दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर अंकोरवाट मंदिर

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हिन्दू धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म माना जाता है, इस धर्म में मंदिरो का बड़ा महत्व होता है। मंदिरों को भगवान का घर माना जाता है औऱ लोग मंदिरों में जाकर अपने आराध्य देव की पूजा करते हैं।

विश्व में अलग-अलग धर्मों और संप्रदायों को मानने वाले लोग रहते हैं। सर्वोच्च सत्ता भले ही एक है लेकिन अलग-अलग मान्यताएं होने की वजह से सभी का पूजा करने का तरीका और स्थान भी अलग-अलग हैं। मसलन चर्च में जाकर ईसाइयों को अपने ईश्वर नजर आते हैं, वही ईश्वर हिन्दू मंदिर में भी मिलते हैं। मुसलमान मस्जिद जाकर अपने अल्लाह से मिलकर आता है तो सिख गुरुद्वारों की सीढ़ियों को स्वर्ग समझता है। जितने अलग लोग उतनी ही अलग उनकी आस्था।

कंबोडिया स्थित अंगकोर वाट के विषय में 13वीं शताब्दी में एक चीनी यात्री का कहना था कि इस मंदिर का निर्माण महज एक ही रात में किसी अलौकिक सत्ता के हाथ से हुआ था। यह सब तो इस महल रूपी मंदिर से जुड़ी लोक कहानियां हैं, असल में इस मंदिर का इतिहास बौद्ध और हिन्दू दोनों ही धर्मों से बहुत निकटता से जुड़ा है।

पूरे एशिया , ख़ास कर दक्षिण पूर्व एशिया में अपने समय का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल , ‪भगवान विष्णु‬ को समर्पित कम्बोडिया का अंगकोर मंदिर , जिसमें केवल भारत से ही नहीं बल्कि इस क्षेत्र में पड़ने वाले सभी देशों के तीर्थ यात्री पहुँचते थे , काल के प्रवाह में ऐसा अदृश्य हुआ कि उसका नाम ही लोग भूल गये । अंगकोर मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है।

इस मंदिर की सबसे बड़ी खास बात यह भी है कि यह विश्व का सबसे बड़ा विष्णु मंदिर भी है। इसकी दीवारें रामायण और महाभारत जैसे विस्तृत और पवित्र धर्मग्रंथों से जुड़ी कहानियां कहती हैं।

विश्व धरोहर के रूप से पहचाने जाने वाले इस मंदिर को 12 शताब्दी में खमेर वंश से जुड़े सूर्यवर्मन द्वितीय नामक हिन्दू शासक ने बनवाया था। लेकिन चौदहवीं शताब्दी तक आते-आते यहां बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों का शासन स्थापित हो गया और मंदिर को बौद्ध रूप दे दिया गया।

अधिक जानकारी के लिए आप यह वीडियो जरुर देखें इससे आप इन मंदिरो के रहस्य को आसानी से समझ सकते हैं, इस मंदिर की महानता और सुंदरता देखने के लायक ही है।

 

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