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ये होगा जब आप अंतरिक्ष से सीधा पृथ्वी पर गिरेंगे | What If You Fell From Space To Earth ?

 

दोस्तों , हमारे वायुमंडल में  Karman Line, जो Earth, यानी हमारी पृथ्वी के Sea Level से 100 Km ऊपर बनी हुई एक Imaginary Boundary Line होती है , जिसे पार करने के बाद , आपको एक Space Traveler या Astronaut का दर्जा मिल जाएगा !

या Simple Words में कहूं , तो इस Line को पार करने के बाद , Technically , हमारे Space यानी अंतरिक्ष की शुरुआत होती है |

Other organisations,  like U.S. Military and NASA , Space की Starting के लिए Sea Level से Almost 80km ऊपर का ही Distance Set करती हैं , जिसे पार करने के बाद Space Missions की शुरुआत होती है |

Well ! ये तो एक छोटी सी जानकारी थी Space से Related जो काफी Important भी है | पर आज का हमारा Topic कुछ अलग है , क्योंकि आज हम सीधे , Space से पृथ्वी की ओर सैर करने वाले हैं यानी सीधा अंतरिक्ष से जमीन पर गिरने वाले हैं जहां हम,  इस सफ़र के दौरान होने वाली सभी घटनाओं और प्रभावों के बारे में पता लगाएँगे और जानेंगे कि आखिर ये सफ़र कैसा हो सकता है !

दुनिया की सबसे ऊंची छलांग 

October 24, 2014 को , Robert Alan Eustace ने Highest Free Fall Jump का World Record Set किया जहां उन्होंने पृथ्वी की लेयर Stratosphere से, पृथ्वी से लगभग 42 KM ऊपर से  अपने Helium Balloon से Jump लगाई , जो लगभग, साढ़े चार मिनट बाद समाप्त हुई |

बहराल दोस्तों ! इस दौरान, उन्होंने कई Precautions या सावधानियां ली थीं जैसे कि Pressure Suit वगेरा और Jump Height भी Space Height से काफी कम थी | पर अब सीधे बात करते हैं कि अगर ये Jump Height , Karman Line के बाद से शुरू होती या ये कहें कि अगर कोई Outer Space से पृथ्वी की तरफ बिना किसी सावधानी से Jump करे , तो उसके साथ भला क्या हो सकता है ?

अंतरिक्ष से गिरने पर शुरुआत में ये होगा

अंतरिक्ष का शुरूआती हिस्सा , Earth की Atmospheric layer , Thermosphere में आता है , जो पृथ्वी से 90km से लेकर 1000km ऊपर तक फैला हुआ है |

इस Thermosphere में , Air Density और Volume बेहद  कम होती है जिसकी वजह से यहाँ हमारे Brain में Constant Oxygen Flow न होने की वजह से Brain Cells अपना काम करना बंद कर देंगे और हो सकता है कि आप Hypoxia में चले जाएं , और इतनी ऊंची height से Jump के दौरान , आपकी Body भी काफी Speed में Spin यानी घूम सकती है जिसकी वजह से कुछ Seconds के बाद आपका Blood , Brain में काफी तेजी से जाने लगेगा जिसके कारण , Coma और Brain Death की संभावना भी बढ़ सकती है |

इसके साथ ही इस Thermosphere में , Temperature भी लगभग 500 से 2000 Degree Celsius तक जाता है जो काफी हद तक Sun यानी सूरज की X-ray and UV Radiation को Absorb कर लेता है , जो आपको Radiation Poisoning भी दे सकती हैं |

सबसे घातक परिणाम  

Well ! अब अगर आपकी किस्मत अच्छी रही , और आप इस Thermosphere Layer से बच भी गए , तो आने वाली Mesosphere Layer , आपके लिए बुरी खबर ला सकती है क्योंकि इस Layer में , जो पृथ्वी से 50 से 85 km ऊपर तक फैली हुई है , Temperature एकदम Change हो जाता है|

यहाँ तापमान  Minimum -100 Degree Celsius तक चला जाता है , जिसकी  वजह से आपको Frosbite यानी शीतदंश भी हो सकता है | इसके साथ ही , इस Layer में आपकी High Speed इतना Friction यानी घर्षण पैदा कर सकती है कि आपको Skinburn होना शुरू हो सकता है क्योंकि आमतौर पर इस Mesosphere लेयर में ही पृथ्वी की तरफ आने वाले Meteors अपनी High Speed की वजह से Vaporize हो जाते हैं जो अपने पीछे Dust और कई Metal Atoms छोड़ देते हैं |

और नीचे आने पर ये होगा

इसके बाद अगर आप और नीचे आएँगे , तो आप Atmospheric Layer,  Stratosphere में Enter करेंगे , जहां Air Density और Air Pressure काफी कम होता है जो पृथ्वी से 10 से 50 km ऊपर तक फैला हुआ है |

इस Layer में Air Pressure काफी हद तक Change होता रहता है , जिसकी वजह से Body में मौजूद कुछ Fluids Like , Saliva और Tears यानी आंसू काफी तेजी से Boil यानी उबलना शुरू हो सकते हैं | पर अगर अब भी आपकी साँसे बची हुई हैं , तो आपके लिए एक अच्छी खबर है , क्योंकि आने वाली Atmospheric Layer , आपके लिए कुछ राहत का एहसास दिला सकती है |

पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे Lowest यानी नीची Layer , Troposphere में , जो पृथ्वी से , Maximum 15 km ऊपर तक फैली हुई है , Oxygen की Concentration बाकी Layers के मुकाबले काफी ज्यादा होती है जिसकी वजह से आपको Consciousness यानी होश आने लगेगा |

और जैसे जैसे आप नीचे पृथ्वी की तरफ बढ़ने लगेंगे , Air Resistance की वजह से आप एक Terminal Velocity से एक Constant Speed से पृथ्वी पर गिरने लगेंगे जिसके बाद आपकी जिन्दगी, काफी हद तक किस्मत पर ही निर्भर करेगी क्योंकि कुछ Real cases में लोग , 6km और 10 km तक की Height से गिरने पर भी जिन्दा बच पाए हैं |

 

 

Shubham

शुभम विज्ञानम के लेखक हैं, जिन्हें विज्ञान, गैजेट्स, रहस्य और पौराणिक विषयों में रूचि है। इसके अलावा ये पढ़ाई करते हैं।

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