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वैज्ञानिकों को कैसे पता चलता है कि कोई शव कितना पुराना है?

जीवित व्यक्ति या जीव जब मौत हो जाती है तो उसके उस शरीर को शव कहते हैं, शव वो शरीर होता है जिसमें कोई चेतना या किसी भी प्रकार की कोई भी क्रिया नहीं होती है। शव को अक्सर लोग तुरंत ही जला या दफना देते हैं पर कई बार किसी वजह से कोई शव इस तरह अपने अंतिम कर्म तक नहीं पहुँचपाता है और ऐसे ही कहीं लाबारिस रहता है ।

ऐसे में जब वह शव मिलता है तो सबसे पहले शव विशेषज्ञ वैज्ञानिक उसकी उम्र का पता लगाते हैं कि आखिर ये प्राणी कब मरा था और इस समय इसका शव कितने दिन या साल पुराना है।

शव कितना पुराना है उसके हिसाब से अलग अलग तरीके से इसका पता चल सकता है।

अगर शव कई साल पुराना है : अगर शव बहुत साल पुराना है और स्केलटन बन गया है तो यह कितना पुराना है इसको फोरेन्सिक +- 1 या 2 साल की त्रुटि में बता सकते हैं।

इसमें दो तकनीकों का प्रयोग होता है :

  • कार्बन 14 की मात्रा से:   यह कार्बन का एक isotope होता है जिसमें  6 की जगह 8 न्युट्रोन्स होते हैं, और इसकी हाल्फ लाइफ यानि आधी जिंदगी करीब  5730 वर्ष की होती है जिसमें वह नाइट्रोजन का  समदर्शी यानि isotope नाइट्रोजन  14 बनकर खत्म होता है।  इसी कार्बन 14 की मात्रा के आधार पर ही वैज्ञानिक किसी वस्तु और शव की  सही उम्र का अनुमान बता पाते हैं। अधिक जानकारी के लिए यहां जायें –  https://www.physlink.com/education/askexperts/ae403.cfm

 

  • एसपारटिक एसिड रेसमाइज़ेशन:   हमारे शरीर का एमिनो एसिड L फॉर्म से D फॉर्म में बदलता है। एसपारटिक एसिड की L और D फॉर्म को माप के बता सकते हैं की स्केलटन कितना पुराना है।

अगर  शव कुछ घंटे पुराना है : अगर  शव कुछ घंटे पुराना है तो शरीर के तापमान से मालुम कर सकते हैं की शव कितना पुराना है। हम जब जिन्दा होते हैं तो शरीर का तापमान 36.4 °C होता है। हर घंटे शरीर का तापमान लगभग 1.5 °C नीचे गिरता है। शव पर क्या कपड़े हैं और कहाँ पर है इसके आधार पर चिकित्सक बता सकते हैं की शव लगभग कितना पुराना है।

अगर  शव  कुछ दिनों का है : लोगों को विश्वाश नहीं होगा लेकिन सड़ती हुई लाश में किस तरह के कीड़े हैं उनके हिसाब से बता सकते हैं की शव कितने दिनों का है।ऐसा इस लिए होता है की सड़ता हुआ शवअलग अलग स्थितियों से गुजरता है और इसमें अलग अलग कीड़े अलग अलग स्थिति में पाए जाते हैं।इसके लिए एक अलग विज्ञानं है जिसको फोरेंसिक विज्ञान कहते हैं।

साभार – Jay Yadawa,

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Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान, सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।

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