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क्या होगा अगर पृथ्वी पर एक किलोमीटर की उल्का गिर जाये…

Power Of An Asteroid In Hindi

Power Of An Asteroid In Hindi – 1908 में Russia के Siberia में 100 मीटर की Asteroid ऐटमोस्फेयर में फट गई थी जिसे Tunguska event भी कहते हैं जिससे निकलने वाली energy और Shock-waves ने साईवेरिया के 2 हजार किलोमीटर के जंगलो में करीब 8 करोड पेड़ जलाकर राख कर दिये थे।

धमाका इतना तेज था इसने कई किलोमीटर दूर तक की प्रोपर्टी तवाह कर दी थी इसकी आवाज कई सैकड़ो किलोमीटर दूर तक लोगो ने सुनी थी।  इसकी ताकत आज के बनाये गये सबसे खतरनाक न्युक्लियर बम जार बोम्बा से आधी थी यानि की 25 मेगाटन टीएनटी के बराबर, अगर ये उल्का या Asteroid आज किसी भी बड़े शहर में गिरता है तो वह वहां के करीब 96 लाख लोगों को तुंरत खत्म कर देगा।

5 लाख सालों में एक बार

वैसे तो इस तरह के इस आकार के ऐस्टोरोयेडस हजार सालों में एक बार ही अर्थ पर गिरते हैं पर अगर कोई उल्का 1 किलोमीटर के आकार को हो तो उसके गिरने के चांस औऱ कम हो जाते हैं, ऐसे Asteroid 5 लाख सालों में एक बार ही पृथ्वी को निशाना बनाते हैं।

वैज्ञानिक मानते हैं कि आने वाले कुछ सैकड़ो सालों में इस तरह का एक Asteroid पृथ्वी से टकरा सकता है और अगर ये टकराया तो इससे मचने वाली तबाही को हम देख भी नहीं पायेंगे।  पर वैज्ञानिक और नासा और तमाम स्पेस ऐजेंसी दिन रात काम करके इस तरह के ऐस्टोरोडस्य पर नजर रखती हैं और वह रास्ता निकालरहीं है जिससे भविष्य में इन विनाशकारी उल्काओं से बचा जा सके।

सोचिए, तब क्या होगा कि ये एक किलोमीटर वाली Asteroid मात्र एक साल में ही पृथ्वी पर टकराने वाली हो, वैज्ञानिकों ने उसे खोजा और पाया कि जो उसकी डेरेक्शन और स्पीड  है उसके मुताबिक वह एक साल बाद पृथ्वी से टकरा ही जायेगी, तो ऐसे में वैज्ञानिक और दुनिया के तमाम देश क्या करेंगे आइये उस पर नजर डालते हैं।

कहां गिर सकती है उल्का (Asteroid) 

वैसे देखा जाये तो Simulations के आधार पर हम यह Predict कर सकते हैं ये उल्का पृथ्वी पर कहां गिरेगी, पर जैसा कि आप जानते हैं कि पृथ्वी पर 70 परसेंट पानी है तो इस आधार पर इस उल्का के 70 परसेंट चांस पानी में गिरने के होंगे पर हम ये भी जानते हैं कि पृथ्वी पर 30 परसेंट लैंड भी है जहां पर हम इंसान रहते हैं तो ऐसे में यहा पर भी ये उल्का गिर सकती है जिसके 30 परसेंट चांस बनते ही हैं।

Source – Phys.org

पर इस 30 परसेंट जमान पर भी बहुत सी जमीन पर कोई भी इंसान नहीं रहता है जैसे की सहारा के रेगिस्तान और रसिया के ठंडे डैसर्ट जो पूरी तरह से खाली ही हैं, तो ऐसे में इस उल्का के इंसानो की घनी आबादी वाले शहर पर गिरने के बहुत ही कम चांस बनते हैं पर हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि 1 किलोमीटर के आकार वाले ये उल्का बहुत – बहुत घातक हैं ये जहां भी गिरें रेगिस्तान में या पानी में ये बहुत विनाशकारी तबाही मचा सकते हैं जिसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं।

50,000 Megaton TNT

इस Asteroid या उल्का में अपनी स्पीड और आकार से इतनी Kinetic Energy बन चुकी होगी कि जब ये पृथ्वी से टकरायेगा तो करीब 50 हजार मेगाटन टीएनटी (Megaton TNT) की उर्जा यानि ऐनेर्जी रिलीड करेंगा जो कि एक हजार Tsar Bomba के बराबर होगी।

Tsar Bomba अबतक का बनाया गया सबसे विनाशाकारी मानव बम है पर ये उल्का उससे भी एख हाजर गुना विनाशकारी होगी जो अगर किसी महाद्वीप पर गिरती है तो उसे चंद मिनटो में ही बरबाद करके रख देगी।

क्या हम इनसे बच सकते हैं

पर क्या हम इनसे बच सकते हैं और इससे बचने के क्या तरीके हैं, तो सबसे पहले हम ये कर सकते हैं सभी ताकतवर देश एक साथ काम करें और एक ऐसा न्युक्लिर बम बनायें जो कि एक रोकेट की मदद सीधा इस Asteroid पर फोड़ा जाये और उसमें क्रेक लादे जो कि कुछ हद तक इस उल्का की डेरेक्शन बदल दे, स्पेस में कुछ मीटर और सेंटीमीटर डारेक्शन बदलने से भी बहुत फर्क पड़ता है जिससे ये उल्का पृथ्वी को मिस कर जाये और उसके पास से निकल जाये।

पर इतनी बड़ी उल्का को फोड़ने के लिए या उसमें जरा सा भी क्रेक करने के लिए हमें जार बोब्मा जितना ताकतवर औऱ भारी बम बनाना पड़ेगा पर क्या हमारे पास ऐसा रोकेट है जो कि जार बोम्बा जैसे 27 हजार किलो वजन के बम को स्पेस में ले जा सके, तो इसका जवाब है हाँ नासा के पास Saturn V नाम का एक रोकेट है जो कि 48 हाजर किलो तक का भार उठा कर स्पेस में जा सकता है।

अब हमारे पास ये सब तो है पर हमें ये केवल और केवल एक साल के अंदर ही करना होगा जो कि बहुत मुश्किल है पर अगर सभी देश गजब की इच्छाशक्ति दिखायें तो ये भी हो सकता है।

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कितनी तबाही मचा सकती है 1 किलोमीटर की उल्का

अगर ये 1 किलोटीर की उल्का पृथ्वी पर समुद्र यानि औसियेंस में गिरती है तो तब ये बहुत खतरनाक Tsunami पैदा कर सकती है जिसके साथ – साथ भूकंप भी आ सकता है, सुनामी इतनी विशाल होगी कि जिसकी हम क्लपना भी नहीं कर पायेंगे ये आसपास के शहरों और तटों को तुरंत डुबा देगी, अगर ये किसी घनी मानव आबादी पर गिरती है तो ये एक ऐसकी ताकत से 13 किलोमीटर जितना चौड़ा गढ़ा बन जायेगा…और यह पूरे कोटिंनेट को खत्म कर देगी जिसमें हर तरह का जीवन खत्म हो जायेगा।

अगर हम और ज्यादा अनलकी रहे और 5 से 10 किलोमीटर की उल्का हमने डिटेक्ट की तो हम फिर कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये उल्का उतनी घातक होगी जितनी घातक उल्का से आज से 6.5 करोड़ साल पहले डायानासोर्स का अंत हुआ था…. इससे ही आप इसकी ताकत की कल्पना कर सकते हैं…. तो हम ऐस्टोरोयेड को केवल पृथ्वी से टकराने से रोक सकते हैं और वह भी तब जब हम उसे जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी डिटेक्ट कर सकें……

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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