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हमारी आकाशगंगा के केंद्र के पास वैज्ञानिकों ने खोजा बहुत बड़ा ब्लैक होल

जैसा की हम जानते हैं कि इस विशाल ब्रह्माण्ड में इतनी चीजें हैं कि यदि हम खोजने बैठें तो हमें अरबों – खरबों वर्ष लग जायेंगे फिर भी हम कुछ ज्यादा नहीं जान पायेंगे। फिलहाल, वैज्ञानिक अभी आकाशगंगा पर ध्यान लगाकर बैठे हैं, उनके मुताबिक आकाशगंगा में एक बहुत ही विशाल ब्लैक होल मिला है।

हमारे सूर्य से लगभग एक लाख गुना बड़ा यह ब्लैक होल एक जहरीली गैस के बादल से घिरा हुआ पाया गया है। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह आकाशगंगा में पाया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा ब्लैकहोल होगा. इससे बड़ा ब्लैकहोल सैगीटेरियस ए है, जो कि तारामंडल के बिल्कुल केंद्र में स्थित है।

आपको बता दें कि ब्लैक होल ऐसी खगोलीय शक्ति है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र काफी शक्तिशाली होता है। इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता, यहां तक कि प्रकाश भी नहीं। ब्लैक होल में एकतरफा सतह होती है, जिसे घटना क्षितिज (Event Horizon) कहा जाता है। इसमें वस्तुएं गिर तो सकती हैं, लेकिन इससे बाहर कुछ भी नहीं आ सकता। यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है।

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जापान की कीओ यूनिवर्सिटी के अंतरिक्षयात्री चिली में अल्मा टेलीस्कोप का इस्तेमाल करके गैसों के एक बादल का अध्ययन कर रहे थे और उसकी गैसों की गति को समझने का प्रयास कर रहे थे. उन्होंने पाया कि दीर्घवृत्ताकार बादल के अणु बेहद तीव्र गुरूत्वीय बलों द्वारा खींचे जा रहे थे. यह बादल आकाशगंगा के केंद्र से 200 प्रकाशवर्ष दूर था और 150 खरब किलोमीटर के दायरे में फैला था।

कंप्यूटर मॉडलों के अनुसार, इसका सबसे अधिक संभावित कारण एक ब्लैक होल है, जो 1.4 खरब किलोमीटर से अधिक का नहीं है। वैज्ञानिकों ने बादल के केंद्र से आने वाली रेडियो तरंगों की भी पहचान की. ये तरंगें ब्लैक होल की मौजूदगी का संकेत देती हैं।

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कीओ यूनिवर्सिटी के अंतरिक्षयात्री तोमोहारू ओका ने कहा, ‘आकाशगंगा में मध्यम द्रव्यमान वाले ब्लैक होल की यह पहली पहचान है.’ ओका ने ‘द गार्जियन’ को बताया, यह नया ब्लैकहोल किसी पुराने छोटे तारामंडल का मूल भी हो सकता है।

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Team Vigyanam

Vigyanam Team - विज्ञानम् टीम

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