Poems

राजनीति का स्तर – कविता

Hindi poem on politics- राजनीति जैसा शब्द से ही पता चल रहा है एक ऐसी नीति का प्रयोग करना है जिससे विशाल लोगों का शासन अपने पास आ जाये और फिर कुछ नीतियों से हम उस शासन को चलाते रहें, पर भारत में राजनीति का एक अलग ही रुप और स्तर है, जिस पर कवि ने कुछ बिंदू रखे हैं…

साल के शुरू होते ही, हलचल तेज हुई इसबार ।
भारत का भविष्य देख,चिंतित मन हुआ अपार ।।
बढ़ते भारत का उज्जल,फिर हैं जनता के हाथों में।
गिरती राजनीति का गिरा स्तर, फिर लगा बाटने जातो में।।

राजनीति करने नही वो,बदलाव लाने आए थे भाई।
वोट बैंक के ख़ातिर, राष्ट्रद्रोही भी लगते उन्हें जमाई ।।
देश विदेश तक नाम हुआ,भारत भी हो रहा मज़बूत ।
आकथू ऐसी राजनीति पर, जो जवानों से माँगे सबूत ।।

हो रहा था सतत विकास,देश की भी होरही थी शुद्धि ।
तभी संसद में खड़ा हुआ,एक प्यारा बालक
मन्दबुद्धि ।।
कहा, रक्षा सौदे तो रहे हैं, शुरू से ही घोटालो का सोर्स।
इतिहास उठा के देख लो, ऑगस्टा वेस्टलैंड हो या बोफोर्स ।।

सर्वोच्च न्यायालय में जाँच हुई,कहा डील हुई थी प्योऱ।
राजकुमार फिर क्यू कहते रहते,चौकीदार हैं ये चोर ।।
बात उनकी भी करते हैं ,जो लोकतंत्र बचा रहा हैं।
न जाने कौन घोटाला उजागर होजाए,उसका दर सता रहा है ।।

जाति, धर्म और भेदभाव,जो ये समाज की सोच हैं।
आगे नही बढ़ेगा भारत ,जबतक पाँव में ये मोच हैं ।।
एक न सुनो राजनेता की,सुने तो बस दिल की सुनें।
अपने और देशहित के लिये,सिर्फ देशभक्त पार्टी चुने।।

जय हिंद
जय भारत

दीपक पटेल
(हल्के फुल्के राजनीतिक विशेषज्ञ )

– शहीद दिवस – कविता

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