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रामनामी समाज – पुरे शरीर पर लिखवाते हैं राम नाम।

भारत अनोखा देश हैं विविध प्रकार की संस्कृति से भरे हुए देश में हमेशा कुछ ना कुछ नया मिल ही जाता है। भारत में हर प्रकार के धर्म को पालने की शक्ति है। आपको भारत में हमेशा नया देखने को मिल ही जायेगा और शायद इसलिए ही भारत सबसे महान देश है।

आज हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की जहां पर पुरे शरीर पर राम नाम लिखवाने की अनोखी परंपरा प्रचलित है और हर कोई इसका पालन करता है। आइये जानते हैं।

कहा जाता है कि इस समाज में यह परंपरा लगभग 100 सालों से चली आ रही है।

Source – Jagran

टैटू के पीछे है एक कहानी

कहा जाता है कि 100 साल पहले गांव में हिन्दुओं के ऊंची जाति के लोगों ने इस समाज को मंदिर में घुसने से मना कर दिया था। इसके बाद से ही इन्होंने विरोध करने के लिए चेहरे सहित पूरे शरीर में राम नाम का टैटू बनवाना शुरू कर दिया।

क्या कहते हैं लोग

इस गांव के बहुत से लोग इस परंपरा को बहुत अच्छा मानते हुए हमेशा उसका बखान करते हैं और बहुत खुशी से बताते हैं।

-रामनामी समाज को रमरमिहा के नाम से भी जाना जाता है।

-जमगाहन गांव के महेतर राम टंडन इस परंपरा को पिछले 50 सालों से निभा रहे हैं।

-जमगाहन छत्तीसगढ़ के सबसे गरीब और पिछड़े इलाकों में से है।

-76 साल के रामनामी टंडन बताते हैं, जिस दिन मैंने ये टैटू बनवाया, उस दिन मेरा नया जन्म हो गया।

50 साल बाद उनके शरीर पर बने टैटू कुछ धुंधले से हो चुके हैं, लेकिन उनके इस विश्वास में कोई कमी नहीं आई है।

– नजदीकी गांव गोरबा में भी 75 साल की पुनई बाई इसी परंपरा को निभा रहीं हैं।

– पुनई बाई के शरीर पर बने टैटू को वह भगवान का किसी खास जाति का ना होकर सभी के होने की बात से जोड़ती हैं।

नई पीढ़ी की दिलचस्पी कम है

रामनामी जाति के लोगों की आबादी तकरीबन एक लाख है और छत्तीसगढ़ के चार जिलों में इनकी संख्या ज्यादा है। सभी में टैटू बनवाना एक आम बात है।

– समय के साथ टैटू को बनवाने का चलन कुछ कम हुआ है।

– रामनामी जाति की नई पीढ़ी के लोगों को पढ़ाई और काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। इसलिए ये नई पीढ़ी पूरे शरीर पर टैटू बनवाना पसंद   नहीं करती।

– इस बारे में टंडन बताते हैं, आज की पीढ़ी इस तरह से टैटू नहीं बनवाती। ऐसा नहीं है कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। पूरे शरीर में न सही, वह किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाकर अपनी संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं।

इस समाज का मानना है कि वह अपनी संस्कृति को हमेशा जीवित रखना चाहते हैं इसलिए भले ही आधुनिकता के प्रभाव से कुछ चलन कम हुआ हो पर लोग आज भी आदर से टैटू जरूर बनवाते हैं।

समाज के कुछ नियम

हर समाज की तरह भी इस समाज के अपने कुछ नियम हैं जिन्हें यह सभी दिल से मानते हैं और उनका पालन करते हैं।

-इस समाज में पैदा हुए लोगों को शरीर के कुछ हिस्सों में टैटू बनवाना जरूरी है।

-खासतौर पर छाती पर और दो साल का होने से पहले।

-टैटू बनवाने वाले लोगों को शराब पीने की मनाही के साथ ही रोजाना राम नाम बोलना भी जरूरी है।

टैटू बनवाने के साथ ही राम नाम लिखे कपड़े भी पहनते हैं रामनामी।

-ज्यादातर रामनामी लोगों के घरों की दीवारों पर राम-राम लिखा होता है।

-इस समाज के लोगों में राम-राम लिखे कपड़े पहनने का भी चलन है, और ये लोग आपस में एक-दूसरे को राम-राम के नाम से ही पुकारते हैं।

समाज की दिलचस्प बातें

-नखशिख राम-राम लिखवाने वाले सारसकेला के 70 वर्षीय रामभगत ने बताया कि रामनामियों की पहचान राम-राम का गुदना गुदवाने के तरीके के मुताबिक की जाती है।

-शरीर के किसी भी हिस्से में राम-राम लिखवाने वाले रामनामी। माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को शिरोमणि। और पूरे माथे पर राम नाम लिखवाने वाले को सर्वांग रामनामी और पूरे शरीर पर राम नाम लिखवाने वाले को नखशिख रामनामी कहा जाता है।

भले ही आज आधुनिकता के शोर में यह चलन कम हो रहा हो पर इस समाज का युवा आज भी इसे कायम रखते हुए शरीर के किसी ना किसी हिस्से पर राम नाम जरूर लिखवाता है। भले ही आज कानून में बदलाव के जरिये समाज में ऊंच-नीच को तकरीबन मिटा दिया गया है और इन सबके बीच रामनामी लोगों ने बराबरी पाने की उम्मीद नहीं खोई है।

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Team Vigyanam

Vigyanam Team - विज्ञानम् टीम

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