पहली बार देखें कैसे Atoms के वाइब्रेट होने पर Electrons उनके साथ किस तरह घूमते हैं

SLAC नेशनल एक्सेलेरेटर प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने एक अजीब प्रदार्थ में Atoms के कंपन(वाइब्रेट) होने पर Electrons का उनके साथ एक लय में घूमने का सबसे पहले और सटीक माप लिया है। वैज्ञानिको ने पहली बार इस क्रिया को देखा कि कैसे कंपन के साथ इलेक्ट्रोन्स धूमते हैं, उन्होंने इस क्रिया को एक प्रकार का डांस कहा है।

साइंस में प्रकाशित पेपर, बताते हैं कि टीम ने आइरन सेलेनाइड (iron selenide) की परत पर कंपन पैदा करने के लिए एक infrared laser का प्रयोग किया।  ऐसा करने से सेलेनियम के परमाणु लोहे से दूर चले गए और उन्होंने इलेक्ट्रॉन ऑर्बिटल्स की ऊर्जा को बदल दिया। परिणाम को देखने के बाद कंपन और इलैक्ट्रोन्स के घूमने की गति को पहले के सिद्धांत के अनुसार 10 गुना ज्यादा मापा गया।

SLAC और स्टैनफोर्ड के प्रोफेसर स्टैनफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर मटेरियल्स एंड एनर्जी साइंस के प्रोफेसर झी-जुन शेन ने कहा, “ये सटीक माप हमें इन सामग्रियों के व्यवहार के बारे में गहरी जानकारी देंगे।”

आयरन सेलेनेइड एक अजीब तत्व है जो अतिसंवेदनशीलता(superconductivity) से जुड़ा हुआ, जिसमें यह प्रदार्थ बिना किसी अवरोध (Resistance) के इलैक्ट्रोन्स के प्रवाह को आसानी से होने देता है। वर्तमान में, सुपरकंडक्टिविटी हासिल करने के लिए किसी भी मैटर को शून्य से 100 डिग्री ज़्यादा कम होना चाहिए, लेकिन आइरन सेलेनइड जैसे मैटर इसको समान्या तापमान पर भी हासिल कर सकते हैं।

इस घटना का एक प्रतीक – स्रोत – Greg Stewart/SLAC National Accelerator Laboratory)

अतिसंवेदनशीलता इस बात से संबंधित है कि कैसे कम तापमान पर इलेक्ट्रॉनों को एक-दूसरे के साथ जुड़ते हैं , इसलिए उनका व्यवहार बहुत ही महत्वपूर्ण है। दिलचस्प बात यह है कि, यह कंपन एक कण (जिसे फोनोन(phonon) कहा जाता है) की तरह व्यवहार करते हैं, और वे इलेक्ट्रॉनों के साथ जुड़ जाते हैं।

इलैक्ट्रोन्स का यह व्यवहार देखने के लिए टीम ने Linac Coherent Light Source   जो एक बहुत ही शक्तिशाली X-ray laser  है उसका उपयोग किया।

वैज्ञानिको ने साथ में ही इस घटना को एक स्क्रीन पर भी रिकोर्ड कर लिया, इसके लिए उन्होंने दो खास कैमरे का उपयोग किया और लगभग 100 खरब Frames एक सेंकेंड में लेकर ऐसी 100 तस्वीरों को जोडकर यह छोटी सी फिल्म बनाई जिसे आप देख सकते हैं। वैज्ञानिको का मानना है कि इससे हमें  सुपरकंडक्टिविटी हासिल करने में भविष्य में बहुत मदद मिल सकती है, यदि ऐसा हुआ तो संसार में बिजली की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जायेगी।

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