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आखिर क्यों हम आईने में अपने आप को वास्तविकता से ज्यादा सुंदर देखते हैं?

Mirror Science In Hindi

Mirror Science In Hindi –  आप हर रोज आईने में अपने को निहारते हैं और सोचते हैं कि आज में पहले से ज्यादा अच्छा और सुंदर दिखाई दे रहा हूँ या नहीं? आइने में हम अपने चेहरे को देखकर फिर अपने दिन की शुरूआत करते हैं, हमारे लिए आईने का प्रतिबिंब बहुत मायने रखता है। पर अब सवाल आता है कि क्या हम आईने में अपने आप को वास्तविकता से ज्यादा सुंदर देखते हैं, क्या हम आईने के सामने ये सोचते हैं कि हम बहुत ही सुंदर है? आइये जानते हैं इसके बारे में रचना गुप्ता जी के द्वारा –

कभी हम खुद को आईने में निहारें तो हम खुद को सामान्य से अधिक सुंदर पाते हैं। इसके पीछे एक कारण है, आईने में खुद को रोज देखने के कारण आईने का वो अक्स हमारे लिए परिचित हो जाता है। हम इसके आदी हो जाते हैं। वही चेहरा हमें भाने लगता है। आईने में जब हम अपने प्रतिबिंब को देखते हैं तो वह हमें हमारा रिवर्स दिखाता है। हम हमेशा से यही उल्टा प्रतिबिंब देखते आते हैं और इसी में सहज महसूस करने लग पड़ते हैं। हमारी खुद के बारे में एक दृढ़ धारणा हो जाती है। उसी चेहरे से हमारी दोस्ती हो जाती है।

इसे “Mere Exposure Effect ” कहा जाता है। The more we see something, the more we like it.

यह प्रभाव एक मनोवैज्ञानिक घटना है जिसके द्वारा लोग केवल उन्हीं चीजों के लिए वरीयता विकसित करते हैं, जिनसे वे परिचित हैं। मनोविज्ञान में, इस प्रभाव को कभी-कभी परिचित सिद्धांत कहा जाता है।

इस प्रभाव से तो मोनालिसा भी नहीं बच सकी।

युं कहे की उस परिचय के कारण हमें वह चेहरा सुंदर लगने लग पड़ता है। लेकिन वही प्रतिबिंब जब हम फोटो में देखते हैं तो हम उसे नापसंद करते हैं। हम में से ज्यादातर लोग कहते हैं कि हम जितने सुंदर हैं, इतनी तस्वीर सुंदर नहीं आती। बेशक सब कहें कि आप सुंदर लग रहे हैं, लेकिन आपको अपनी तस्वीर पसंद नहीं आएगी। क्योंकि आप खुद को एक खास एंगल में देखने के आदी हो चुके हैं। उस एंगल में जैसे कि आपको आईने में देखते हैं।

तस्वीर में इससे बिल्कुल उल्टा होता है, क्योंकि हमारा चेहरा दोनों तरफ से एक जैसा नहीं होता। तस्वीर में हमारी स्टिल इमेज आती है, जिससे अगर चेहरे की एक साइड कम खूबसूरत हो तो हम सुंदर नहीं दिखते। हमें खुद में कमियां दिखती हैं। अलग-अलग तरह के कैमरे और लेंस में हम अलग अलग दिखते हैं। आप यह सोचेंगे कि काश आईने ही तस्वीरें ले पाते।

शीशे की पिछली सतह की गुणवत्ता और लाइटनिंग, और स्थिति भी हमारी खूबसूरती निर्धारित करती है। इससे ही बहुत फर्क पड़ता है कि हमारी छवि किस प्रकार की प्रस्तुत होगी। कुछ आईनो में हम अपनी शक्ल देखना पसंद नहीं करते। जबकि आप बाथरूम मिरर या शोरूम में मिलने वाले मिरर को देखें। उन में हम कितने खूबसूरत पतले और लंबे दिखाई देते हैं।

साभार- रचना गुप्ता (क्योरा)

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Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान, सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।

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