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बहुत घातक होते हैं सौर तूफान, पर क्या ये धरती को तबाह कर सकते हैं?

Solar Storm – सूर्य इस ग्रह पर जीवन का वह स्रोत है जिससे निकलने वाली उर्जा के कारण ही हमारे नीले ग्रह पृथ्वी पर जीवन के हर रंग देखने को मिलते हैं। इसलिए कई धर्मों में हम सूर्य की पूजा करते हैं। हमारे सनातन धर्म में सूर्य देव की पूजा का सर्वोपरि स्थान है।

पृथ्वी से 10 लाख गुना बड़े इस तारे में इतनी उर्जा और शक्ति है कि इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। सूर्य जितना हमारे लिए आवश्यक है और जितना हम इसे समझते है ये उससे कहीं ज्यादा विचित्र भी है, सूर्य के कई ऐसे राज आज भी वैज्ञानिकों को डरा देते हैं जिन्हें वे सबके सामने बोलने से बचते हैं।

आज के इस लेख में हम सूर्य के सौर तुफान के बारे में जानेंगे जो वैज्ञानिकों को विचिलित कर देता हैं। आप नाम से ही समझ गये होगें कि सौर तूफ़ान सूर्य से निकलने वाली हवा होगी।

सूर्य से निकलते हैं खरबों कण

सूर्य हर पल अंतरिक्ष में अरबों- खरबों कण भेजता रहता है, सूर्य में जो विस्फोट और जो भी गतिविधि होती है उससे सूर्य का कई हजार टन मैटर अंतरिक्ष में रेडियेशन के तौर पर फेंक दिया जाता है। ये रेडियेशन बहुत खतरनाक होता है जो आसपास के ग्रहों के वातावरण को तुरंत जलाकर खत्म कर देता है। यही कारण है कि शुक्र(Venus)  और बुध(Mercury)  ग्रह पर शायद कभी जीवन हो ही नहीं सकता है।

क्या है सौर तूफ़ान

सूर्य से निकलने वाली सोलर बिंड या सौर हवा जिसमें अरबों खरबों ऐटोमिक पार्टिकल्स होते हैं जब वह पृथ्वी से टकराती है तो वह पृथ्वी के magnetosphere (चुंबकीय क्षेत्र)  को प्रभावित करती है, magnetosphere पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र है जो पृथ्वी की सौर कणों से रक्षा करता है।

The Sun – Solar Flare. An illustration of the sun and sun flare with a planet to give scale to the size of the flare.

कितना घातक हो सकता है ये

साल 1859 में एक बहुत विशाल सौर तूफान पृथ्वी से टकराया था, इस तूफान को कैरिंगटन इवेंट कहते हैं जिसमें सूर्य से निकलने वाली एक विशाल सौर हवा ने पृथ्वी के मैगनेटिक नेचर को बहुत हद तक गढ़बड़ कर दिया था। इस सौर हवा ने उस समय पृथ्वी के magnetosphere से लेकर और तमाम तरह के बिजली के उपकरण इत्यादि सभी लगभग खराब कर दिये थे।

Earth’s magnetosphere ( पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र)

ये इवेंट इतना शक्तिशाली था कि इसकी चमक कई दिनों तक पृथ्वी पर कई जगहों पर दिखी थी, उस समय तब ज्यादा गैजेट्स नहीं होते थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1859 में आया ये सौर तुफान इतना शक्तिशाली था कि इसने बिजली से चलने वाले कई उपरकरणों को इस कदर खराब कर दिय़ा था कि उनमें कभी कभार अपने आप आग तक लग जाया करती थी।

सौर तूफ़ान अगर आज पृथ्वी से टकराये तो

सोचिए, इस तरह का कोई तूफ़ान आज के समय में पृथ्वी से टकराये तो क्या होगा?? भले ही ये हम इंसानो को खत्म करने की ताकत ना रखता हो पर अरबों कणों की यह आंधी हर सैटलाइट और गैजेट्स को तुरंत खराब कर देगी। आपके सभी संपर्क इस दुनिया से कट जायेंगे।ये इस कदर होगा कि सैटेलाइट और तमाम उपरकरण जल भी सकते हैं और कई सालों तक खराब भी रहेंगे।

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इसके अलाबा अगर पृथ्वी का magnetosphere इससे नष्ट हो जाता है तो मानव सभ्यता पर एक बहुत बड़ा संकट पनप सकता है।  वैज्ञानिक इस सौर तुफान को लेकर गंभीर तो हैं पर इतनी तीव्रता के तुफान बहुत कम ही पृथ्वी पर आते हैं, ऐसा हजारों सालो में ही होता है पर इस ब्रह्मांड में हजारों सालों को भी एक सेकेंड से कम ही आंका जाता है।

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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