महाभारत के 10 ऐसे पात्र, जिन्हें शायद आप नहीं जानते होंगे

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प्रत्येक व्यक्ति एवं हिंदू महान ग्रन्थ महाभारत के बारे में भली-भांति परिचित है एवं यह इनके प्रत्येक पात्र के बारे में भी समुचित जानकारी रखते है परंतु महाभारत में कई ऐसे पात्र भी थे जिन्होंने इस महान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई परंतु फिर भी उन्हें भुला दिया गया तथा उनके बारे में ज्यादा बातें भी नहीं की जाती |

1. अहिलावती

अहिलावती को नाग-कन्या के नाम से भी जाना जाता है, जिसका विवाह भीम के पुत्र घटोत्कच के साथ हुआ था तथा शादी होने से पहले लीलावती में घटोत्कच की कई बार परीक्षा भी ली थी एवं घटोत्कच्छ को अपने को प्रमाणित करने का अवसर दिया था | अहिलावती, महान योद्धा बर्बरीक की माता थी एवं इन्होने ही बर्बरीक को बचपन से ही कमजोर और असहाय लोगों की मदद करना सिखाया था |

2. जरासंध

जरासंघ, मगध का राजा था तथा वह भगवान शिव का एक बहुत बड़ा भक्त भी था | आसुरी प्रवृति के जरासंघ की मृत्य भीम के द्वारा हुई थी | जब भी भीम, जरासंघ का शरीर को बीच में से फाड़कर उसके 2 टुकड़े करता था तो उसका शरीर ही अपने आप जुड़ जाता था, बाद में भगवान श्रीकृष्ण की सलाह के अनुसार भीम ने इसके शरीर के बीच में से 2 टुकड़े कर विपरीत दिशाओं में फैंका जिसके बाद उसका शरीर दुबारा जुड़ ना सका तथा मृत्यु को प्राप्त हुआ |

3. बर्बरीक

बर्बरीक, घटोत्कच्छ और अहिलावती का पुत्र था परंतु वास्तव में यह पिछले जन्म में एक यक्ष था तो एक श्राप के कारण मानव रूप में जन्मा | यह भीम का पौत्र था तथा भगवान श्री कृष्ण के वरदान के कारण “खाटू श्याम” के रूप में पूजे जाते है |

4. युयुत्सु

युयुत्सु, राजा धृतराष्ट्र का पुत्र था तथा सौ कौरवो में से एक था | बहुत कम लोग को पता है कि धृतराष्ट्र ने एक अन्य राजकुमारी से भी विवाह किया था, जिसका पुत्र युयुत्सु था | यह दुर्योधन से छोटा था परंतु बाकी 98 कौरवो से बड़ा था | महाभारत की लड़ाई के पश्चात युयुत्सु अकेला ऐसा कौरव था जो जीवित बचा था तथा बाद में इस से ही इंद्रप्रस्थ का राजा बनाया गया |

5. विकर्ण

विकर्ण, दुर्योधन का छोटा भाई था तथा धृतराष्ट्र व गांधारी की सौ संतानों में से एक था | द्रौपदी के चीर हरण के दौरान विकर्ण ही एक ऐसा अकेला कौरव था जिसने इस बुरे कृत्य के खिलाफ आवाज आवाज उठायी थी |

6. शल्य

शल्य, मद्र के राजा थे व नकुल, सहदेव की माता माद्री के भाई होने के कारण रिश्ते में पांडवो के मामा लगते थे | महाभारत के युद्ध में यह पांडवो के पक्ष से लड़ना चाहते थे लेकिन दुर्योधन ने छल-पूर्वक इन्हें अपनी और मिला लिया | महाभारत के युद्ध में इनकी मृत्यु युधिष्ठिर के द्वारा हुई थी |

7. सात्यकी

सात्यकी उन बचे खुचे योद्धाओं में से एक था जो महाभारत के युद्ध के बाद जीवित बच गये थे | सात्यकी, अर्जुन का शिष्य तथा एक वृष्णेय था, जो यादवो में से ही एक थे | महाभारत के युद्ध में यह पांड्वो की ओर से लड़ा था तथा पुरे महाभारत युद्ध में अर्जुन, भीम, घटोत्कच्छ के पश्चात यही यौद्धा था जिसके सामने आने से कौरव घबराते थे, परन्तु इसे युद्ध में लड़ने की भारी कीमत चुकानी पड़ी क्योकि इसके दसों पुत्र इस युद्ध में मारे गए थे |

8. शिखंडी

शिखंडी, पंचाल नरेश द्रुपद का पुत्र व द्रौपदी का भाई था | यह जन्म से ही नपुंसक था तथा कथाओ के अनुसार यह पिछले जन्म में अम्बा नामक राजकुमारी था तथा भीष्म से बदला लेने के उद्देश्य से इसने पुनः जन्म लिया | महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने इसी की आड़ लेकर भीष्म का वध किया था |

9. एकलव्य

एकलव्य, भील जाती का महान योद्धा था जो बचपन से ही महान धनुर्धर बनना चाहता थे लेकिन द्रोण ने अर्जुन को वचन दिया था की वह सिर्फ अर्जुन को ही विश्व का श्रेष्ठ धनुर्धर बनायेंगे एवं सिर्फ राजकुमारों को ही शिक्षा प्रदान करेंगे, इसी कारण द्रोण ने एकलव्य का अंगूठा गुरुदाक्षिणा में मांग लिया | बाद में एकलव्य ने भील तथा निषादों की एक शसक्त सेना बनायी एवं अपनी शक्ति का अभूतपूर्व विस्तार किया | एकलव्य की मृत्यु श्री कृष्णा के द्वारा हुई थी |

10. घटोतकच्छ

घटोतकच्छ, भीम तथा हिडिम्बा का पुत्र था | हिडिम्बा एक राक्षसी व भीम मानव थे इसीलिए घटोतकच्छ में दोनों के गुण विद्यमान थे, घटोतकच्छ एक महान योद्धा भी थे जो कई तंत्र विद्याओं में निपुण थे | घटोतकच्छ की मृत्यु महाभारत के युद्ध में कर्ण के हाथों हुई थी |

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