ये हैं जगन्नाथ रथयात्रा से जुड़े ये 10 रोचक तथ्य आपको जरुर जानने चाहिए

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हर वर्ष पूरी में बड़े ही धूमधाम से रथयात्रा पर्व मनाया जाता है, भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी में आरंभ होती है. यह रथयात्रा पुरी का मुख्य पर्व है. इसमें भाग लेने के लिए पुरे देश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचते है। इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को तीन अलग-अलग दिव्य रथों पर नगर भ्रमण कराया जाता है।

यह रथयात्रा मुख्य मंदिर से शुरू होकर दो किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर पर सम्पन्न होती है. जहां भगवान जगन्नाथ सात दिन तक विश्राम करते है. आषाढ़ शुक्ल दशमी को रथ यात्रा पुनः मुख्य मंदिर पहुँचती है.

इस रथ यात्रा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य जो आप नही शायद नही जानते होंगे.

1. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, व सुभद्रा के रथ नारियल की लकड़ी से बनाए जाते है क्योंकि ये लकड़ी हल्की होती है. भगवान जगन्नाथ के रथ का रंग लाल और पीला होता है और यह अन्य रथों से आकार में भी बड़ा होता है. यह यात्रा में बलभद्र और सुभद्रा के रथ के पीछे होता है।

2. भगवान जगन्नाथ के रथ के कई नाम हैं जैसे- गरुड़ध्वज, कपिध्वज, नंदीघोष आदि. इस रथ के सारथी का नाम दारुक है।

3. भगवान जगन्नाथ के रथ पर हनुमानजी और नृसिंह का प्रतिक चिन्ह होता है. यह स्तम्भ रथ की रक्षा का प्रतिक है।

4. भगवान जगन्नाथ के रथ के घोड़ों का नाम शंख, बलाहक, श्वेत एवं हरिदाशव है, इनका रंग सफ़ेद होता है. रथ के रक्षक पक्षीराज गरुड़ है।

5. रथ की ध्वजा यानि झंडा त्रिलोक्यवाहिनी कहलाता है. रथ को जिस रस्सी से खींचा जाता है, वह शंखचूड़ नाम से जानी जाती है।

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