कार्ड भुगतान से बैंकों को लगेगी 3,800 करोड़ की चपत

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सरकार द्वारा डिजीटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये पीओएस मशीनों के जरिये भुगतान करने पर जोर देने से बैंकों को सालाना 3,800 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

 

पिछले साल नवंबर में नोटबंदी के ऐलान के बाद मोदी सरकार ने ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने के लिये पीओएस मशीनों को स्थापित करने पर जोर दिया था। इसके बाद बैंकों ने अपने पीओएस टर्मिनलों की संख्या दोगुनी से ज्यादा कर दी थी। नोटबंदी के बाद मार्च 2016 में पीओएस टर्मिनलों की संख्या 13.8 लाख से बढ़कर जुलाई 2017 में 28.4 लाख हो गयी।

 

एसबीआई रिसर्च ने आज अपनी रिपोर्ट में कहा, “हमारा अनुमान है कि दूसरों के जरिये होने वाले लेनदेन (आफ-अस), पीओएस मशीन पर कार्ड से भुगतान करने से 4,700 करोड़ रुपये का वार्षिक नुकसान हुआ है। हालांकि, सामान लेनदेन (ऑन-अस लेनदेन) से केवल 900 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है।

 

कार्ड भुगतान उद्योग चार पक्षीय मॉडल- जारीकर्ता बैंक, अधिग्रहण बैंक, व्यापारी, ग्राहक पर आधारित होता है। पीओएस से लेनदेन करने पर जब कार्ड जारी करने वाला बैंक और पीओएस स्थापित करने वाला बैंक सामान होता है, जो उसे ऑन-अस लेनदेन कहा जाता है, वहीं इसके विपरीत जब दोनों बैंक भिन्न होते हैं तो उसे ऑफ-अस लेनदेन कहा जाता है।

 

स्रोत-PTI

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