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What is Space in Hindi, Space Facts In Hindi – जानें अंतरिक्ष के बारे में पूरी जानकारी

What is Space in Hindi , Space Facts In Hindi –  अंतरिक्ष  (Space)  एक ऐसा विषय है जो सभी को अपनी तरफ आकर्षित करता है, अंतरिक्ष की सुंदरता और विशालता सभी का मन मोह लेती है। यही कारण है कि कई हजार सालों से भी मानव इसके रहस्यों को जानने में लगा है लेकिन आज भी वह इसका लेस मात्र भी नहीं जान सका है।

पहले प्राचीन लोग रात जब अंतरिक्ष में नहीं जा सकते थे तब वे रात को इसके बारे में सोचा करते थे, धीरे-धीरे विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली जिससे अब मानव आसानी से अंतरिक्ष में पहुँच सकता है और साथ में इधर कुछ दिन रह भी सकता है।

अंतरिक्ष जितना सुंदर हमारी सोच में बसता है उतना ही वह वास्तव में खतरनाक है, अगर कोई बिना सुरक्षा उपकरण के वहां चला जाये तो केवल दो मिनट में ही उसकी मौत हो जायेगी और उसका शरीर भी नहीं मिलेगा।

स्पेस या अंतरिक्ष क्या है ? What is Space in Hindi

अगर आप स्पेस का मतलब खाली जगह समझ रहे हैं तो आप गलत हैं। ये एक ऐसी जगह जो धूल, गैस, या अन्य कोई कण, रेडियेशन कणों से भरी रहती है। स्पेस जैसा नाम हमें दिखाई पड़ता है वैसा नहीं है। हम इतने छोटे हैं कि जो ये खाली जगह हम देखते हैं वह ही हमारे लिए कल्पना से परे बन जाती है।

स्पेस एक खोखली जगह नहीं हैं, तारों और ग्रहों के बीच जो दूरी होती है उसे हम स्पेस कहते हैं। जैसे पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर जाते ही स्पेस यानि की अंतरिक्ष की सीमा चालु हो जाती है और तब तक रहती है जब तक हमें कोई दूसरा ग्रह नहीं मिल जाता है। पर ये जो ग्रहों के बीच जो दूरी होती है ये एकदम खाली या कहें खोखली नहीं होती है इसमें कई तरह के कण, छोटे पिंड, और उल्कायें होती हैं। इसके अलाबा इसमें कई तरह के खतरनाक Radiation भी होते है। जैसे की- Infrared, सूर्य से आनेवाली Ultra-Violet Radiation, X-raysGamma rays, Cosmic rays इत्यादि। इसके साथ ही अंतरिक्ष में चुंबकिये क्षेत्र(magnetic field) भी बना हुआ होता है।

अंतरिक्ष क्या है – Definition of Space

वैज्ञानिकों के मुताबिक अंतरिक्ष(स्पेस) एक Vacuum है जिसकी शुरूआत हमारी पृथ्वी से 100 किलोमीटर ऊपर होती है। यहां ना तो हवा है और ना ही कोई माध्यम है जिससे हमारी आवाज गूंज सके। अंतरिक्ष में ऐसा कुछ भी नहीं होता है जो कि ग्रह पर रहने वाले के लिए होता है। अगर हम स्पेस या अंतरिक्ष की तरफ देखें तो हमें इसमें लाखों, अरबों तारे, ग्रह और आकाशगंगाये दिखने को मिलती हैं, जिनके साथ-साथ हम कई और विचित्र चीज़ो को भी देखते हैं जिन्हें हम समझ नहीं सके हैं।

Types Of Space – अंतरिक्ष के प्रकार

पृथ्वी के अनुसार अंतरिक्ष को विभिन्न परतों या कहें प्रकारों में बांटा गया है – 

Geospace – यह अन्तरिक्ष का वह क्षेत्र है जो हमारे ग्रह के सबसे नजदीक है। इसमें वायुमंडल(atmosphere) के उपरी सतह तथा चुंबकीय क्षेत्र  (magnetosphere) आते है।

Interplanetary Space – सूर्य और ग्रहों के बीच का जो क्षेत्र हैं उसे Interplanetary Space कहते है। इस क्षेत्र में सूर्य से आनेवाली सौर हवा सभी ग्रहों पर प्रभाव डालती है, यहां जो भी खाली जगह है उसमें सूर्य के कण ही भरे हुए हैं। सूर्य बहुत अधिक मात्रा में अपनी सतह से इस तरह कै मैटर को कणों के माध्यम से छोड़ता है।

Interstellar Space –  आकाशगंगा में जितने भी सौर-मंडल यानि की तारे और उनके ग्रह हैं तो जो दूरी एक तारे की दूसरे तारे या एक सौर मंडल के ग्रह की दूसरे सौर मंडल के तारे या ग्रह से होती है उसे ही Interstellar Space कहते हैं। हमारे सौर मंडल में सूर्य के जो नजदीक का तारा है तो उसकी जो दूरी है जिसमें जितना भी स्पेस वही इंटरस्टैलर स्पेस कहलाता है।

Intergalactic Space – यह स्पेस का वह क्षेत्र है जो दो गैलेक्सी के बीच होता है। आकाशगंगाये बहुत बड़ी होती हैं जिनमें अरबों तारे और ग्रह होते हैं, Intergalactic Space अपने मायने में वह खाली जगह होती है या  वह स्पेस है जो कि बहुत ही बड़ा है, और इस स्पेस में भी कण इधर से उधर तैरते ही रहते हैं और ग्रेविटी के कारण जुड़कर ग्रहों, तारों या पिंडो का निर्माण करते हैं।

अंतरिक्ष में होता है रेडियेशन जिसे हम नहीं देख सकते हैं – 

अंतरिक्ष में सूर्य और जितने भी तारे हैं उन सबसे रेडियेशन हमेशा निकलता ही रहता है, सभी तारे Nuclear Fusion के कारण जलते हैं इसलिए इनमें से रेडियेशन निकलना आम बात है। इसके अलाबा अंतरिक्ष में वो रेडियेशन भी मौजूद होता है जो कि आकाशगंगायों से आता है जिसे रेडियेशन कहते हैं। ये दोनों ही रेडियेशन हमारे लिए घातक हैं जिसके कारण हम स्पेस में लंबी यात्रा अभी नहीं कर सकते हैं।

आकाशगंगा

स्पेस में अरबों आकाशगंगायें होती हैं,  एक आकाशगंगा एक विशालकाय रूप है जिसमे सौर मंडल के साथ साथ धुल के कणों, बहुत सारी गैसों का भी संयोजन रहता है. आकाशगंगा गुरुत्वाकर्षण बल से पूर्णतया जुड़ा रहता है. हमारे आकाशगंगा के बिलकुल बीचो बीच में एक बहुत ही भारी black hole भी है.जब कभी रात में अगर आप खुले आकाश को देखे तो आपको बहुत सारे तारों को देखने का मौका मिलता है जिसमे हमारे आँखों के सामने आकाशगंगा में उपस्थित अन्य तारे भी हम देख सकते है।

ब्लैक होल्स 

ब्लैक होल एक ना दिखाई देने वाला ग्रेविटी का वह समुद्र होता है जो अपनी ओर आने वाली हर वस्तु को समा लेता है, ये लाइट को भी नहीं छोड़ता है। ब्लैक होल एक विशाल तारे के मरने के बाद ही बनता है। हमारे स्पेस में ये कई जगहों पर हो सकते हैं और हम इन्हें देख नहीं सकते हैं केवल ग्रेविटी के कारण पहचान सकते हैं।

अंतरिक्ष के बारे में कुछ रोचक तथ्य 

अंतरिक्ष जितना सुंदर हमारी सोच में बसता है उतना ही वह वास्तव में खतरनाक है, अगर कोई बिना सुरक्षा उपकरण के वहां चला जाये तो केवल दो मिनट में ही उसकी मौत हो जायेगी और उसका शरीर भी नहीं मिलेगा।

अंतरिक्ष में आप रो भी नहीं सकते हैं और ना ही किसी से बात कर सकते हैं, इधर खाना भी आप सही से नहीं खा सकते हैं। इन सबके लिए अंतरिक्ष में पृथ्वी  की तरह ग्रेविटी ना होना कारण है। अंतरिक्ष में कोई वातावरण भी नहीं होता है।

अंतरिक्ष में है शराब का बादल

जिन लोगों को शराब पीना पसंद है वे कभी ना कभी सपने में सोचते तो जरूर होंगे कि काश इस दुनिया में शराब के बादल होते तो ये दुनिया कितनी महान होती। ऐसे सपने देखने वालों को अंतरिक्ष ने निराश नहीं किया है, Aquila नाम के तारा मंडल में एथिल अल्कोहल का एक विशाल बादल मौजूद है। ये कोई साधारण बादल नहीं है। ये इतना बड़ा है कि आपके सपने में कभी फिट ही ना बैठे।

ESO/APEX & MSX/IPAC/NASA

दरअसल ये बादल हमारे सौर मंडल से 1000 गुना बड़ा है। पर अफसोस ये विशाल शराब का बादल शराबियों के लिए सपना ही रह जायेगा क्योंकि ये पृथ्वी से 10 हजार प्रकाश वर्ष दूर है यहां लाइट को भी पहुँचने में 10 हजार साल लग जायेंगे। जबतक भविष्य में स्पसे ट्रेवल की कोई तकनीक नहीं बन जाती है तबतक ये बादल आपको बस सपने में ही दिखा

Space अंतरिक्ष की गंध कैसी है ?  The Smell Of The Space

जब आप अंतरिक्ष के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले यही ख्याल आता है कि अंतरिक्ष दिखता कैसा है, महसूस कैसा होता है और इसमें क्या सुनाई देता है? पर कभी आपने इस पर ध्यान नहीं दिया होगा कि अंतरिक्ष की गंध कैसी है क्या इसमें खुशबू आती है या बदबू सी लगती है।

स्पेस में कोई भी अंतरिक्ष यात्री अपना स्पसेसूट नहीं उतारता है और ना ही ऐसा करने की कोशिश करता है क्योंकि अगर करता भी है तो वह हमें गंध बताने कि लिए जिंदा ही नहीं रहेगा। हमें अंतरिक्ष की गंध का पता केवल और केवल स्पेस यात्रियों के सूट और उनके औजारों से ही पता चलता है, जब उनकी जाँच की जाती है तो तभी उनमें से आनी वाली गंध का बताया जाता है।

Max Planck Institute के वैज्ञनिकों ने अपनी एक रिसर्च में कहा है कि आकाश गंगा का केंद्र एक स्रटाबेरी की तरह महकता है। मतलब की जो खुशबू किसी बैरी में आती है वही हमारी आकाशगंगा के केंद्र से आती है। इसके पीछे तर्क ये है कि आकाशगंगा के केंद्र में इथाइल फोरमेट बनती है जो खुद इन मीठी बैरीस में पाई जाती है।

ऐसा ग्रह जहाँ हमेशा काँच की बारिश होती है

यह सोचने में ही डरावना लगता है कि आप एक ऐसी जगह पर हों जहां पर केवल काँच की बारिश होती हो, हर तरफ केवल और केवल काँच। हमारे ब्रह्मांड में एक ऐसा ही ग्रह है जिसे देखकर आपको नर्क की कहांनिया याद आ जायेंगी। इस ग्रह का नाम है  HD 189733b, जो हमारी धरती से 63 लाइट इयर दूर है। इस ग्रह पर हवाओं की रफ्तार 8700 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। ये धरती पर बहने बाली हवाओं की रफ्तार से 20 गुना ज्यादा तेज हैं।

HD 189733b

इस ग्रह पर काँच की बारिश का रहस्य है इसा सिलिका से बना Atmosphere। सिलिका एक काँच जैसा ही पदार्थ होता है। इस ग्रह के Atmosphere में इसी सिलिका के बादल बनते हैं और जब ये बरसते हैं तो ये सिलिकां ठंडा होकर काँच की शक्ल में गिरता है। ये गोली की रफ्तार से भी तेज है, सोचिए कोई आपको इस ग्रह पर छोड़ दे तो आपका क्या हाल होगा>>

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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