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आरएसएस RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के बारे में 17 रोचक तथ्य

आज हम बात करेगे दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संस्थान, RSS (Rashtriya Swayamsevek Sangh) की. कोई कहता है कि ये तो सिर्फ हिंदुओं का संघ है कोई कहता है कि ये मुस्लिमों के खिलाफ है और कुछ तो ये भी कह देते है कि ये भारत के ही खिलाफ है। आज हम आपको आरएसएस के बारे में डिटेल से फैक्ट्स के माध्यम से बताने जा रहे है..

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में  रोचक तथ्य

1. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो 2025 तक 100 साल का हो जाएगा, कि स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने दशहरे के दिन की थी।

2. RSS का मुख्यालय नागपुर, महाराष्ट्र में है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत जी है जो ब्राह्मण जाति से संबंध रखते है। मोहन भागवत भारत के उन थोड़े से लोगो में से है जिन्हें Z+ सुरक्षा दी गई है।

3. 30 जनवरी, 1948 को बिड़ला भवन, दिल्ली में शाम 5 बजकर 10 मिनट पर नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर महात्मा गांधी की हत्या की थी। हत्या के बाद RSS का नाम उछाला गया। कहा गया कि गोडसे RSS का ही सदस्य है जबकि गोडसे ने RSS को सन् 1930 में ही छोड़ दिया था। इसी समय पूरी दुनिया को पता चला की भारत में कोई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम का कोई संगठन भी है। उसी समय देश के गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने RSS पर बैन लगा दिया। नेहरू चाहते थे कि RSS को हमेशा के लिए बैन कर दिया जाए, लेकिन सबूतों के अभावों में सरदार पटेल ने ऐसा करने से मना कर दिया और जुलाई 1949 में RSS से बैन हटा लिया गया।

4. आरएसएस की पहली शाखा में सिर्फ 5 लोग(संघी) शामिल हुए थे लेकिन आज देशभर में आरएसएस की 60,000 से ज्यादा शाखाएँ है और एक शाखा में लगभग 100 स्वयंसेवक है। आज के समय में आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान है

5. RSS में महिलाएँ नही है, क्योकिं ये allowed ही नही है। महिलाओं के लिए राष्ट्र सेविका समिती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र सेविका समिति दोनों अलग-अलग है लेकिन दोनो के विचार एक है। कई लोगो को ये गलतफहमी हो जाती है कि Sevika Smiti भी RSS का ही भाग है लेकिन ऐसा नही है।

6. आरएसएस की क्लास शाखा के रूप में लगती है। सुबह लगने वाली शाखा को ‘प्रभात शाखा‘ कहते है। शाम को लगने वाली शाखा को ‘सायं शाखा‘ कहते है। सप्ताह में एक या दो बार लगने वाली शाखा को ‘मिलन शाखा‘ कहते है। महीने में एक या दो बार लगने वाली शाखा को ‘संघ मंडली‘ कहते है।

7. आरएसएस की शाखाओं में शाखा के अंत में एक प्रार्थना गाई जाती है नमस्ते सदा वत्सले… यह संघ की स्थापना के 15 साल बाद गाई जाने लगी। इससे पहले एक श्लोक मराठी और एक श्लोक हिंदी में गाया जाता था।

8. RSS देश के लिए काम करता रहा है लेकिन इस पर आरोप भी लगते रहे है। आरएसएस ने 1962 में भारत-चीन के युद्ध में सरकार का पूरा साथ दिया था। इसी से खुश होकर नेहरू ने 1963 की गणतंत्र दिवस प्रेड में RSS को शामिल होने का न्योता दिया था। RSS, बाढ़ और प्राकृतिक आपदा आदि में भी देश-विदेश के लिए काम करता रहा है।

9. RSS के सदस्य किसी भी पद पर चले जाए, ज्यादातर काम खुद ही करते है जैसे: कपड़े धोना, भोजन बनाना आदि। और अपने से बड़े पदाधिकारी के प्रति बहुत ही आज्ञाकारी होते है

10. RSS के प्रचारक को संघ के लिए काम करते समय तक अविवाहित रहना होता है। और दूसरे होते है संघ के विस्तारक, जो गृहस्थ जीवन में रहकर ही संघ से किशोरों को जोड़ने का काम करते है।

11. संघ का प्रचारक बनने के लिए किसी भी स्वयंसेवक को 3 साल तक OTC यानि ऑफिसर ट्रेनिंग कैंप में भाग लेना होता है। और शाखा प्रमुख बनने के लिए 7 से 15 दिन तक ITC यानि इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग कैंप में भाग लेना होता है।

12. ऐसा नही है कि RSS में सिर्फ हिंदू ही है, आपकी जानकारी के लिए बता दे कि RSS में मुस्लिम भी है। सन् 2002 से RSS एक ‘Muslim Rashtriya Manch’ नाम की विंग चलाती है। जिसमें लगभग 10,000 मुस्लिम है।

13. BJP के बड़े नेता जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक रह चुके है।

14. RSS का अपना अलग झंडा है, भगवा रंग का। सभी शाखाओं में यही झंडा फहराया जाता है। आरएसएस किसी आदमी को नही बल्कि भगवा ध्वज को ही अपना गुरू मानती है।

15. आरएसएस की ड्रेस में काली टोपी, सफेद शर्ट, कपड़े की बेल्ट, खाकी निक्कर, चमड़े के जूते है। अब खाकी निकर की जगह पूरी पैंट कर दी गई है।

16. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिर्फ भारत में ही नही बल्कि दुनिया के 40 देशो में है। विदेश में संघ की पहली शाखा मोंबासा, केन्या में लगी थी।

17. Q. RSS में महिलाएँ क्यों नही है ?

Ans. इसके दो मुख्य कारण है:
(i) RSS की शाखा सुबह और शाम को लगती है जो गृहिणी (महिला) के लिए सही नही है।
(ii) शाम की शाखा में भीड़ होती है। यहाँ पर बहुत से ऐसे गेम खेले जाते है जिनमें physical activity ज्यादा होती है। जैसे एक दूसरे को धक्का देना, टाँगो में बीच में से निकलना, कब्बड्डी खेलते समय एक दूसरे पर गिरना etc. यही दो कारण है महिलाओं का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में ना होने के।

Source – Gazabhindi

Team Vigyanam

Vigyanam Team - विज्ञानम् टीम

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11 Comments

  1. जो भी भारत का नागरिक है चाहे बो किसी भी धरम का हो …भारतिय ….हिंदोस्तानी संसकृति में बिस्बास रखता हो …..सबयमसेबक होना चाहिए…….

  2. मेरा भारत के सभी हिंदूओ से है कि अब भारत मे मुस्लिम 50%हो गय है लेकिन हिंदुओं मे एकता नही है अपनी आबदी बढाए ओर सभी हिंदू एक रहे!

  3. भारत और भारतीय संस्कृति के गौरव , जागरण के लिए काम करने वाले एवं आपदाओं के समय सामने आकर प्राणप्रण से न केवल स्वदेश अपितु विदेशों में भी कारसेवा करने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भाव पूरित ह्रदय से नमन करता हूँ।

  4. मेरा सिर्फ कहना यही क़ि हर हिन्दू को एक होना चाहिए और हां हर हिन्दू भाई से निवेदन है क़ि अपनी अपनी छत पर एक भगवा झंडा जरूर लगाएं ।
    🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩जय श्री राम 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🐅🐅🐅🐅🚩🚩 अंकित झा (योगीजी) बजरंग -दल🚩🚩🚩🐅🐅🐅🐅

  5. Apney aas paas lagney waley Sangh ki shakhaa mein sammilit ho jayey.. parichay ke paschat aap khud swayamsevak ban jayengey , kisi interview patrachaar ki aawashyaktaa nahi hai.
    ……….Om Prakash Gupta, Ek swaymsevak

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