क्या हम भगवान विष्णु के सपने में जी रहे हैं, क्या है इसका रहस्य

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सनातन धर्म वह धर्म है जो सनातन काल से चला आ रहा है। सनातन का अर्थ ही होता है प्रारंभ से चलने वाला और सदा चलता रहेगा। जैसे पानी बनाने के लिए दो अणु हाइड्रोजन और आॅक्सीजन की जरुरत पड़ती है चाहें फिर हम ब्रह्मांड में कहीं पर हो ठीक उसी तरह सनातन धर्म के नियम हर जगह एक जैसे ही होते हैं।

दोस्तों, सनातन धर्म में त्रिदेवों का महत्व है जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश(महादेव) आते हैं। इन त्रिदेवों के रचियता स्वंय परमात्मा हैं जो सभी से परे हैं। परमात्मा के बारे में भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि परमात्मा वह है जो सभी आत्माओं से परे हैं जिसका ना कोई अंत है और ना ही कोई प्रांरभ।

उनके अनुसार भगवान महाविष्णु जो कि सनातन धर्म के पुराणों के अनुसार एक अलग ही लोक में रहते हैं वह ही परमात्मा हैं और उनसे ही है समस्त चाराचर अखिल ब्रह्मांण चल रहा है।

हम जानते हैं कि भगवान महाविष्णु को हिन्दू शास्त्रो में क्षीरसागर में सोता हुआ दिखाया जाता है, क्या आप इसके पीछे का रहस्य जानते हैं। दरअसल भगवान महाविष्णु कुछ काल के लिए विश्राम करते हैं, और कहते हैं कि उनके इसी विश्राम में जो वह सपना देखते हैं वह सपना में ही हम सभी लोग जीवित हैं और माया का यह खेल चल रहा है।

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शास्त्रों के अनुसार जबतक भगवान महाविष्णु सो रहे हैं माया द्वारा हर पल अरबों ब्रह्मांड बनते हैं और नष्ट होते हैं। खरबों ही जीव जंतु काल के मुँह में समाते हैं और उतने ही फिर जन्म लेते हैं।

भगवान महाविष्णु के इस रहस्य को और गहराई से समझने के लिए आप यह वीडियो जरुर देखें, इसमें आपको स्पष्ट समक्ष में आय़ेगा कि उनके सोने का रहस्य क्या है।।

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