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क्या आज का विज्ञान इतना सक्षम है कि वह भगवान को खोज सके?

विज्ञान और भगवान

ये विषय गंभीर है, कुछ के लिए तो भगवान का अस्तित्व ही काल्पनिक हो सकता है पर वास्तव में ये क्या है वही समझने में हमें समय लग जाता है। हर धर्म का आधार भगवान है जिसे वह कई नामों से जानते हैं, पर एक बात समान है कि भगवान हर धर्म में वह शक्ति है या वह परम पुरुष है जो हम जैसे मानवों और धरती पर पाई जाने वाली हर चीज़ के स्वामी हैं। हमें उनकी ही पूजा करनी चाहिए।

सनातन धर्म में भगवान

मुझे दूसरे धर्मों का ज्ञान कम है पर सनातन धर्म में भगवान की अवधारणा बहुत गहरी है, कण-कण में भगवान को माना जाता है। हमारे ग्रंथो में लिखा है कि भगवान वही है जो हर कण में व्याप्त है। इस भौतिक संसार में सबसे छोटा कण है परमाणु हालांकि उससे भी छोटे कण हैं (इलेक्ट्रोन, प्रोटोन और न्यूट्रोन) पर कणों की सूक्ष्मता की कोई सीमा नहीं है। हर कण में भगवान का अस्तित्व है इसलिए तो जब प्रहलाद से उनके पिता ने कहा कि क्या इस महल के नाश्वान खंभे में भी तुम्हारे भगवान हैं तो प्रहलाद जी ने इसका उत्तर बडे ही आत्मविश्वास से दिया, फिर क्या था खंभा फटा और भगवान साक्षात प्रकट हुए।

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आधुनिक विज्ञान

विज्ञान की दृष्टि भौतिकी के नियमों में बंधी रहती है तभी तो वह हर चीज को इन्हीं नियमों से परख कर ही अध्ययन करते हैं। यह बात अलग है कि अभी विज्ञान नवजात है पर फिर भी हमें इतनी समझ तो है ही की हम भगवान के मिलने का विचार कर ही सकते हैं। करीब कुछ पाँच सौ वर्षो पहले ही शायद आधुनिक विज्ञान ने जन्म लिया होगा ( जिसे बाद में आंइस्टीन ने फिर से पैदा किया था )।  पर हमारा आत्मविश्वास इस कदर है कि हम ब्रह्मांण को बनाने वाली शक्ति के पास जाने की कोशिश कर रहे हैं।

अध्यात्म के मार्ग

धर्म ग्रंथो की मानें तो भगवान के पास जानें का रास्ता बहुत ही कठिन है या तो ज्ञान और योग के द्वारा और या तो हम भक्ति के मार्ग से उनतक पहुँच सकते हैं पर दोनों ही मार्गों में हमे खुद भगवान की बनाई ये माया से भरी दुनिया के अस्तित्व को नकारना होगा। योगवसिष्ठ में बार -बार इसी बात का जिक्र है कि ये संसार सपने की तरह ही है और आप इसमें स्वपन ही देख रहे हैं जिस दिन नींद टूटेगी उसी दिन इस माया रूपी संसार से आपका मोह खत्म हो जायेगा और सच्चाई आपके सामने आ जायेगी।

ये मार्ग आपको बहुत कठिन लग सकता है क्योंकि ना तो इस मार्ग के वर्णन करने वाला कोई है और ना ही कोई माया को काटकर इस मार्ग तक पहुँच सकता है। बहुत कठिन है…. अध्यात्म की राह पर तो कठिनाई ही कठिनाई है पर क्या विज्ञान में कुछ बात बन सकती है??

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विज्ञान का मार्ग

विज्ञान तो अभी प्रारंभिक अवस्था में ही है, ये सवालों का युग है और सवाल करना हमारी शक्ति भी है क्योंकि जिसके सवाल खत्म हो गये हैं या तो वह बहुत बड़ा ज्ञानी है या वह अंदर से खत्म हो चुका पुरुष है। भगवान के अध्यात्म वाले मार्ग में तो बहुत कठिनाई है और ये मार्ग को बताने वाला भी कोई नहीं है वस विश्वास के सहारे ही इस मार्ग से जाया जा सकता है। पर फिलहाल विज्ञान में तो कोई मार्ग ही नहीं है हां थ्योरी के आधार पर तो हर चीज़ संभव लगती है पर प्रैक्टिकल हो पाना ही तो विज्ञान की महानता है। हर चीज़ विज्ञान से ही चलती है ये भी सच है चमत्कार नाम की चीज़ नहीं होती है, जहां कुछ भी दिख रहा है और हो रहा है वैज्ञानिक प्रक्रिया से ही हो रहा है।

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एक सफर

अध्यात्म भी विज्ञान है पर अभी हमारी समझ से परे है, समझ से इतना परे है कि मुझे भी समझ नहीं आता है। पर मुझे भगवान से मिलना है क्योंकि कोई तो है जिससे यह सृष्टि चलती है कोई तो है जिसने सबसे पहले ये किया होगा।

भक्त ध्रूव और भगवान विष्णु

अगर सूक्ष्म सफर पर निकलें तो हम कितना सुक्ष्म जा सकते हैं भगवान से मिलने, शायद अणु में या अणु के भी अणु में पर भगवान के लिय तो ना सूक्ष्मता का पैमाना है और ना ही विशालता का। तो भाई विज्ञान के लिए यह सफर तो असंभव ही है पर हमें ना नहीं कहना चाहिए क्योंकि बार बार काम करने पर नतीजे समाने आते ही हैं।

नतीजा

फिलहाल तो भगवान तक पहुँचने का रास्ता को अध्यात्म के मार्ग से ही जाता है, विज्ञान तो आज भी भगवान के अस्तित्व के सवालों से जूझ रहा है।

अगर इस लेख में आपको कोई गलती लगे या मेरी भूल दिख रही हो तो मुझे अज्ञानी समझकर क्षमा करदें, ये लेख बस मेरे मन के विचार हैं जो मेरे मन में आते हैं वही आपको लिख के बता दिया है। आप भी अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं, इसके लिए कमेंट करके इस लेख पर विचार जरूर दें….

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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