Poems

टूटे फ़ूल – कविता

Toote Phool Hindi Poem – फ़ूल जिसकी ख़ुशबू सबको पसंद होती है । दुनिया मे तरह-तरह के फ़ूल है । लोगों को फूल बहुत पसंद होते है इसलिए लोग उन्हें तोड़ लेते है और फिर इधर -उधर फेंक देते है । परंतु एक फूल का दर्द कभी जाना है आपने ।

आइये एक कविता के माध्यम से जानते है एक फूल का दर्द :

टूटे फ़ूल

खिला हूँ आज बनकर फूल बगिया में
बच्चे की तरह खिलखिलाया हूँ मैं भी दुनिया में,
दो दिन की जिंदगी है मेरी
फिर तोड़ कर रख लेगा माली मुझे डलिया में,
 
 
उदास नही होता हूँ मैं
टूटकर भी काम आता हूँ मैं,
कभी चढ़ता हूँ मंदिर में
तो कभी मस्जिद में, गुरुद्वारे में ,
 
प्यार के इज़हार में मुझे ही याद किया जाता है,
देने वाला मुझे देकर दूसरों को अपना बनाता है,
मैं बेचारा अपनों से दूर दूसरों को खुशियाँ देता हूँ,
मेरी ख़ुशी क्या ख़ुशी किताबों में रहकर मुरझाता हूँ,
 
 
डोली हो या अर्थी हो,
दोनों पर फेंका जाता हूँ,
सम्मान पाना दूर की बात ,
पैरों तले कुचला जाता हूँ ।।

 

कवि – अभिनय प्रसाद

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