Poems

तन्हाई की आवाज़ – कविता

आज रात पता नहीं क्यों गुज़र ही नहीं रही है,
अब ठीक से गौर करूँगा उनपर जो बातें मेरी तन्हाई ने मुझसे कही हैं।

नशा कर मग़र ऐसा जिसकी तुझे तलब ना लगे,
मोहब्बत कर मग़र ऐसे के जिससे करे उसको भी भनक ना लगे।

बिखर तो चुका है अब और कितना टूटेगा,
अभी तो सिर्फ़ दुनिया से खफ़ा है तू मग़र ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन ख़ुदसे भी रूठेगा।

ख़्वाब देखता है तो वो मुक्कमल भी होंगे ज़रा हौंसला तो रख,
चाह बेशक़ किसी को भी मग़र किसी कसौटी पर तो उसको भी परख।

यूँ ही अल्फ़ाज़ लुटाता रहा तो एक दिन दिवाला निकल जाएगा,
एहसासों से भरा तेरा दिल खंडहर बनकर बिख़र जाएगा।

इंसान होगा तू अच्छा पर इस माहौल के क़ाबिल नहीं है,
ये खुदगर्ज़ों की महफ़िल है और तू इसमें शामिल नहीं है।

ये दुनिया खूबसूरत होगी मग़र दिल की तो साफ़ नहीं,
ये गलतियाँ करे तो भी तू भुला दे पर तू भूल भी करदे तो वो भी माफ़ नहीं।

मत कर प्यार अब किसी से भी वरना इस बार एक ही वार में बिल्कुल टूट जाएगा,
ये मतलब की दौड़ है और तू इसमें बिना मतलब के पीछे छूट जाएगा।

ना कुछ साथ लाया था ना ही कुछ साथ लेकर जाएगा,
पर अग़र किसी दिन किसी खुदगर्ज़ के काम ना आ सका तो मतलबी बनाकर बदनाम कर दिया जाएगा।

कवि – अंकित

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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