इस पेड़ के अंदर है 2 हजार साल पुराना शिव मंदिर, जानें क्या है रहस्य

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हमारा देश रहस्यों का देश है,यंहा इतने रहस्य भरे पड़े हैं कि हर कोई जब एक रहस्य को सुलझाता है तो उसके सामने दूसरा रहस्य तुरंत सामने आ जाता है। मंदिरो के इस देश में हर मंदिर का अपना-अपना रहस्य है और ऐसे ही एक रहस्यमयी मंदिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर सेवना गांव है। वैसे तो गांव दो हजार साल से अधिक पुराना बताया जाता है। यहाँ का इतिहास बेहद भव्य है।

बता दें कि प्रसिद्ध सेवना नदी यहीं से निकलती है। जिस जगह सेवना नदी का उद्गम है, बस वहीं पर ही यह अद्भुत व लोगों को आकर्षित करने वाला अद्भुत पेडऩुमा महादेव मंदिर नजर आएगा।

यहाँ मंदिर पेड़ के तने के अंदर बना हुआ है। और यह मंदिर इतना विशाल है कि एक साथ आसानी से पांच व्यक्ति खड़े हो सकते हैं। प्राचीन समय से यहाँ नियमित पूजा-अर्चना की जाती रही है।

यहीं से सेवना नदी निकलती है जो मंदसौर में पशुपतिनाथ मंदिर के बगल से निकल रही है। अंत में जाकर वह चम्बल में मिल जाती है।

ऐसा ही एक आश्‍चर्यों से भरा वृक्ष बिहार के पश्‍चिमी चंपारण के सेमरा गांव में भी देखने को मिलता है। बरदग और पीपल के दो विशाल वृक्षों की खासियत यह है कि इसके तनों के भीतर मौजूद है भगवान शिव का रहस्यमी मंदिर।

सिर्फ इतना ही नहीं इन दोनों प्राचीन वृक्षों की टहनियां आश्‍चर्यजनक रूप से शिव के धनुष, त्रिशूल, डमरू और गले का हार यानि सर्प का आभास दिलाती हैं।

अदभुत्, आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय। इस दो वृक्षों के बारे में जानकर आप भी चकित रह जाएंगे। लोकआस्‍था है कि इन दो वृक्षों के भीतर बने मंदिर में साक्षात देवाधिदेव शिव का निवास है।

इस दोनों पेड़ों की टहनियां भगवान शिव का डमरू हैं तो शाखाएं त्रिशूल, यही नहीं टहनियों से ही भगवान् गणेश और नाग देवता भी बने हुए हैं।

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