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ब्रह्माण्ड में होती हैं तीन तरह की सभ्यता! – Types of Civilization

The Kardashev scale Of Civilizations

Types of Civilization in Hindi – आपने कई बार किताबों और अक्सर आस-पास ‘सभ्यता’ शब्द सुना होगा जो कि लोगों के संस्कार और परंपराओं पर आधारित होती हैं। हमारी पृथ्वी के इतिहास में हमने कई बार सभ्यताओं के बारे में पढ़ा और उनके विकास के बारे में भी जाना है 5 हजार पुरानी मिस्र की सभ्यता, माया सभ्यता और हिन्दू सभ्यता(जो आज भी कायम है) ये सभी सभ्यतार रहीं जिनके माध्यम से आज हम इंसान इस पृथ्वी पर अपनी आधुनिक सभ्यता कामय करके रह रहे हैं। असल मायने में सभ्यता समाज, विश्न के मानसिक विकास और भौतिक विकास को दर्शाती है।

इसी तरह वैज्ञानिक भी सभ्यताओं के विकास पर बहुत जोर देते हैं, उनके मुताबिक सभ्यता तीन तरह की होती हैं। जिन्हें Kardashev scale में नापा जाता है।

Type 1 सभ्यता

Civilizations (सभ्यता)  की तीन कैटेगरी होती हैं,,, Type 1 सभ्यता उस  सभ्यता को कह सकते हैं जो कि अपने ग्रह पर मिलने वाली पूरी ऐनेर्जी (ऊर्जा)  को काम में ला सके या उसका उपयोग कर सके, हम मानव अभी स्केल के 0.73 नंबर पर हैं और आने वाले कुछ सैकड़ो सालो में हम टाइप 1 सभ्यता बन जायेंगे..

Type 2 सभ्यता

Type 2 वो सभ्यता होगी जो कि अपने पूरे तारे यानि स्टार की सारी ऐनेर्जी का प्रयोग करती हो, स्टार से जितनी भी ऐनेर्जी मिलती है वह सभ्यता उस पूरी ऐनेर्जी से अपनी मांगो और जरूरतों को पूरी करती है। फिलहाल ये हमें बहुत अजीब लगे पर हम तारों की पूरी ऐनेर्जी डायसन स्फेयर जैसे कांसेट से ले सकते हैं, इसमें हम पूरे स्टार को एक स्पेयर के अंदर ढक देंगे…..

Dyson sphere

डायसन स्फेयर (dyson sphere)  एक विज्ञान का है जिसमें हम इस तरह का एक जाल या कहें कुछ ऐसा बनायें जिससे हम तारे की पूरी ऊर्जा को प्राप्त कर सकें, जैसे तारा स्फेयर यानि गोल होता है तो हम उसकी पूरी ऊर्जा तभी ले सकते हैं जब हम उससे बड़ा एक स्फेयर बनाके उसे ढ़क दें और उस स्फेयर के प्रयोग से तारे की ऊर्जा को नियंत्रित कर सकें, वैज्ञानिक मानते हैं कि आने वाले 1 लाख सालों में शायद हम यह मुकाम भी हासिल कर सकते हैं।

Type 3 सभ्यता

Type 3 Civilization या सभ्यता वो सभ्यता होगी जो कि पूरी Galaxies (आकाशगंगा)  को नियंत्रित करती हो और उसके सभी ऐनेर्जी संसाधनो पर उसका हक हो….टाइप 3 सभ्यता इतनी ऐडवांस है कि ये हमारे लिए भगवान की तरह है।

The Fermi Paradox

अगर हम Generation Ship बनायें जिनमें लोग एक हजार साल तक ट्रैवल करें तो हम इस तरह से 20 लाख सालों में पूरी आकाशगंगा पर अपनी एक कोलोनी बना सकते हैं। तो अगर हमें पूरी आकाशगंगा पर कोलोनी बनाने में 20 लाख साल लगते हैं तो जो ग्रह हमसे कई अरब साल बढ़े हैं और उनमें कई अरब सालों से जीवन भी है ,और इतने टाइम में तो वे अबतक टाइप 3 सभ्यता भी बन चुके हैं तो आखिर वे हैं कहां, आखिर गैलेक्सी (आकाशगंगा)  अभी तक खाली क्यों पड़ी है, कहां हैं सारे एलियंस और उनकी सभ्यता…..वे हमें क्यों नहीं अभीतक मिले हैं… ये सवाल इतना गहरा है कि साइंटिस्ट इसे फर्मी पैराडेक्स (Fermi Paradox)  भी बोलते हैं,….

Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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