Physics

सुपरकंडक्टर का पूरा विज्ञान – All About Superconductor In Hindi

एक ऐसी चीज़ जो की हमारे स्मार्ट फोन के बैटरी को सिर्फ एक ही चार्ज में लगातार चला सकती हैं 1 महीने तक!

आज के इस विज्ञान युग में, इंसानों ने अपने बुद्धि-कौशल से कई कारनामों को करके दिखाया है। चिकित्सा हो या कृषि का क्षेत्र, हर एक जगह आपको इंसानों के द्वारा छोड़ी गई छाप जरूर ही मिलेंगे। वैसे ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि, इंसान ने खुद एक कृत्रिम पृथ्वी को ही बना लिया है। यानी विज्ञान से जुड़े आविष्कारों की लाइन इतनी लंबी है कि, इसके अंत तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल हो चुका है। खैर इन्हीं बड़े-बड़े आविष्कारों के अंदर एक नाम सुपरकंडक्टर” (superconductor in hindi) का भी आता है। वैसे बता दूँ कि, सुपरकंडक्टर के विषय में जानना एक तरह से विज्ञान के स्वर्णिम इतिहास के पन्नों को खंगालने के समान ही है।

सुपरकंडक्टर के बारे में पूरी जानकारी! - Superconductor In Hindi.
हवा में मंडराता हुआ सुपरकंडक्टर | Credit: You Tube.

तो, सवाल उठता है कि, आखिर ये सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) क्या चीज़ हैं? इससे इंसानों को क्या फायदा पहुँच रहा है और ये इतना ज्यादा क्यों महत्वपूर्ण हैं? मित्रों! इस तरह के कई सवाल मेरे भी मन में उमड़ रहे थे और इन सारे सवालों के जवाबों को जानना भी मेरे लिए ये एक व्याकुलता ही बन गई थी। तो, मित्रों! अगर आपको भी इन सारे सवालों के जवाबों का तलब हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़िएगा।

खैर अब प्रभु श्रीराम जी का नाम ले के इस लेख को शुरू करते हैं और सुपरकंडक्टर के बारे में हर एक बारीक बातों को समझते हैं।

सुपरकंडक्टर किसे कहते हैं? – What Is Superconductor In Hindi? :-

सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) के बारे में सबसे पहला सवाल आपका यहीं होगा कि, आखिर ये सुपरकंडक्टर किसे कहते हैं? (what is superconductor?) तो, चलिये मित्रों! पहले इसी सवाल के जवाब को जान लेते हैं।सुपरकंडक्टर एक ऐसी चीज़ है जो कि बिना किसी रुकाव/ प्रतिरोध (Resistance) के दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन को ट्रांस्फर करवा सकता है “। मित्रों! सरल भाषा में समझाऊँ तो, सुपरकंडक्टर एक साधारण कंडक्टर का विकसित रूप है, जहां पर इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण (Transfer Rate) काफी ज्यादा अधिक हो जाता है।

सुपरकंडक्टर के बारे में पूरी जानकारी! - Superconductor In Hindi.
सुपरकंडक्टर क्या हैं? | Credit: Phys Org.

ट्रांस्फर रेट काफी अधिक होने के कारण ट्रांस्फर होने के समय में किसी प्रकार कि ऊर्जा व्यर्थ नहीं जाती। यानी, सुपरकंडक्टर में अगर हम इलेक्ट्रिसिटी को ट्रांस्फर करवाएँ तो, ट्रांस्फर होते समय सुपरकंडक्टर से ताप, आवाज या अन्य किसी रूप में ऊर्जा बाहर परिवेश में निर्गत हो कर व्यर्थ नहीं जाएगी।  मित्रों! ये वो अवस्था हैं जहां कोई भी चीज़ अपनी क्रिटिकल टेंपरेचर” (Critical Temperature, Tc) को प्राप्त करती है। इसके अलावा आपके जानकारी के लिए बता दूँ कि, ये वो अवस्था होती हैं जहां चीज़ें अपनी सुपरकंडक्टिविटी” को भी प्राप्त कर लेती हैं।

फिर, यहाँ कुछ लोग ये भी कहने लगेंगे कि, अगर क्रिटिकल टेंपरेचर में कोई भी चीज़ अपनी सुपरकंडक्टिविटी को प्राप्त कर लेती है। तो कोई भी चीज़ फिर सुपरकंडक्टर में आसानी से तबदील हो जाती होंगी। परंतु, मित्रों! ये बात सत्य नहीं है। सुपरकंडक्टिविटी को प्राप्त करने के लिए चीजों को काफी लो-एनर्जी स्टेट में रहना पड़ेंगा। जिसका मतलब ये हुआ कि, इन चीजों का तापमान काफी कम होना चाहिए। इसी कारण से हर एक चीज़ सुपरकंडक्टर में परिवर्तित नहीं हो सकती है।

इंसानों ने सुपरकंडक्टर जैसी चीजों का आखिर कैसे आविष्कार कर लिया? :-

अन्य किसी महान खोजों कि तरह ही, सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) का खोज किसी गलती के कारण ही हुआ था। 1911 अप्रैल 8, ये वो तारीख था जब दुनिया को पहली बार सुपरकंडक्टर के बारे में पता चलने वाला था। इसी दिन पुर्तगाल के वैज्ञानिक “Heike Kamerlingh Onnes” मरक्युरि (Mercury) के गुणों के ऊपर रिसर्च कर रहे थे। अपने शोध के दौरान उन्होंने एक बहुत ही अजीब को देखा, जिसने आने वाले समय इतिहास ही रच डाला।

लिक्विड हीलियम की मदद से ओंस ने एक सॉलिड मरक्युरि  (Solid Mercury)के कोइल (Coil) को -268.95 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर डाला। सॉलिड मरक्युरि का कोइल जब ठंडा हो गया तब, ओंस को एक बहुत ही अजीब बात दिखी। मित्रों! -268.95 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर सॉलिड मरक्युरि के कोइल के अंदर किसी प्रकार का “प्रतिरोध” (Resistance) ही नहीं था। यानी, इस अवस्था में सॉलिड मरक्युरि कोइल के अंदर इलेक्ट्रॉन का ट्रांस्फर रेट (दो परमाणुओं के अंदर) 100% था, जो की एक बहुत ही बड़ी बात है।

बाद में ओंस ने इस विषय पर और अधिक शोध किया और पाता लगाया की, -266.15 डिग्री सेल्सियस पर सॉलिड मरक्युरि का कोइल इलेक्ट्रिक करंट को भी अपने अंदर से हो कर 100% बहने दे रहा है और वो भी बिना किसी रेसिस्टेंस के। बाद में ओंस ने इस खोज का नाम सुपरकंडक्टिविटी (Superconductivity)” दिया, जिसके लिए उनको साल 1913 में नोबल प्राइज़ भी मिला था। मित्रों! इसके बाद भी कई सारे खोजें सुपरकंडक्टर को लेकर हुईं।

सुपरकंडक्टर को लेकर कुछ महत्वपूर्ण खोजें! :-

1933 में दो जर्मन वैज्ञानिकों ने सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) को लेकर एक काफी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने अपने शोध में ये पाया कि, जब कोई भी चीज़ सुपरकंडक्टर में बदल जाती है तब वो मग्नेटिक फील्ड को भी विकर्षित करने लगती है। मित्रों! बाद में इसी खोज ने हमें एक बहुत ही खास चीज़ प्रदान की, जिसका उपयोग आजकल हम काफी ज्यादा करने लग रहें हैं। दोस्तों, इसी खोज के आधार पर ही हमने जेनेरेटर बनाया।

Meissner Effect.
मैसनर इफैक्ट का फोटो | Credit: Hyperphysics.

जी हाँ मित्रों! जब एक सुपरकंडक्टर के ऊपर से किसी एक चुंबक को गुजारा जाता है, तब इस प्रक्रिया के कारण काफी मात्रा में बिजली पैदा होती है। इसी कारण से आज इलेक्ट्रिक जेनेरेटर अपने अस्तित्व में आ पाया है। इसके अलावा कई बार सुपरकंडक्टर अपने पास मौजूद चुंबक को इतनी ज़ोर विकर्षित करता है कि, ये सुपरकंडक्टर के ऊपर मंडराने लगता है। दोस्तों, इसी घटना को आज लोग “Meissner effect” के नाम से भी जानते हैं। इसके अलावा सुपरकंडक्टर के ऊपर सबसे बड़ी खोज “IBM” ने की थी।

इस खोज में IBM के वैज्ञानिकों ने एक सिरामीक मटेरियल को सुपरकंडक्टर का दर्जा दिया था, जो की -243.15 डिग्री सेल्सियस में एक सुपरकंडक्टर बना था। हालांकि! इस खोज को पहले कई वैज्ञानिकों ने नकार दिया। क्योंकि, उस समय से पहले वैज्ञानिकों को ये लगता था कि, सिरामीक से बनी चीज़ें सिर्फ और सिर्फ इन्स्युलेटर ही हो सकते हैं। खैर बाद में ये सोच गलत साबित हुई।

सुपरकंडक्टर के प्रकार – Types Of Superconductor In Hindi :-

चलिये अभी एक नजर हम सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) के प्रकारों के ऊपर भी डाल लेते हैं, क्योंकि इनके बारे में जानने से हमें सुपरकंडक्टर और बेहतर ढंग से समझ में आ जाएगा। मुख्य रूप से सुपरकंडक्टर को भागों में बांटा गया हैं, जो कि हैटाइप 1″ और “टाइप 2″

  1. टाइप 1 सुपरकंडक्टर (Type 1 Superconductor) :-

हमारे रोज़मर्रा के जीवन में जो सुपरकंडक्टर इस्तेमाल होता है, वो इसी टाइप 1 के श्रेणी में आता है। सामान्य इलेक्ट्रिकल वाइरिंग से लेकर कम्प्युटर में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोचिप्स तक, हर जगह पर टाइप 1 सुपरकंडक्टर का बोल बाला है। वैसे वर्तमान के समय में टाइप 1 सुपरकंडक्टर का क्रिटिकल टेंपरेचर साधारण प्रेसर में 0.000325 °K and 7.8 °K  के बीच आता है। वैसे कुछ टाइप 1 प्रकार के सुपरकंडक्टर सुपरकंडक्टिविटी को प्राप्त करने के लिए बहुत ही ज्यादा प्रेसर कि मांग करते हैं।

सुपरकंडक्टर के बारे में पूरी जानकारी! - Superconductor In Hindi.
टाइप 1 सुपरकंडक्टर क्या होते हैं? | Credit: Quanta Magazine.

उदाहरण के लिए आप सल्फर को ही ले सकते हैं। ये सुपरकंडक्टिविटी को प्राप्त करने के लिए 93 लाख एटमोस्फेरिक प्रेसर और 17 केल्विन तापमान  का मांग करता है, जो कि बहुत-बहुत-बहुत ही ज्यादा है। इसके अलावा टाइप 1 सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) के अंदर मरक्युरि – 4.15 °K, लीड- 7.2 °K, अलमुनियम – 1.175 °K और जिंक – 0.85 °K जैसे पदार्थ भी आते हैं।

अगर हम पिरियोडिक टैबल को देखें तो, इस टैबल में मौजूद आधे से ज्यादा पदार्थ सुपरकंडक्टर के इसी श्रेणी में यानी टाइप 1 के अंदर आते हैं। तो, आप खुद सोच कर देखिये कि; इनका महत्व हमारे जीवन में कितना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

2. टाइप 2 सुपरकंडक्टर :-

सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) के इस श्रेणी में ज़्यादातर मैटल्स आते हैं। कॉपर और लीड  इस प्रकार के सुपरकंडक्टर के प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अलावा इनके बारे में खास बात ये भी हैं कि, टाइप 2 प्रकार के सुपरकंडक्टर टाइप 1 प्रकार के सुपरकंडक्टर के मुक़ाबले सुपरकंडक्टिविटी को प्राप्त करने के लिए काफी ज्यादा तापमान कि मांग करते हैं। हालांकि! इसके बारे में अभी तक वैज्ञानिकों को कुछ भी पता नहीं हैं।

Type 2 photo.
टाइप 2 सुपरकंडक्टर किसे कहते हैं? | Credit: Futurity Org.

इस प्रकार के सुपरकंडक्टर का क्रिटिकल टेंपरेचर लगभग 135 °K or -138 °C के आसपास ही होता है। इसके अलावा टाइप 2 प्रकार के सुपरकंडक्टर को सेरामिक सुपरकंडक्टर” के श्रेणी का दर्जा दिया जाता है। वैसे इसके अंदर 2 कॉपर और 3 ऑक्सिजन के परमाणु  होते हैं। टाइप 2 प्रकार के सुपरकंडक्टर ही सिर्फ ऐसे सुपरकंडक्टर होते हैं, जो कि किसी भी मैग्नेटिक क्षेत्र के अंदर घुस सकते हैं जो कि टाइप 1 प्रकार के सुपरकंडक्टर नहीं कर सकते हैं।

मित्रों! आप लोगों को इन दो प्रकार के सुपरकंडक्टर के बीच कौन से प्रकार का सुपरकंडक्टर ज्यादा अच्छा लगा। कमेंट कर के जरूर ही बताइएगा। इसके अलावा मेँ आप लोगों को बता दूँ कि, सुपरकंडक्टर हमारे जीवन में एक अहम किरदार निभा सकते हैं। जिसको कि अभी हम आगे देखेंगे।

सुपरकंडक्टर को कहाँ-कहाँ इस्तेमाल किया जाता हैं? :-

मित्रों! लेख के इस भाग में हम देखेंगे सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) को किस-किस जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

MRI machine Photo.
MRI मशीन का फोटो | Credit: Independent Image.

सुपरकंडक्टर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल “MRI” मशीन के अंदर होता है। एमआरआई मशीनों के अंदर लगने वाले सुपरकंडक्टर इतने ताकतबर होते हैं कि, ये आसानी के साथ काफी शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड के अंदर भी घुस जाते हैं। बिना सुपरकंडक्टर के शायद ही कोई एमआरआई मशीन आज बन पाती। मित्रों! आप लोगों को जान कर हैरानी होगी कि, एमआरआई मशीनों के अंदर लगी सुपरकंडक्टर अर्थ के मैग्नेटिक फील्ड के मुक़ाबले 2,500 से 10,000 गुना ज्यादा शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड के अंदर भी घुस सकता है।

इसके अलावा सुपरकंडक्टर को “Large Hadron Collider (LHC)” के अंदर भी इस्तेमाल किया जाता है। मित्रों! यकीन मानिए LHC के अंदर जिस सुपरकंडक्टर को इस्तेमाल किया जाता है, ये इतना ताकतबर होता है कि, ये आसानी से अर्थ के मैग्नेटिक फील्ड से 1,00,000 गुना ताकतबर मैग्नेटिक फील्ड के अंदर भी घुस सकता है।

सुपरकंडक्टर का भविष्य कैसा हो सकता है! :-

आज भी सुपरकंडक्टर (superconductor in hindi) के बारे में ऐसे बहुत सारी बाते हैं, जिनको की हमें आज जानना बाकी है। वर्तमान के समय में हम सुपरकंडक्टर को लेकर कई सारे चीज़ें बना रहें हैं। परंतु, वैज्ञानिकों का मानना हैं की, इन सुपरकंडक्टर को आने वाले समय में हम इलेक्ट्रिसिटी ट्रांस्फर करने के काम में ले सकते हैं। जिससे लगभग न के बराबर ही रेसिस्टन्स के साथ बिना किसी लॉस के ऊर्जा (बिजली) को एक से दूसरे जगह तक भेजा जा पाएगा।

Fastest Train Photo.
ऐसे ट्रेनों के ब्रेक सिस्टम में इस्तेमाल हो सकता हैं सुपरकंडक्टर | Credit: CNN.

इसके अलावा सुपरकंडक्टर को भविष्य में बहुत ही तेज से चलने वाली ट्रैंस के ब्रैकिंग सिस्टम में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। खैर अभी सिर्फ संभावनाएं बन रहीं हैं, आने वाले समय में हमें बहुत ही अद्भुत चीज़ें भी (ऐसा स्मार्टफोन जिसे महीने में एक बार ही सिर्फ चार्ज करना पड़ेगा) देखने को मिल सकती हैं।


Sources :- www.interestingengineering.com, www.uaf.edu.

Bineet Patel

मैं एक उत्साही लेखक हूँ, जिसे विज्ञान के सभी विषय पसंद है, पर मुझे जो खास पसंद है वो है अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान, इसके अलावा मुझे तथ्य और रहस्य उजागर करना भी पसंद है।

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