अद्भुत, पाकिस्तान की इस जगह पर 17 लाख साल से हो रही है हनुमान जी की पूजा

भले ही आज दोनों देश भारत और पाकिस्तान अलग-अलग हैं पर सनातन काल से यहाँ पर भगवान की पूजा होती रही है। यह धरा सनातन काल से पुजनीय रही है पाकिस्तान में अधिकतर हिन्दू प्रतिको को या तो नष्ट कर दिया गया या उन्हें मस्जिद और मदरसों में परिवर्तित कर दिया गया। लेकिन कुछ प्राचीन मंदिर आज भी पाकिस्तान के विभिन्न प्रान्तों में है। इनमे से एक है त्रेता युगीन पंचमुखी हनुमान मंदिर !

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग को तीसरा युग माना जाता है और इसकी उम्र को हिन्दू ग्रंथो में 17 लाख साल बताया गया है, उसी प्रकार कलियुग को 4 लाख 32 हजार वर्षों का बताया गया है।

जिन हिन्दुओ ने 1947 में विभाजन के समय अपना घर नहीं छोड़ा, उनके लिए ये मंदिर आस्था का अमिट चिन्ह है। विभाजन के दौर में मची मारकाट से उस समय यही मंदिर उनका प्राण रक्षक बना था। तब यहां कई हिंदू परिवारों ने शरण ली थी। दो देशो के विभाजन का असर मंदिर पर भी हुआ है। एक समय भक्तो से भरे रहने वाले इस मंदिर में अब चहल पहल कम ही रहती है।

पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं की संख्या बहुत कम है, तो भारत से यहां जाने के लिए हिंदुओं को पाकिस्तान की सरकार से अनुमति लेनी होती है, जिसमें बहुत वक्त लगता है। लेकिन विभाजन की त्रासदी भी हनुमानजी के प्रति श्रद्धा और आस्था को कम नहीं कर सकी और आज भी यहां अनेक श्रद्धालु हनुमान जी के दरबार में शीश झुकाते आते हैं। आज भी यहां मंगलवार और शनिवार को काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। पंचमुखी हनुमान मंदिर कालचक्र के विभिन्न दौर से गुजरकर आज भी शान से खड़ा है।

पंचमुखी हनुमान मंदिर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कराची जिले में स्थित है। कहा जाता है की यह 17 लाख वर्ष पुराना मंदिर है, जो हिन्दू गणना से पर आधारित है, तथा इसका कालखंड त्रेता युग है। करांची में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की मान्यता है की यहाँ हर मनोकामना पूर्ण होती है। इस ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिर का पुर्ननिर्माण 1882 में किया गया। बताया जाता है कि, हनुमानजी की यह मूर्ति डेढ़ हजार वर्ष पहले प्रकट हुई थी। जहां से मूर्ति प्रकट हुई वहां से मात्र 11 मुट्ठी मिट्टी को हटाया गया और मूर्ति सामने आ गई।

पंचमुखी हनुमानजी मंदिर में स्थापित हनुमानजी की मूर्ति को काफी असाधारण माना जाता है, क्योंकि यहाँ के स्थानीय लोगों का मानना है कि, यह मूर्ति लाखों साल पुरानी है और इसका संबंध त्रेतायुग से है। मंदिर पुजारी का कहना है कि, यहां सिर्फ 11-12 परिक्रमा लगाने से मनोकामना पूरी हो जाती है। हनुमानजी के अलावा यहां कई हिन्दु देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

पंचमुखी हनुमानजी के दर्शन के लिए यहां भक्‍तों की भीड़ लगी रहती है, जिसमें केवल हिन्दू ही नहीं अन्य मतों और पन्थो के अनुयायी भी होते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि, इस मंदिर में भगवान श्रीराम स्वयं आ चुके हैं। कहते हैं, इस मंदिर में स्थापित हनुमाजी की मूर्ति स्वयंभू है, जो जमीन के अंदर से प्रकट हुई थी। स्थानीय नागरिको के अनुसार, वर्तमान में जहां मंदिर स्थित है, वहां एक तपस्वी साधना किया करते थे।

एक दिन उन्हें सपने में पंचमुखी हनुमान का दर्शन हुए और उन्हें हनुमानजी से निर्देश मिला कि मैं इस जगह के नीचे पाताल लोक में निवास कर रहा हूं। तुम मुझे यहां स्थापित करो। स्थानीय नागरिको का मानना है कि, आज जिस स्थान पर यह मंदिर स्थित है, उस स्थान से तपस्वी ने 11 मुट्ठी मिट्टी हटाई तो और हनुमानजी मूर्ति प्रकट हुई थी।

साभार – विभिन्न हिन्दी चैनल

Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें सनातन संस्कृति से बहुत लगाव है।

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