) पूरे तरीके से जीवन के फलने-फूलने के लिए अनुपयोगी होते हैं। परंतु क्या आप जानते हैं, TOI-700 (TOI-700’s Exoplanets In Hindi) नाम के सितारे के पास दो ऐसे एक्सो-प्लैनेट्स (Exo-Planets) अन्तरिक्ष में मौजूद जो कि एक अपवाद है। माने एक विशेष तरह का तारा जिसके पास पृथ्वी के जैसे ही दो रहने लायक ग्रह मौजूद हैं। मित्रों! इसलिए आज इसके ऊपर वैज्ञानिक इतना ध्यान दे रहें हैं।
मित्रों! असल में बात ये है कि, NASA ने अपने “Transiting Exoplanets Survey Satellite” (TESS) के माध्यम से TOI-700 e नाम के एक ऐसे ग्रह को ढूंढ लिया है, जो कि उसके सूर्य के हैबीटेबल जोन के अंदर आ रहा है। हैबिटेबल जोन वो जगह होती है, जहां किसी ग्रह के ऊपर पानी तरल अवस्था (Liquid State) में मौजूद रह सकता है। खैर यहाँ अगर हम TOI-700 e कि बात करें तो, ये ग्रह पृथ्वी के आकार का 95% जितना बड़ा और पथरीला है।
हालांकि! खास बात ये भी है कि, TOI-700 e से पहले भी वैज्ञानिकों ने TOI-700 a,b,c और d नाम के ग्रहों को ढूंढ लिया था, जिसमें से TOI-700 d भी हैबिटेबल जोन में आता था। हालांकि! TOI-700 e को ढूँढने के लिए वैज्ञानिकों ने और एक साल लिया। इस साल के अंदर उन्होंने TESS को इस्तेमाल कर के TOI-700 e के बारे में कई अहम जानकारी जुटाई थी। कई वैज्ञानिकों के अनुसार TOI-700 का सिस्टम बेहद ही खास है।
ये सिस्टम (सौर-मंडल) है बेहद ही खास! :-
मित्रों! आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि, TOI-700 एक ऐसा सौर-मण्डल है, जिसके ऊपर आज भी काफी ज्यादा रिसर्च करना बाकी हैं। कहने का मतलब ये हैं कि, हमें इस सौर-मण्डल के ऊपर काफी ज्यादा ध्यान देना होगा। क्योंकि इसके अंदर शायद कोई परग्रही सभ्यता भी रह रही होगी। ब्रह्मांड में जितने भी हैबिटेबल ग्रह मौजूद हैं, उन सभी के अंदर से TOI-700 e (TOI-700’s Exoplanets In Hindi) के ऊपर एलियन्स के होने कि संभावना सबसे ज्यादा अधिक है।
इसके बाद TOI-700 e ग्रह उसके नजदीक मौजूद ग्रह TOI-700 d ग्रह से मात्र 10% ही छोटा है। TESS के जरिये आज वैज्ञानिक काफी छोटे-छोटे ग्रहों के ऊपर भी जीवन के होने कि संभावनाओं को काफी बारीकी से विश्लेषण कर सकते हैं। खैर अगर हम इस सिस्टम के बारे में और भी ज्यादा बात करें तो, हमें पता चलेगा कि; TOI-700 नाम का सितारा हमसे लगभग 100 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद हैं, जो कि “Dorado” तारा-मण्डल के दक्षिणी छोर पर स्थित हैं। साल 2020 में वैज्ञानिकों को TOI-700d के बारे में पहली बार पता चला था। तब वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह का ओर्बिटल पीरियड लगभग 37 दिनों का था। इसके अलावा सौर-मंडल के अंदरूनी भाग में मौजूद TOI-700b ग्रह पृथ्वी के आकार के 90% जितना बड़ा था और इसका ओर्बिटल पीरियड लगभग 10 दिनों का था। TOI-700c ग्रह पृथ्वी से लगभग 1.25 गुना ज्यादा बड़ा था, जिसका ओर्बिटल पीरियड लगभग 16 दिनों का था।
बेहद ही खास हैं इस सौर-मंडल के ग्रह! :-
मित्रों TOI-700 (TOI-700’s Exoplanets In Hindi) सिस्टम/ सौर-मंडल अपने-आप में ही खास है। परंतु क्या आप जानते हैं, इस सिस्टम के अंदर मौजूद सारे ग्रह एक चीज़ में एक-समान ही है। जी हाँ मित्रों! आप लोगों ने बिलकुल सही सुना, इस सौर-मंडल के सारे ग्रह अपने सूर्य की और मुख कर के उसके चारों तरफ घूमते हैं। यानी प्रत्येक ग्रह का एक हिस्सा हर वक़्त उनके सूर्य के और ही रहता है, और दूसरा हिस्सा उससे एकदम उलट रहता है। इसके अलावा एक और रोचक बात ये भी हैं कि, इन ग्रहों के ऊपर वैज्ञानिकों को बादल नजर आए हैं। TESS ने एक दिन में लगभग 27 बार ग्रहों के ऊपर बादलों के हरकतों को रेकॉर्ड किया है।
इसके अलावा आप लोगों को बता दूँ कि, TESS जो हैं न दोस्तों; वो असल में एक्सो-प्लैनेट्स के ट्रैनजिशन के टाइम हो रहें रोशनी के तीव्रता के बदलावों को रेकॉर्ड कर लेता हैं। इससे वैज्ञानिकों को ये पता लग जाता हैं कि, वो ग्रह उसके सूर्य से कितना दूर हैं और उसका ओर्बिटल पाथ क्या हैं! साल 2018 से TESS के जरिये पृथ्वी के आकार के एक्सो-प्लैनेट्स को ढूँढने का प्रयास किया जा रहा है। पहली साल में इन्हें दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) के आकाश से ढूंढा गया बाद में उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) के आकाश में।
आखिर में वैज्ञानिक फिर से दक्षिणी गोलार्ध में आकर अन्तरिक्ष में इन एक्सो-प्लैनेट्स को ढूँढने का प्रयास करने लगे। मित्रों! यहाँ एक खास बात ये भी हैं कि, जब उन्होंने पहले से खोजे गए एक्सो-प्लैनेट्स के आकारों को दुबारा एक बार फिर जांचा तो, पता चला कि, उनका आकार पहले से 10% छोटा है।
निष्कर्ष – Conclusion :-
वैज्ञानिकों के अनुसार अगर TOI-700e ग्रह (TOI-700’s Exoplanets In Hindi) आकार में थोड़ा ज्यादा बड़ा होता या फिर उसके सूर्य के पास थोड़ा और नजदीक होता तो, वैज्ञानिकों को इसके बारे में काफी समय पहले ही पता लग जाता। हालांकि! ऐसा पहले साल में हो नहीं पाया। हाल ही में किए गए एक शोध से ये पता चला हैं कि, TOI-700 e ग्रह अपने सूर्य के चारों तरफ एक बार घूमने के लिए लगभग 28 दिनों का समय लेता हैं। इसके अलावा कुछ वैज्ञानिक ये भी कह रहें हैं कि, प्लैनेट c और d के अंदर जितनी भी जगह हैं; वो असल में जीवन के पनपने के लिए काफी ज्यादा अनुकूल हैं।
TOI-700 e के ऊपर वैज्ञानिकों को लगता हैं कि, वहाँ जरूर ही तरल पानी के स्रोत रहें होंगे। जिसके कारण वहाँ भी किसी युग में जीवन जरूर ही फला-फुला होगा। इसके अलावा मित्रों! मेँ आप लोगों को बता देना चाहता हूँ कि; पृथ्वी के जैसे ग्रहों के बारे में या दूसरे सौर-मण्डलों के बारे में जानकर हम न बल्कि उस सौर-मण्डल के बारे में जान पाएंगे बल्कि हम अपने सौर-मण्डल के अतीत के बारे में भी जान सकते हैं। वर्तमान कि बात करें तो, अभी वैज्ञानिक TOI-700 सिस्टम को और भी ज्यादा विश्लेषण करने में लगे हुए हैं।
दोनों ही ग्राउंड और स्पेस से कई सारे उपकरणों के माध्यम से इस सिस्टम के ऊपर काफी ज्यादा नजर रखा जा रहा हैं। हालांकि! एक्सो-प्लैनेट्स को ढूँढने का काम अभी-अभी शुरू ही हुआ हैं। अभी तो इसके काफी सफर करना बाकी है।